Inshallah By Abhiram Bhadkamkar

361.00425.00

मुस्लिम समाज की तरफ देखने के आज तक के सारे एक तरफा और दुराग्रही दृष्टिकोण को नकारते हुए, स्पष्ट भाषा में, बेबाक वास्तव का चित्रण कराने वाले इस उपन्यास ने विचार के स्तर पर एक नये मन्थन का आरम्भ किया है।

यह उपन्यास मुस्लिम समाज की आज की स्थिति और बहुसंख्यकों के साथ के उनके जटिल रिश्तों का भी विमर्श प्रस्तुत करता है।

मुस्लिम समाज में व्याप्त धार्मिक संकीर्णता, रूढ़िवादिता, परम्परा और उनकी कर्मठता पर भाष्य करते हुए इस समाज को वोट बैंक बनाकर रखने और इस्तेमाल करने की राजनीतिक मानसिकता को भी आड़े हाथ लेता है।

In stock