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Vivad Nahin Hastkshep - Virendra Yadav |
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Description
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विवाद नहीं हस्तक्षेप – वीरेंद्र यादव विवाद नहीं हस्तक्षेप खासी विचारोत्तेजक पुस्तक है; और हो भी क्यों न, इसके कई सारे लेख बहस में दखल देते हुए, किसी धारणा को चुनौती देते हुए, किसी मत का प्रतिवाद करते हुए लिखे गए हैं। वीरेंद्र यादव इस किताब में साहित्य-समीक्षक के साथ ही बुद्धिजीवी या चिंतक की भूमिका में नजर आते हैं। यह एक जाने-माने आलोचक की किताब है लेकिन सिर्फ आलोचना की नहीं, क्योंकि यह साहित्य के आन्तरिक प्रश्नों के साथ-साथ साहित्येतर समझे जाने वाले कुछ सवालों से भी काफी वास्ता रखती है। इसलिए स्वाभाविक ही वीरेन्द्र यादव इस किताब में साहित्य-समीक्षक के साथ ही बुद्धिजीवी या चिंतक की भूमिका में भी नजर आते हैं। विवाद नहीं हस्तक्षेप खासी विचारोत्तेजक पुस्तक है; और हो भी क्यों न, इसके कई सारे लेख बहस में दखल देते हुए, किसी धारणा को चुनौती देते हुए, किसी मत का प्रतिवाद करते हुए लिखे गये हैं। |
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