Showing 1–12 of 45 results

  • Fani Baaki -Shamsur Rahman Faruqi

    Fani Baaki – Shamsur Rahman Faruqi

    फ़ानी बाक़ी – शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी

    इस किताब का मुख्य आकर्षण फ़ारुक़ी साहब की लम्बी कहानी ‘फ़ानी बाक़ी’ है। यह कहानी खुद फ़ारुक़ी साहब की बाक़ी कहानियों से अलग है। वे मनुष्य के अन्तस की गहराई में काँपती मुक्ति की आकांक्षा की ओर अपनी दूसरी कहानियों में भी किसी न किसी तरह से इशारे करते ही थे, लेकिन ‘फ़ानी बाक़ी’ में वे इस आकांक्षा के ठीक सामने जा खड़े हुए हैं। इस एनकाउण्टर की रोशनी से फ़ारुक़ी साहब ने एक विलक्षण कल्पना लोक की रचना की है। यह कल्पना लोक वास्तविक न होते हुए भी अपने भीतर मनुष्य की मुक्ति की आकांक्षा के सच को अपने हर रेशे में थामे रखता है। यहीं से इस कहानी का सौन्दर्य और उसकी गहराई पैदा होती है।

    160.00
  • Band Kothari Ka Darwaja By Rashmi Sharma

    इस संग्रह की कहानियाँ भिन्न जीवन-स्थितियों एवं भिन्न मनःस्थितियों की कहानियाँ हैं। मध्य वर्ग, मजदूर वर्ग, निम्न वर्ग, समान्त वर्ग सब हैं इन कहानियों में। कहानीकार यथार्थ रचने की प्रक्रिया में भी हैं। बन्द कोठरियों के दरवाजे खुल रहे हैं।

    499.00
  • Ankaha Aakhyan By Jaya Jadwani (Hardcover)

    संग्रह की कहानियाँ मध्य वर्ग में स्त्री जीवन की नियति और त्रासदी को अपना विषय बनाती हैं। खासतौर से वैवाहिक जीवन के भीतर स्त्री जीवन को। वैसे तो पूरे समाज और सभ्यता में वैवाहिक जीवन में स्त्रियों का जीवन ज्यादा संघर्षपूर्ण, त्रासद और विडंबनात्मक होता है। परंतु मध्यवर्गीय स्त्रियाँ इस त्रासदी को ज्यादा भोगती हैं

    272.00340.00
  • Hindi Ki Prem Kahaniyan By Ed. Dr. Suchitra Kashyap (PaperBack)

    Hindi Ki Prem Kahaniyan By Ed. Dr. Suchitra Kashyap

    170.00
  • Hindi ki prem kavitayein By Ed. Dr. Suchitra Kashyap

    Hindi ki prem kavitayein By Ed. Dr. Suchitra Kashyap

    170.00
  • Ek Chhoti Si Khabar – Dileep Kaur Tiwana

    Ek Chhoti Si Khabar – Dileep Kaur Tiwana

    60.00
  • Vilopan by Shailendra Sagar (Hardcover)

    Vilopan by Shailendra Sagar – Hardcover

    विलोपन की कहानियाँ ऐसी दुनिया की नब्ज पर उँगली रखती हैं जिसमें सब कुछ जल्दी से जल्दी पा लेना है। करियर की भागदौड़, निर्मम प्रतिस्पर्धा, अनाम-शनाप खर्च और उपभोक्तावाद ने ऐसी दुनिया बनायी है जहाँ किसी के व्यक्तिगत सुख-दुख, राग-विराग और रिश्ते-नातों से कोई सरोकार नहीं।

    380.00475.00
  • Kal ki Baat : Rishabh By Prachand Praveer (Paperback)

    Kal ki Baat : Rishabh By Prachand Praveer (Paperback)

    लघुकथा संग्रह ‘कल की बात’ एक विशिष्ट विधा में है, जिसके हर अंक में ठीक पिछले दिन की घटनाओं का मनोरंजक वर्णन है। आपबीती शैली में लिखी गयी ये कहानियाँ कभी गल्प, कभी हास्य, कभी उदासी को छूती हुयी आज के दौर की साक्षी है। कहानीकार, उसके खुशमिजाज सहकर्मी, आस-पड़ोस में रहने वाले चुलबुले बच्चे, भारतीय समाज में रचे-बसे गीत और कविताएँ पारम्परिक मूल्यों के साथ विविधता में बने रहते हैं।

