Kitni Kam Jagahein Hain (Poems) By Seema Singh

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साथ रहकर विलग रहने का अर्थ
फूल बेहतर जानते हैं मनुष्यों से

कोमलता झुक जाती है स्वभावतः
भीतर की तरलता दिखाई नहीं देती
निर्बाध बहती है छुपी हुई नदी की तरह
स्पर्श की भाषा में फूल झर जाते हैं छूने से
सच तो यह है कि वे सह नहीं पाते
और गिर जाते हैं एक दिन
हमें फूलों से सीखनी चाहिए विदा !
– इसी पुस्तक से
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Kitni Kam Jagahein Hain (Poems) By Seema Singh
कितनी कम जगहें हैं – सीमा सिंह

 

SKU: Kitni Kam Jagahein Hain-Paperback
Category:
Author

Seema Singh

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-680-5

Pages

128

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Customer Reviews

1-5 of 2 reviews

  • Mukesh Singh

    Ah, I see! It’s great to acknowledge the author of the poem book. Authors pour their hearts and souls into their work, and it’s always meaningful.

    April 3, 2024
  • 1106 Konark Riva Archana

    बहुत अच्छी और मन को छूँ देने वाली कविताएँ । 😊

    April 9, 2024

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