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  • Premchand By Rambaksh Jaat

    Premchand By Rambaksh Jaat
    प्रेमचन्द – रामबक्ष जाट

    प्रेमचन्द को पढ़ना गुलाम भारत के मानस को पढ़ना है, उसकी कशमकश को, ‘स्वराज्य’ सम्बन्धी उसकी चिन्ताओं और दुश्चिन्ताओं को, किसान और किसानियत तथा उससे जुड़ी तमाम परेशानियों को चीन्हना है।

    360.00400.00
  • Ameer Khusro – Rajendra Toki

    Ameer Khusro – Rajendra Toki
    अमीर ख़ुसरो – राजेन्द्र टोकी

    360.00400.00
  • Ramvilas Sharma By Ajay Verma

    Ramvilas Sharma By Ajay Verma
    रामविलास शर्मा – अजय वर्मा

    रामविलास शर्मा (1912-2000) हिन्दी आलोचना, विशेषतौर से मार्क्सवादी हिन्दी आलोचना के प्रमुख स्तम्भों में एक हैं। उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता असंदिग्ध रही है। एक आलोचक और सिद्धान्तकार के रूप में उनका साहित्य विपुल है। सौ से अधिक पुस्तकों का लेखन-सम्पादन करने वाले रामविलास शर्मा की आलोचना के दो पक्ष स्वीकार किये गये हैं-खण्डन पक्ष और स्थापित करने वाला पक्ष।

    360.00400.00
  • Ramdhari Singh ‘Dinkar’ By Anil Ray

    Ramdhari Singh ‘Dinkar’ By Anil Ray
    रामधारी सिंह ‘दिनकर’ – अनिल राय

    360.00400.00
  • Dehri Par Deepak By Madhav Hada

    Dehri Par Deepak By Madhav Hada
    देहरी पर दीपक – माधव हाड़ा

    देहरी पर दीपक का यथार्थ वह ग्रामीण भारतीय जनमानस जानता है, जो आज के उत्तर आधुनिक, उग्र उपभोक्तावादी दौर से पहले का है। देहरी के दीपक में आश्वस्ति होती है, घुप्प अन्धकार के बीच हमारी भवता के सहकार की !

    450.00500.00
  • Mahamari Aur Kavita By Shriprakash Shukla

    Mahamari Aur Kavita By Shriprakash Shukla
    महामारी और कविता – श्रीप्रकाश शुक्ल

    539.00599.00
  • Vaikalpik Vinyas By Amitesh Kumar

    Vaikalpik Vinyas By Amitesh Kumar

    740.00925.00
  • Seedhiyon Se Utarte Hue – Ashok Vajpeyi

    Seedhiyon Se Utarte Hue – Ashok Vajpeyi
    सीढ़ियों से उतरते हुए – अशोक वाजपेयी

    719.00899.00
  • Kavita Ke Aangan Mein By Ashok Vajpeyi

    Kavita Ke Aangan Mein By Ashok Vajpeyi
    ‘कविता के आँगन में’ – अशोक वाजपेयी

    ‘कविता के आँगन में’ एक सजग बौद्धिक और संवेदनशील सामाजिक का संवाद है। अशोक वाजपेयी की आलोचना की यह आठवीं पुस्तक है और इस अर्थ में विशिष्ट हो सकती है कि वह ‘इस समय और समाज में कविता की जगह खोजने-बनाने, उसे भरसक बढ़ाने की’ कोशिश का परिणाम है।

    420.00525.00
  • Samay se bahar By Ashok Vajpeyi

    Samay se bahar By Ashok Vajpeyi
    समय से बाहर – अशोक वाजपेयी

    198.00220.00
  • Upanyas Aur Des By Virendra Yadav

    Upanyas Aur Des By Virendra Yadav

    ‘उपन्यास और देस’ वीरेंद्र यादव

    639.00799.00
  • Marx Ke Pret – Jacques Derrida

    Marx Ke Pret – Jacques Derrida

    प्रस्तुत पुस्तक विश्वप्रसिद्ध फ्रेंच दार्शनिक ज़ाक देरिदा की चर्चित पुस्तक `स्पेक्टर्स ऑफ़ मार्क्स` का अनुवाद है। अनुवाद साहित्य और संस्कृति के गंभीर अध्येता प्रो. रामकीर्ति शुक्ल ने किया है, साथ ही उन्होंने एक विस्तृत भूमिका भी लिखी है, जो देरिदा की उपर्युक्त कृति को समझने में सहायक होगी।

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    300.00375.00