Salibein Mere Dariche Mein By Shakeel Siddiqui

425.00500.00

तुमने अपने घर की तन्हाई का जिक्र किया है। मैं जानता हूँ कि यह तन्हाई कितनी कड़ी और जुदाई के यह लम्हे कितने गरौं हैं। इनको दिल से धोया नहीं जा सकता लेकिन इनका बोझ इस तसव्वुर से कम ज़रूर किया जा सकता है कि बीते हुए दिन कितने अच्छे थे और आने वाले दिन कितने बेहतर होंगे। मैं तो यही करता हूँ, जब से जेलखाने का दरवाजा बन्द हुआ है मैं कभी माज़ी (अतीत) के पैरहन को तार- तार करके उसे मुख्तलिफ़ सूरतों में दुबारा बुनता रहता हूँ। और कभी आने वाले दिनों को दामे तसव्वुर में कैद करके उनसे अपनी मर्जी और पसन्द के मुख्तलिफ़ एलबम तरतीब देता रहता हूँ। जानता हूँ कि यह बेकार सा शगल है इसलिए कि ख़्वाबों को हक़ीक़त की जंजीरों से आज़ाद नहीं किया जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि थोड़ी देर के लिए आदमी तख्य्युल (कल्पना) के बल पर गिर्दो-पेश की दलदल से पाँव छुड़ा सकता है। फ़रारियत (पलायन) बुरी बात है लेकिन जब हाथ-पाँव जकड़े हुए हों तो आज़ादी की वाहिद सूरत यही रह जाती है। इसी नुस्खे के तुफैल मुझे जेल की सलाखें बहुत ही हक़ीर और बेहक़ीक़त दिखाई देने लगी हैं और बेशतर औक़ात उनकी तरफ़ ध्यान ही नहीं जाता।

– इसी पुस्तक से

 

In stock

You may also like…

  • RACHANA PRAKRIYA KE PADAV (Thought on Theatre Work) by Devendra Raj Ankur

    रचना प्रक्रिया के पड़ाव – देवेन्द्र राज अंकुर

    Rachna Prakriya Ke Padav (Thought on Theatre Work) By Devendra Raj Ankur

    ‘रचना प्रक्रिया के पड़ाव’ प्रसिद्ध रंगकर्मी और विद्वान् श्री देवेन्द्र राज अंकुर की नव्यतम पुस्तक है। रंगमंच को मुख्यतः और प्राथमिक रूप से नाटकों के मंचन से सन्दर्भित माना गया है। नाटकों और एकांकियों की सफलता का एक आधार उनके मंचन की अनुकूलता भी है। इसके अतिरिक्त महाकाव्यों के मंचन की भी सुदीर्घ और समृद्ध परम्परा भारत में रही है। परन्तु प्रस्तुत पुस्तक का सन्दर्भ कहानी के रंगमंच से है। ‘कहानी का रंगमंच’ नामक पुस्तक इस सन्दर्भ की पहली व्यवस्थित पुस्तक थी जिसका सम्पादन महेश आनन्द ने किया था। इसके बावजूद यह पुस्तक उस पुस्तक से कई मायनों में विशिष्ट है। पहली तो यह एक लेखक द्वारा रचित है। दूसरे इसको पहली पुस्तक से लगभग 50 वर्ष बाद लिखा गया है। तो इस लम्बी समयावधि में रंगमंच, ज्ञान-सरणी और कहानी विधा में जो विस्तार हुआ, उसे पुस्तक समेटती है।

    प्रस्तुत पुस्तक को छह हिस्सों में बाँटा गया है- प्रस्तुति, विचार, प्रक्रिया, संवाद, दृश्यालेख और कथासूची। यह बँटवारा अध्ययन की सुविधा के लिए तो है ही, साथ ही यह रचनाकार की उस दृष्टि का महत्तम समापवर्तक भी है जिससे वह चीजों को देखता- जाँचता है।
    इस पुस्तक से रंगमंच के दर्शन का ज्ञान तो होगा ही साथ ही ‘छात्रों, शोधार्थियों और रंगकर्मियों के लिए एक ही दिशा में किये गये काम कहानी का रंगमंच से सम्बद्ध लगभग सारी जानकारियाँ’ भी मुहैया हो सकेंगी। ऐसा हमें विश्वास है।
    Buy with 1 Click Using this Razorpay Gateway Button

     

