Gyan Ki Rajneeti – Manindra Nath Thakur

680.00850.00

Gyan Ki Rajneeti – Manindra Nath Thakur
ज्ञान की राजनीति – मणीन्द्र नाथ ठाकुर

“यह पुस्तक एक तरह से बहुआयामी संवाद के लिए आग्रह है। दर्शनों के बीच संवाद, दार्शनिकों और आम लोगों के बीच संवाद, लोक परम्परा और शास्त्रीय परम्परा के बीच संवाद, पश्चिम और पूरब के बीच संवाद, संस्कृतियों के बीच संवाद, अलग-अलग धर्मों के बीच संवाद और बुद्धिजीवियों और आम जन के बीच संवाद के लिए आग्रह है।

In stock

You may also like…

  • Lokayan Ki Samajikta By Dhananjay Singh

    लोकायन में लोक साहित्य की लोकगाथा, लोकगीत, लोक कथा, लोक कहावतें, किस्से, लोकबुझौवल (पहेलियाँ), लोक बालगीत एवं लोक बालखेल, मिथक इत्यादि तो हैं ही। इसके साथ इसमें लोक की वो सब प्रथाएँ, अनुष्ठान एवं लोक सांस्कृतिक व्यवहार एवं परम्पराएँ शामिल हैं, जिनसे लोकायन बनता है। बहुधा वह अपनी जैविकता के साथ समग्रता में प्रस्तुत होता है। कई बार लोकायन वैज्ञानिक और ऐतिहासिक सत्यों पर आधारित न होकर सामूहिक आस्था और विश्वास की गतिकी में चलता है अर्थात् इसका एक भाग सामाजिक संरचना को आधार देता है, दूसरा भाग आस्थाओं और विश्वासों को। यह सामाजिक श्रुति के रूप में जीवित रहता है। इसमें भी दिक्, काल और कार्यकारण सम्बन्ध की अवधारणाएँ अन्तर्निहित होती हैं। इसमें तथ्यों और सूचनाओं का विशाल संग्रह होता है, जिसकी स्मृति एक के बाद अनेक पीढ़ियों और कई कालखण्डों तक जीवित रहती है। यह जातीय स्मृति ही परम्पराओं का मूल स्रोत है।

    -प्राक्कथन से

    Buy This Book with 1 Click Via RazorPay (15 + 5% discount Included)


    Kindle E-Book Also Available

    Available on Amazon Kindle
    276.00325.00
  • Andolanjivi By Vinod Agnihotri

    आंदोलंजीवी – विनोद अग्निहोत्री

    विनोद अग्निहोत्री जी को मैं पिछले चार दशकों से जानता हूँ। वे एक गम्भीर और संवेदनशील पत्रकार हैं। उन्होंने देश के सामाजिक बदलावों और जन-आन्दोलनों का सूक्ष्म अध्ययन किया है और उनके बारे में लगातार लिखा है। किसी भी लोकतन्त्र की सुदृढ़ता और गतिशीलता के लिए सामाजिक सरोकारों के मुद्दों पर आम जनता की भागीदारी तथा एकजुट होकर संवैधानिक तरीके से अपनी माँगें उठाते रहना जरूरी होता है। यह पुस्तक इन प्रक्रियाओं का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है जो सत्ता प्रतिष्ठानों के लिए आईना और युवा पीढ़ी में अन्याय के खिलाफ चुप्पी तोड़कर सत्य और न्याय के लिए अहिंसात्मक तरीके अपनाने की प्रेरणा देगा।

    – कैलाश सत्यार्थी नोबेल पुरस्कार विजेता
    Kindle E-Book Also Available

    Available on Amazon Kindle

    Buy This Book Instantly thru RazorPay (20% + 5% extra discount)

    Or use Add to cart button to use our shopping cart

    424.00499.00
  • Ambedkar Dalit Aur Stri Prashan By Ram Puniyani And Ravikant

    आंबेडकर दलित और स्त्री प्रश्न – राम पुनियानी और रविकांत

    साम्प्रदायिकता वह राजनीति है जो धर्म के नाम पर चलायी जाती है। दूसरे शब्दों में, साम्प्रदायिकता, धार्मिक पहचान के आधार पर राजनीतिक समर्थन जुटाती है। यद्यपि ऊपर से देखने से ऐसा लगता है कि यह धर्म आधारित राष्ट्रवादी संघर्ष है तथापि यथार्थ में साम्प्रदायिकता वह राजनीति है जो प्रजातन्त्र का गला घोंटती है, जन्म आधारित जाति व्यवस्था और लिंग भेद को समाज पर लादती है और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में रोड़े अटकाती है। यह वह राजनीति है, जो स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व के मूल्यों को नकारती है। वो बात तो सामाजिक सद्भाव की करती है परन्तु अल्पसंख्यकों पर खुलकर निशाना साधती है।

    361.00425.00
  • Jansankhya Ka Mithak By S.Y. Quraishi (Hardcover)

    Jansankhya Ka Mithak By S.Y. Quraishi (Hardcover)

    प्रस्तुत पुस्तक एस.वाई. कुरैशी की चर्चित किताब `The Population Myth` का हिंदी अनुवाद है। जनसंख्या राजनीति के अधिकारी विद्वान एस.वाई. कुरैशी की किताब `जनसंख्या का मिथक` जनसंख्या के आँकड़ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की दक्षिणपन्थी चालबाजी का पर्दा फाश करती है; इस कुचक्र के चलते ही बहुसंख्यकों में जनसांख्यिकी संरचना और

    740.00925.00