Asahmatiyon Ke Vaibhav Ke Kavi Shriprakash Shukla

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असहमतियों के वैभव के कवी श्रीप्रकाश शुक्ल

1990 के बाद जिन कवियों ने हिन्दी कविता के आँगन में दस्तक दी, उनमें आज श्रीप्रकाश शुक्ल अग्रगण्य हैं। उनकी लगभग तीस वर्षीय काव्य-यात्रा का मूल्यांकन है यह पुस्तक ।

श्रीप्रकाश शुक्ल का काव्य-संसार मूलतः उनका आस-पड़ोस है। आस-पड़ोस का अर्थ सहजीवन से है। सहजीवन में प्रकृति और उसके उपदान हैं; सामाजिक हैं, सामाजिक की सामूहिक चेतना है; उत्सव है, ध्वंस है-विसंगतियाँ, अपक्षरण, क्रूरताएँ हैं। ये सब मिलकर जिस काव्यात्मक व्यायोम की रचना करते हैं और उसके लिए काव्य की जिस संवेदनात्मक संरचना का विस्तार करते हैं- उसके लगभग सभी आयामों को इस पुस्तक में दर्ज करने की कोशिश की गयी है। इसमें वरिष्ठ से लेकर नव्यतम पीढ़ी के रचनाकारों ने जो योगदान दिया है, वह सम्पादक द्वय के उद्यम के साथ ही कवि की व्यापक स्वीकृति का परिचायक है।
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