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DINANK MEN BACHA RAH GAYA SAMAY By Dhruv Shukla

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दिनांक में बचा रह गया समय – ध्रुव शुक्ल


ध्रुव शुक्ल हमारे समय के प्रतिष्ठित कवियों में एक हैं। उनका यह सातवाँ संग्रह’ दिनांक में बचा रह गया समय’ कोरोना की वैश्विक आपदा-काल में लिखी गयीं कविताओं का संग्रह है, जिसे उन्होंने ‘कोरोनाकाल के दिवंगत जीवन की स्मृति’ को समर्पित किया है। संग्रह में सौ से अधिक कविताएँ हैं और अधिकतर कविताएँ इस आपदाकाल में मनुष्य के दुख और उसकी वेदना की अभिव्यक्तियाँ हैं, जो कवि की अन्तर्युकार की तरह लगती हैं, अपने स्वरूप में प्रार्थना की मानिन्द हैं। इन कविताओं में डरी-सहमी मनुष्यता को सम्बोधित करते हुए वे उन सभी कोनों-अँतरों की शिनाख्त करते हैं जहाँ घात लगाये लोग हमें मिटा देने की मुहिम में लगे हैं। यह संकलन भले ही कोरोनाकाल की उपज हो; लेकिन इसका आयतन व्यापक है और मनुष्यता पर आसन्न हर तरह के संकट की पहचान इसमें है। कवि का स्वर भीगा हुआ है, दुख दाह रहा है, सब तरफ उदासी का पसारा है, बोझिल मन चीत्कार कर रहा है, पर प्रेम है जो शक्ति बनकर आता है…
समकालीन कविता के एक महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में ध्रुव शुक्ल की पहचान है और उस पहचान के अनुरूप उनका यह संग्रह कविता में जीवन-विमर्श सम्भव करता है। अपने भाव, विन्यास, अनुभूति, वेदना और तिक्त करते अनुभवों में छीजते जाते समय को बाँधने का यह उपक्रम गहरे अर्थों में अपने को तोड़कर ही सम्भव हुआ है। ऐसी ही कविता सार्थक मानी जाती है जो कवि-अनुभव के अभ्यास से हमारे हृदय के बन्धन को खोल दे और हमें अपने को जानने-पाने का एक सम्यक मार्ग मिल सके। इस स्तर पर ध्रुव शुक्ल की कविता सही मायनों में जीती-जागती मृत्यु में रहकर जीने का उदाहरण बनने का कवि-आदर्श प्रस्तुत करती है।
– भूमिका से

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Description

ध्रुव शुक्ल हमारे समय के प्रतिष्ठित कवियों में एक हैं। उनका यह संग्रह दिनांक में बचा रह गया समय कोरोना की वैश्विक आपदा-काल में लिखी गयीं कविताओं का संग्रह है, जिसे उन्होंने कोरोनाकाल के दिवंगत जीवन की स्मृति को समर्पित किया है।

About the Author:

11 मार्च, 1953 को मध्य प्रदेश के सागर शहर में जन्मे ध्रुव शुक्ल विगत चालीस वर्षों से हिन्दी की साहित्यिक बिरादरी में शामिल हैं। उन्होंने महात्मा गांधी की पुस्तक हिन्द स्वराज्य को केन्द्र में रखकर पूज्य पिता के सहज सत्य पर नाम से एक चर्चित पुस्तक के अलावा मध्य प्रदेश के लोक आख्यान, भीलों के मदनोत्सव भगोरिया और आदिवासी संस्कृति पर मोनोग्राफ़ लेखन भी किया है। उनकी पुस्तकों में अब तक पाँच कविता- संग्रह, शाइरी की एक किताब, तीन उपन्यास, एक कहानी-संग्रह, एक आलोचना पुस्तक, कृति- केन्द्रित समीक्षा-पुस्तक, सामयिक विषयों पर तीन निबन्ध- संग्रह । सेतु प्रकाशन से ध्रुव शुक्ल की संचयिता यह दिन सब पर उगा है प्रकाशित मध्य प्रदेश कला परिषद् और बाद में भारत भवन भोपाल से प्रकाशित पत्रिका पूर्वग्रह में आठ वर्षों तक सह- सम्पादक और बाद में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सचिव और साक्षात्कार पत्रिका के सम्पादक रहे। मध्यप्रदेश शासन ने 2019 में ध्रुव शुक्ल को धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक पद पर मनोनीत किया। ध्रुव शुक्ल को भारत के राष्ट्रपति ने कथा अवॉर्ड से, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान ने गाँधी पीस अवॉर्ड फॉर लिटरेचर से, मध्य प्रदेश लेखक संघ ने अक्षर आदित्य सम्मान से, मध्य प्रदेश कला परिषद् ने कविता के लिए रजा पुरस्कार से, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति ने लोकसेवा सम्मान से सम्मानित किया है। उन्हें कृष्ण बलदेव वैद सम्मान भी प्रदान किया गया है। भारत सरकार के संस्कृति विभाग और रजा फाउण्डेशन दिल्ली ने उन्हें फैलोशिप के लिए चुना है।

Additional information

Author

Dhruv Shukla

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-95160-10-0 Âý

Pages

256

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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