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  • Muktibodh Ki Lalten – Apoorvanand

    Muktibodh Ki Lalten – Apoorvanand
    ‘मुक्तिबोध की लालटेन’

    मुक्तिबोध कुछ दशकों से हिंदी के सर्वाधिक चर्चित रचनाकार रहे हैं। उनपर काफी कुछ लिखा गया है। लेकिन मुक्तिबोध की लालटेन कई मायनों में उस काफी कुछ से अलग है, इसमें आलोचनात्मक और अकादमिक दर्रे पर होने की कतई परवाह नहीं की गई है।

    356.00395.00
  • Periyar E.V. Ramasami : Bharat Ke Voltaire By Omprakash Kashyap Paperback

    Periyar E.V. Ramasami : Bharat Ke Voltaire By Omprakash Kashyap (Paperback)
    पेरियार ब्राह्मणवाद के खिलाफ शूद्रजागरण के साथ-साथ द्रविड़ अस्मिता की प्रतिष्ठा के लिए भी जाने जाते हैं। पेरियार मानते थे कि जातिप्रथा और ब्राह्मण-वर्चस्व ने जो व्यवस्था कायम की

    585.00650.00
  • Periyar E.V. Ramasami : Bharat Ke Voltaire By Omprakash Kashyap

    Periyar E.V. Ramasami : Bharat Ke Voltaire By Omprakash Kashyap
    पेरियार ब्राह्मणवाद के खिलाफ शूद्रजागरण के साथ-साथ द्रविड़ अस्मिता की प्रतिष्ठा के लिए भी जाने जाते हैं। पेरियार मानते थे कि जातिप्रथा और ब्राह्मण-वर्चस्व ने जो व्यवस्था कायम की

    1,100.001,375.00
  • Vivad Nahin Hastkshep – Virendra Yadav

    Vivad Nahin Hastkshep – Virendra Yadav
    विवाद नहीं हस्तक्षेप – वीरेंद्र यादव

    विवाद नहीं हस्तक्षेप खासी विचारोत्तेजक पुस्तक है; और हो भी क्यों न, इसके कई सारे लेख बहस में दखल देते हुए, किसी धारणा को चुनौती देते हुए, किसी मत का प्रतिवाद करते हुए लिखे गए हैं। वीरेंद्र यादव इस किताब में साहित्य-समीक्षक के साथ ही बुद्धिजीवी या चिंतक की भूमिका में नजर आते हैं।

    468.00550.00
  • Poornta Ki Saadhna By M. Hiriyanna

    भारतीय दर्शन के मूर्धन्य विचारक के रूप में एम. हिरियन्ना एक जरूरी नाम हैं और ‘The quest after perfection’ उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक। इस जरूरी पुस्तक को हिन्दी के पाठकों को उपलब्ध करवाने के ध्येय से वरिष्ठ कवि-चिन्तक नन्दकिशोर आचार्य ने इसे अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनूदित किया है।

    270.00300.00
  • Satta Aur Vyakti By Bertrand Russell Translation Nandkishore Acharya

    इन्हें इन नामों से भी जाना जाता है: बर्ट्रेंड आर्थर विलियम रसेल, किंग्स्टन रसेल के तीसरे अर्ल रसेल, एम्बरले के विस्काउंट एम्बरले और अर्दसल्ला के (जन्म 18 मई, 1872, ट्रेलेक, मॉनमाउथशायर , वेल्स – 2 फरवरी, 1970 को मृत्यु हो गई)

    260.00325.00
  • Rujuwaat By Dr. Ashok Kelkar Trans. By Gorakh Thorat (Paperback)

    हिन्दी आलोचना में ऐसा बहुत कम है जो साहित्य के अलावा अन्य कलाओं और उनमें चरितार्थ सौन्दर्य-बोध और दृष्टि को हिसाब में लेता हो । भाषा, वाणी, साहित्य के सम्बन्ध और संवाद पर भी विचार कम हुआ है।

    676.00795.00
  • Rujuwaat by Dr. Ashok Kelkar Trans. By Gorakh Thorat

    हिन्दी आलोचना में ऐसा बहुत कम है जो साहित्य के अलावा अन्य कलाओं और उनमें चरितार्थ सौन्दर्य-बोध और दृष्टि को हिसाब में लेता हो । भाषा, वाणी, साहित्य के सम्बन्ध और संवाद पर भी विचार कम हुआ है।

    1,480.001,850.00
  • MEERAN By MADHAV HADA (Hardcover)

    सन्त रैदास इनके गुरु माने जाते हैं। मीरां के पद शताब्दियों से पाठकों और श्रोताओं के आकर्षण का विषय बने हुए हैं। यह पुस्तक उनके जीवन और साहित्य के सभी पक्षों को उद्घाटित करने का प्रयास करती है। यह पाठकों के लिए लाभप्रद होगी-ऐसा हमें विश्वास है।


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    400.00500.00
  • Swayam Prakash By Renu Vyas

    स्वयं प्रकाश के लेखन के पीछे यही प्रेरणा रही है-जो है, उससे बेहतर चाहिए – इंसान, समाज, देश, दुनिया। एक साक्षात्कार में वे कहते हैं-हम एक अधिक सुन्दर, कम क्रूर, अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समतापूर्ण समाज बनाने का सपना देखते हैं!

    460.00575.00
  • Rajkamal Choudhary Ki Rachna-drishti

    RAJKAMAL CHOUDHARY KI RACHNA-DRISHTI by DEO SHANKAR NAVIN

    राजकमल चौधरी एक परम्परागत रूढिप्रिय परिवार में पैदा हुए थे। किशोरावस्था से ही वे रूढ़ संस्कारों के विरोधी रहे। राजकमल के साहित्यिक व्यक्तित्व का गठन परिवार और समाज की रूढ़ियों से संघर्ष करते हुए ही हुआ था। उनके इसी संस्कार ने प्रखर युगबोध से अनुप्राणित होकर उन्हें परम्परा-भंजक बनाया ।

    446.00525.00