    224.00249.00
  • Kal ki Baat : Shadaj By Prachand Praveer (Paperback)

    Kal ki Baat : Shadaj By Prachand Praveer (Paperback)

    कल की बात – षड्ज – प्रचण्ड प्रवीर

    लघुकथा संग्रह ‘कल की बात’ एक विशिष्ट विधा में है, जिसके हर अंक में ठीक पिछले दिन की घटनाओं का मनोरंजक वर्णन है। आपबीती शैली में लिखी गयी ये कहानियाँ कभी गल्प, कभी हास्य, कभी उदासी को छूती हुई आज के दौर की साक्षी हैं। कहानीकार, उसके खुशमिजाज सहकर्मी, आसपड़ोस के चुलबुले बच्चे, यहाँ भारतीय समाज में रचे-बसे गीत और कविताएँ पारम्परिक मूल्यों के साथ विविधता में यहाँ बने रहते हैं।

    ‘षड्ज’ इस लघुकथा संकलन श्रृंखला की पहली कड़ी है।

    212.00249.00
  • Panchtantra : Punarpath By Madhukar Upadhyay (Paperback)

    Panchtantra : Punarpath By Madhukar Upadhyay (Paperback)

    पंचतन्त्र  -पंचतंत्र (पुनर्पाठ)- मधुकर उपाध्याय

    प्रस्तुत पुस्तक मधुकर उपाध्याय का पंचतन्त्र है, विष्णु शर्मा के पंचतन्त्र का अविकल अनुवाद नहीं। इसमें अपने समय, समाज के अनुरूप कथाओं का चयन है और चयनित कथाओं को प्रस्तुत किया गया है। यह इसी कारण आज के पाठकों और अध्येताओं के लिए अद्यतन और ज़रूरी टेक्स्ट बनता है। मधुकर उपाध्याय के चयन के आधार हैं-धन, प्रबन्ध, नीति, रणनीति। ये आधुनिक जीवन के अनिवार्य प्रसंग हैं।

     

    234.00275.00
  • Hinsa By Festis Iyayi (Paperback)

    Hinsa By Festis Iyayi

    ‘हिंसा’ –

    प्रस्तुत उपन्यास ‘हिंसा’ में इयायी ने नाइजीरियाई समाज की राजनीतिक और सामाजिक संरचना में व्याप्त हिंसा को उजागर किया है जो कहीं दृश्य तो कहीं अदृश्य रूप से समाज के उन तबकों को प्रभावित करती है जो आमतौर पर हाशिये पर हैं। वह तबका कितने स्तरों पर इसका प्रतिरोध करता है और सत्ताधारी वर्ग का एक हिस्सा कैसे उसकी प्रतिरोध क्षमता को नष्ट करने की साजिशों में लगा है, इसका सटीक चित्रण इस उपन्यास में मिलता है। इस उपन्यास का अनुवाद हिन्दी में आनन्द स्वरूप वर्मा द्वारा किया है।

    349.00
  • Ekchakranagri By Gyanendrapati (Paperback)

    Ekchakranagri By Gyanendrapati (Paperback)

    एकचक्रानगरी  – ज्ञानेन्द्रपति

    एकचक्रानगरी ! यह काव्याख्यान अपनी संरचना में ही नाटकीय है; इसे पढ़ते हुए भी आप इसे अपने मन की आँखों के आगे मंचित होता महसूस कर सकते हैं।
    ‘एकचक्रानगरी’ एक व्यायोग है और नहीं है। है, क्योंकि इसका आकार तनु है, कथा ख्यात है, अधिकतर पुरुष पात्र हैं, स्वल्प स्त्रीजन संयुत है, समरोदय स्त्री के निमित्त नहीं होता, दीप्त काव्य-रस पाठक को अभिसिंचित करता है। नहीं है, क्योंकि इसका इतिवृत्त एक दिन में सम्पन्न नहीं होता, इसलिए भी यह एकांकी नहीं। गोया, यह शुद्ध व्यायोग नहीं। आखिर तो अपन स्पेनिश भाषा के कवि पाब्लो नेरुदा के भी मुरीद ठहरे जो ‘अशुद्ध कविता’ के पैरोकार थे, सो अपन से किसी भी सर्वथा शुद्ध चीज़ की आशा दुराशा ही सिद्ध होनी है, आखिरकार!

    81.0095.00