HINDI KAVITA AUR NAKSALWAAD By Poonam Singh

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नक्सलबाड़ी आन्दोलन ने भारतीय राजनीति में जितनी उद्दाम लहर पैदा की, उससे कहीं अधिक कला, साहित्य, संस्कृति को इसने प्रभावित किया। यह एक नया मुक्ति-संग्राम था जो स्वाधीन भारत के ठीक बीस वर्ष बाद एक छोटे से स्थान से निकलकर देश के विविध हिस्सों में जा गूँजा और फैला। नक्सलबाड़ी आन्दोलन ने एक नये देश का स्वप्न देखा, उसके लिए संघर्ष किया। संस्कृति की परिभाषा बदली। साहित्य ने अपनी दिशा बदली और कविता में क्रान्ति के स्वर गूँजने लगे । इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक के आरम्भ में भी अब तक अस्मिता विमर्श जारी है। विश्वविद्यालयों में स्त्री-अध्ययन के विभाग खोले जा रहे हैं। स्त्री-विमर्श के इस दौर में एक लेखिका का हिन्दी कविता और नक्सलवाद का अध्ययन-चिन्तन, विवेचन- विश्लेषण अधिक सार्थक और मूल्यवान है क्योंकि अब वर्गीय दृष्टि के तहत सोचने- विचारने वाले बहुत कम हैं। पूनम सिंह का यह अध्ययन-चिन्तन एक प्रकाश-रश्मि की तरह भी है। कविता के जरिये इस आन्दोलन को देखने-समझने की आज अधिक जरूरत इसलिए भी है कि छिटपुट ही सही देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक-नागरिक आन्दोलन जारी और जीवित हैं, जहाँ हम आन्दोलनधर्मी कविताओं को लहराते और गूँजते हुए देखते हैं।


 

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Description

 

About the Author:

पूनम सिंह जन्म : 24 सितम्बर, बिहार प्रान्त के पूर्णिया जिले के एक गाँव जलालगढ़ में शिक्षा : : एम.ए., पी-एच.डी. प्रकाशित पुस्तकें : (कविता-संग्रह) ऋतुवृक्ष, लेकिन असम्भव नहीं, रेजाणी पानी; (कहानी-संग्रह) कोई तीसरा, कस्तूरीगन्ध तथा अन्य कहानियाँ, सुलगती ईंटों का धुआँ; (आलोचना) धर्मवीर भारती की काव्य-चेतना, रचना की मनोभूमि, पाठ का पाथेय; (संकलन सम्पादन) पुश्तैनी गन्ध (कविता- संकलन), जन मन के कवि केदार (जन्मशती पर प्रकाशित पुस्तिका); प्रतिरोध के स्वर (काव्य-पुस्तिका); (सम्पादन सहयोग) आवर्त्त, नयी आकृति, इजोरिया, रोशनाई अन्यान्य : दूरदर्शन, आकाशवाणी एवं साहित्य अकादेमी के कार्यक्रमों में भागीदारी। नवें विश्व हिन्दी सम्मेलन 2012, जोहांसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में राज्य प्रतिनिधि के रूप में भागीदारी।

Additional information

ISBN

9789380441832

Author

Poonam Singh

Binding

Paperback

Pages

320

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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