Bail Ki Aankh – Santosh Dixit

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Bail Ki Aankh – Santosh Dixit
बैल की आँख -संतोष दीक्षित

त्येक समय, समाज और स्थान की अपनी गति होती है। अल्प काल की अवधि में देखने पर यह स्थिर और जड़ प्रतीत होता है परन्तु उसकी आन्तरिक हलचलें उसे निरन्तर गतिमान बनाये रखती हैं। 

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