हिंदी साहित्य लेखन का कार्य विगत कई शताब्दियों से होता रहा है और आने वाली अनंत शताब्दियों तक होता रहेगा। हिंदी साहित्य आम जन को सुलभता से उपलब्ध हो इस उद्देश्य से सेतु प्रकाशन की शुरुआत की गई है। साहित्य की सर्जना में गुणवत्ता का समावेश  सेतु प्रकाशन का मूल ध्येय है। साहित्य नित नवीन प्रयोगों व अनुभूतियों के माध्यम से अपने आप को समृद्ध करता रहा है और इस समृद्धि का लाभ साहित्य के मर्मज्ञों व सामान्य पाठकों को प्राप्त हो सके, यही  सेतु प्रकाशन की स्थापना का आधारभूत तत्व है।

सेतु प्रकाशन की स्थापना डॉ. अमिता पांडेय के कुशल नेतृत्व में वर्ष 2018 में की गई है। अपने पहले ही प्रकाशन वर्ष में सेतु प्रकाशन के द्वारा विष्णु खरे, मदन कश्यप, ज्ञानेन्द्रपति, मंगलेश डबराल, निदा नवाज, संजय कुंदन, प्रदीप जिलवाने, जया जादवानी, निशांत जैसे साहित्यकारों की रचनाओं का प्रकाशन किया गया है। वर्षों पहले पाठकों की नजर से ओझल हो चुकी दिनकर पर  सावित्री सिन्हा द्वारा लिखी  समालोचना युगचारण दिनकर का पुनर्प्रकाशन भी किया गया जो दिनकर की रचना के बहुआयामी पक्षों का उद्घाटन करती है।

सेतु प्रकाशन के द्वारा साहित्य के माध्यम से समाज का परिष्करण और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का प्रयास भी किया जाएगा और इस प्रयास के तहत उन रचनाओं का प्रकाशन किया जाएगा जो इसका संवर्धन करते हैं। सेतु प्रकाशन का उद्देश्य लुप्तप्राय ग्रन्थों एवं प्राच्य पाण्डुलिपियों का पुनर्प्रकाशन करना एवं भारतीय प्राचीन आध्यात्मिक ग्रन्थों को उनके मूल स्वरूप में पुनर्प्रस्तुत करना भी है।