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  • Safar Me Itihas : Etihasik Yatra Akhyan By Neelima Pandey

    आमतौर पर यात्राएँ जान लेने की हुड़क में की जाती हैं। कहते हैं जान लेना मुक्त करता है। मुक्ति का तो नहीं पता पर यात्राएँ कैथार्सिस करती चलती हैं। इस वजह से बेहद मोहती हैं हमें। यात्राओं के दौरान अतीत और भविष्य अधिक मुखर हो उठते हैं, वर्तमान कुछ कट जाता है। महज़ जगहों से गुज़रना यात्रा को कमतर करता है। यात्रा माने इतिहास से एकरूप हो जाना। इतिहास के गर्व और शर्म को दोनों हाथों से थाम लेना । जहाँ काट-छाँट का इतिहास किंकर्तव्यविमूढ़ हो दूरी बना लेता है, वर्तमान रूठ जाता है और भविष्य अपने रास्ते से भटक जाता है। दरअसल, यात्राएँ जगहों से, लोगों से मिलने का सिर्फ एक बहाना हैं। असल मुलाक़ात तो हम अपने आप से करते चलते हैं। हर यात्रा के दौरान हम अपनी ही एक नयी पहचान से मुखातिब होते हैं। ये पहचान रूह की खरोंचों का मरहम है जिसे ख़ुद ही हासिल करना होता है।

    – भूमिका से

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    298.00350.00
  • Chhoti Aankho Ki Putliyon Mein – Devesh Path Sariya

    Chhoti Aankho Ki Putliyon Mein – Devesh Path Sariya
    छोटी आँखों की पुतलियों में – देवेश पथ सरिया

    यह पुस्तक ताइवान के शहर ‘शिन चू’ की सभ्यता, संस्कृति, उसकी ऐतिहासिक इमारतों के स्थापत्य और शिल्पकला; भौतिकवादी जीवन जिसमें बाजार की संरचना से लेकर नाइट क्लब व बार की गहमागहमी भी शामिल है, का खूबसूरत कोलाज है। देवेश पथ सारिया अपने इन संस्मरणों में बहुत छोटी-छोटी घटनाओं, चरित्रों को गहरे तक देखते हैं; फिर तन्मयता से रचते हैं। यही वजह है कि पुस्तक बहुत रोचक बन पड़ी है।

    269.00299.00
  • Des Des Pardes – Shriprakash Shukla

    Des Des Pardes – Shriprakash Shukla

    कवि-आलोचक श्रीप्रकाश शुक्ल के यात्रा-संस्मरणों की पुस्तक देस देस परदेस हमारे जीवन की एकरसता और एकतानता को तोड़ती है।

    340.00399.00
  • Hardevi Ki Yatra- Hardevi Edited By Garima Srivastva

    Hardevi Ki Yatra- Hardevi Edited By Garima Srivastva

    औपनिवेशिक भारत में विशेषकर उन्नीसवीं सदी के दौरान ब्रिटेन से भारत आने वाली स्त्रियों के बहुत से यात्रा-वृत्तान्त हमें मिलते हैं जिनमें तत्कालीन यूरोप और औपनिवेशिक भारत के चित्र, उनके स्वानुभूत अनुभव चित्रित हैं।

    276.00325.00
  • Antim Sangrila Ki Dharti Main – Raghubir Chand (Hardcover)

    Antim Sangrila Ki Dharti Main – Raghubir Chand – Hardcover

    अन्तिम संग्रीला की धरती में -रघुवीर चन्द

    भूटान देखने-समझने की लालसा हर किसी यात्री के मन में विद्यमान होगी। इसका मूल कारण सम्भवतया भूटान का वह विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश है जो भिन्न-भिन्न कालखण्डों के प्रभाव व स्पर्श से गुज़रते हुए भी अपने मूल स्वभाव के साथ अपनी एक भिन्न पहचान बनाये रखने में सफल रहा है।

    1,040.001,300.00
  • Ek Sadak Ek Jagah – Manglesh Dabral (Paperback)

    Ek Sadak Ek Jagah – Manglesh Dabral
    एक सड़क एक जगह – मंगलेश डबराल

    इंटरनेट और संचार क्रांति के व्यापक विस्तार ने जब साहित्य, संस्कृति और विभिन्न ज्ञानानुशासनों का संकुचन कर दिया है, जब हर शहर एक उँगली पर आभासी संसार में उपलब्ध है, तब यात्राओं की प्रासंगिकता का बदल जाना अवश्यंभावी है। ऐसे में यात्रा-वृत्तांतों का यात्रा संस्मरणों के रूप में कायांतरण भी स्वाभाविक है। यह पुस्तक यात्राओं की ऐसी ही स्मृति है। अनदेखी-अनजानी जगहों के जो विवरण हैं, वे कवि मंगलेश डबराल की आकांक्षाओं के संदर्भ हैं। इसीलिए इन संस्मरणों में यात्री मंगलेश डबराल का सहयात्री कवि मंगलेश डबराल है। इसे हम भाषा, तथ्य चयन, स्मृति संचयन सबमें देख सकते हैं। ये वृत्तांत उन खिड़कियों की तरह हैं जिनकी मार्फत हम ऐसे सफर पर निकलते हैं जहाँ हर कदम पर एक दुनिया उजागर होती है। यह जगहों और कविताओं के अभिन्न रूप से जुड़े हुए होने की दुनिया है। ये संस्मरण देश-विदेश की यात्राओं से उद्भूत हैं, जो ज्यादातर कविता पाठों के सिलसिले में हुई हैं। इन संस्मरणों में बहुत खास है मंगलेश डबराल की भाषा। वे जिस जगह की यात्रा करते हैं, उसके वृत्तांत को सिरे से गायब नहीं होने देते, पर वे वृत्तांत स्मृतियों के लिए खाद-पानी सरीखे होते हैं। ये स्मृतियाँ जब भाषा में उतरती हैं तो दुहरी चुनौती का सामना करती हैं। एक स्तर पर वे लेखक की काव्यात्मक क्षमता से ओतप्रोत हैं तो दूसरे स्तर पर कवितापन से बाहर आना विधा की सर्जनात्मक अनिवार्यता हैं। द्वित्वों के बीच संतुलित भाषा ने इन संस्मरणों की आंतरिक लय का निर्माण किया है, उसे गति दी है। यह गति ऐसी है कि हम नदी में नहा कर निकलते हैं तो उसके बहाव को शरीर पर थोड़ी देर बाहर आकर भी महसूस करते हैं।

    153.00180.00
  • Antim Sangrila Ki Dharti Main – Raghubir Chand

    Antim Sangrila Ki Dharti Main – Raghubir Chand

    अन्तिम संग्रीला की धरती में -रघुवीर चन्द

    473.00525.00
  • Ek Sadak Ek Jagah – Manglesh Dabral

    Ek Sadak Ek Jagah – Manglesh Dabral
    एक सड़क एक जगह – मंगलेश डबराल

    315.00370.00
  • Arunachal Yatra by Krishnath

    Arunachal Yatra by Krishnath
    अरुणाचल यात्रा (यात्रा-वृत्तान्त)

    140.00
  • speeti mein barish – Krishnath

    speeti mein barish – Krishnath
    स्पीति में बारिश – कृष्णनाथ

    144.00160.00
  • Ladakh mein rag viraag

    Ladakh mein rag viraag
    लदाख में राग – विराग – कृष्णनाथ

    144.00160.00