    424.00499.00
  • Khoye Hue Logon Ka Shahar By Ashok Bhaumik

    ‘खोये हुए लोगों का शहर’ विख्यात चित्रकार और लेखक अशोक भौमिक की नयी किताब है। गंगा और यमुना के संगम वाले शहर यानी इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की पहचान दशकों से बुद्धिजीवियों और लेखकों के शहर की रही है। इस पुस्तक के लेखक ने यहाँ बरसों उस दौर में बिताये जिसे सांस्कृतिक दृष्टि से वहाँ का समृद्ध दौर कहा जा सकता है। यह किताब उन्हीं दिनों का एक स्मृति आख्यान है। स्वाभाविक ही इन संस्मरणों में इलाहाबाद में रचे-बसे और इलाहाबाद से उभरे कई जाने-माने रचनाकारों और कलाकारों को लेकर उस समय की यादें समायी हुई हैं, पर अपने स्वभाव या चरित्र के किसी या कई उजले पहलुओं के कारण कुछ अज्ञात या अल्पज्ञात व्यक्ति भी उतने ही लगाव से चित्रित हुए हैं। इस तरह पुस्तक से वह इलाहाबाद सामने आता है जो बरसों पहले छूट जाने के बाद भी लेखक के मन में बसा रहा है। कह सकते हैं कि जिस तरह हम एक शहर या गाँव में रहते हैं उसी तरह वह शहर या गाँव भी हमारे भीतर रहता है। और अगर वह शहर इलाहाबाद जैसा हो, जो बौद्धिक दृष्टि से काफी उर्वर तथा शिक्षा, साहित्य, संस्कृति में बेमिसाल उपलब्धियाँ अर्जित करने वाला रहा है, तो उसकी छाप स्मृति-पटल से कैसे मिट सकती है? लेकिन इन संस्मरणों की खूबी सिर्फ यह नहीं है कि भुलाए न बने, बल्कि इन्हें आख्यान की तरह रचे जाने में भी है। अशोक भौमिक के इन संस्मरणों को पढ़ना एक विरल आस्वाद है।

    Buy This Book Instantly thru RazorPay

    (15% + 5% Extra Discount Included)

    Kindle E-Book Also Available
    Available on Amazon Kindle

    191.00225.00
  • Jinna : Unki Safaltayein, Vifaltayein Aur Itihas Me Unki Bhoomika by Ishtiaq Ahmed

    (20%+5% की विशेष छूट )
    अपनी प्रति सुरक्षित करते समय कूपन कोड ‘JINNA’ इस्तेमाल करें और 5% की अतिरिक्त छूट का लाभ उठायें |

    मुहम्मद अली जिन्ना भारत विभाजन के सन्दर्भ में अपनी भूमिका के लिए निन्दित और प्रशंसित दोनों हैं। साथ ही उनकी मृत्यु के उपरान्त उनके इर्द- गिर्द विभाजन से जुड़ी अफवाहें खूब फैलीं।

    इश्तियाक अहमद ने कायद-ए-आजम की सफलता और विफलता की गहरी अन्तर्दृष्टि से पड़ताल की है। इस पुस्तक में उन्होंने जिन्ना की विरासत के अर्थ और महत्त्व को भी समझने की कोशिश की है। भारतीय राष्ट्रवादी से एक मुस्लिम विचारों के हिमायती बनने तथा मुस्लिम राष्ट्रवादी से अन्ततः राष्ट्राध्यक्ष बनने की जिन्ना की पूरी यात्रा को उन्होंने तत्कालीन साक्ष्यों और आर्काइवल सामग्री के आलोक में परखा है। कैसे हिन्दू मुस्लिम एकता का हिमायती दो-राष्ट्र की अवधारणा का नेता बना; क्या जिन्ना ने पाकिस्तान को मजहबी मुल्क बनाने की कल्पना की थी-इन सब प्रश्नों को यह पुस्तक गहराई से जाँचती है। आशा है इस पुस्तक का हिन्दी पाठक स्वागत करेंगे।
    JINNAH: His Successes, Failures and Role in History का हिन्दी अनुवाद
    Buy This Book Instantly thru RazorPay
    (20% + 5% Extra Discount Included)

    Or use Add to cart button Below, to use our shopping cart

    567.00700.00
  • Digambar Vidrohini Akk Mahadevi By Subhash Rai

    यह एक अनूठी पुस्तक है : इसमें गम्भीर तथ्यपरक तर्कसम्मत शोध और आलोचना, सर्जनात्मक कल्पनाशीलता से किये गये सौ अनुवाद और कुछ छाया-कविताएँ एकत्र हैं। इस सबको विन्यस्त करने में सुभाष राय ने परिश्रम और अध्यवसाय, जतन और समझ, संवेदना और सम्भावना से एक महान् कवि को हिन्दी में अवतरित किया है। वह ज्योतिवसना थी, इसीलिए उसे ‘दिगम्बर’ होने का अधिकार था : अपने तेजस्वी वैभव के साथ ऐसी अक्क महादेवी का हिन्दी में हम इस पुस्तक के माध्यम से ऊर्जस्वित अवतरण का स्वागत करते हैं। रजा पुस्तक माला इस पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्न है।

    -अशोक वाजपेयी
    Buy This Book Instantly thru RazorPay (15% + 5% extra discount)

     

    382.00449.00
  • Buy Aks by Akhilesh

    Aks by Akhilesh

    339.00399.00

    Aks by Akhilesh

    अक्स के संस्मरणों के चरित्र, अखिलेश की जीवनकथा में घुल-मिलकर उजागर होते हैं। अखिलेश का कथाकार इन स्मृति लेखों में मेरे विचार से नयी ऊँचाई पाता है। उनके गद्य में, उनके इन संस्मरणात्मक लेखन के वाक्य में अवधी की रचनात्मकता का जादू भरा है। -विश्वनाथ त्रिपाठी


    Buy This Book Instantly Using Razorpay Button


    Kindle E-Book Also Available
    Available on Amazon Kindle

     

    339.00399.00