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  • MAA, MAN AUR MATI By SATISH KUMARMAA, MAN AUR MATI By SATISH KUMAR

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹213.00.

    “माँ, मन और माटी” सतीश कुमार का कविता-संग्रह

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  • Madhav Hada Books ComboMadhav Hada Books Combo

    762.00

     

    Kavita Ka Pura Drishya               Rs.90/-
    Ek Bhav : Anek Naam                 Rs.575/-
    MEERAN                                      Rs.175/-
    Dehri Par Deepak                       Rs.249/-

     Rs.1089 Combo Price Rs.762/-

  • Phanishwar Nath ‘Renu’ Books – Combo

    225.00599.00


    फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ पर प्रकाशित हिन्दी पुस्तकें

    पुण्यतिथि पर 30 % की विशेष छूट (११ अप्रैल से १८ अप्रैल तक)

     

     

  • Tulsidas Ka Swapn Aur Lok By Jyotish Joshi (PB)Tulsidas Ka Swapn Aur Lok By Jyotish Joshi (PB)

    Original price was: ₹425.00.Current price is: ₹361.00.

    Tulsidas Ka Swapn Aur Lok – Jyotish Joshi
    तुलसीदास का स्वप्न और लोक – ज्योतिष जोशी

    हिन्दी के प्रतिष्ठित लेखक, आलोचक, समीक्षक ज्योतिष जोशी की आलोचनात्मक पुस्तक ‘तुलसीदास का स्वप्न और लोक’ शीर्षक से प्रकाशित हुई है. सतही तौर पर लग सकता है कि यह पुस्तक भी अन्य सामान्य आलोचनात्मक पुस्तकों की तरह तुलसीदास को संतशिरोमणि एवं भक्त कवि के रूप में अथवा धार्मिक रूढ़िग्रस्त प्रतिक्रियावादी वर्ण व्यवस्था के घोर समर्थक के रूप में चित्रित करने वाली होगी

  • Kitni Kam Jagahein Hain (Poems) By Seema SinghKitni Kam Jagahein Hain (Poems) By Seema Singh

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹212.00.

    साथ रहकर विलग रहने का अर्थ
    फूल बेहतर जानते हैं मनुष्यों से

    कोमलता झुक जाती है स्वभावतः
    भीतर की तरलता दिखाई नहीं देती
    निर्बाध बहती है छुपी हुई नदी की तरह
    स्पर्श की भाषा में फूल झर जाते हैं छूने से
    सच तो यह है कि वे सह नहीं पाते
    और गिर जाते हैं एक दिन
    हमें फूलों से सीखनी चाहिए विदा !
    – इसी पुस्तक से
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  • Muktibodh Ki Jeevani Combo Set – (2 Khand) – paperbackMuktibodh Ki Jeevani Combo Set – (2 Khand) – paperback

    638.00

    यह सम्भवतः हिन्दी में किसी लेखक की सबसे लम्बी जीवनी है। इसमें सन्देह नहीं कि इस वृत्तान्त से हिन्दी के एक शीर्षस्थानीय लेखक के सृजन और विचार के अनेक नये पक्ष सामने आएँगे और कविता तथा आलोचना की कई पेचीदगियाँ समझने में मदद मिलेगी।

    मुक्तिबोध के हमारे बीच भौतिक रूप से न रहने के छः दशक पूरे होने के वर्ष में इस लम्बी जीवनी को हम, इस आशा के साथ, प्रकाशित कर रहे हैं कि वह मुक्तिबोध को फिर एक जीवन्त उपस्थिति बना सकने में सफल होगी।
    – अशोक वाजपेयी

    (15%+5% की विशेष छूट )

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  • SADAK PAR MORCHA (Poems) Edited by Ramprakash Kushwaha, Rajendra RajanSADAK PAR MORCHA (Poems) Edited by Ramprakash Kushwaha, Rajendra Rajan

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹213.00.

    दिल्ली बार्डर पर चले किसान मोर्चे के दौरान एक अद्भुत बात हुई। अनगिनत शहरी हिन्दुस्तानियों को पहली बार एहसास हुआ कि ‘मेरे अन्दर एक गाँव है’। जो किसान नहीं थे उन्हें महसूस हुआ कि ‘आन्दोलन सिर्फ किसानों का नहीं है। किसान सिर्फ खेत में ही नहीं हैं।’ इसकी पहली सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पंजाब में हुई। लोकगीतों और गायकों के समर्थन के सहारे यह आन्दोलन खड़ा हुआ और दिल्ली के दरवाजे पहुँचने की ताक़त जुटा सका। आन्दोलन के दौरान लोकमानस से जुड़ी इस रस्सी ने किसान मोर्चे के टेण्ट को टिकाये रखा। इस अन्तरंग रिश्ते ने आन्दोलन को वह ताक़त दी जो हमारे समय के अन्य जन आन्दोलनों- मसलन नागरिकता क़ानून विरोधी आन्दोलन या फिर मज़दूर आन्दोलन- को हासिल नहीं हो पायी। इसी बल पर किसान आन्दोलन पुलिसिया दमन, सत्ता की तिकड़म, गोदी मीडिया के दुष्प्रचार और प्रकृति की मार का मुक़ाबला कर सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर पाया।

    सड़क पर मोर्चा इस अनूठे रिश्ते का एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। इसमें किसान आन्दोलन के दौरान उसके साथ खड़े हुए गीत हैं, मुक्त छन्द की कविताएँ हैं, तो दोहे और ग़ज़लें भी। यह कविताएँ हमारे दृष्टिपटल से विलुप्त होते किसान को हमारी आँख के सामने खड़ा करती हैं-‘ अनथक बेचैन हूँ। आपका और अपना चैन हूँ।
    अन्न के ढेर लगाता हुआ।’ हमारे मानस को झकझोरती हैं- ‘क्या तुम्हारे भीतर उतनी सी भी नमी नहीं बची है। जितनी बची रहती है ख़बर / इन दिनों अखबारों में।’ मीडिया की ठगनी भाषा पर कटाक्ष करती हैं- ‘ये किस तरह के किसान हैं। ये किसान हैं भी या नहीं ?’ कवि किसान को ललकारता है- ‘जो अपनी जमीन को नहीं बचा सकता/ उसे जमीन पर रहने का कोई हक़ नहीं।’ गणतन्त्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के बाद जब पूरा निजाम किसान आन्दोलन पर पिल पड़ता है, तब कविता किसान के साथ खड़ी होती है- ‘वे बैल थे पहले / अब ट्रैक्टर हैं। वे श्रोता थे पहले / अब फ़ैक्टर हैं/ सूरज दे रहा है सलामी।’ कविता याद दिलाती है कि- ‘जवान और किसान / दोनों की जगह अब बार्डर पर है’, कि हम एकदम क़रीब से इतिहास बनते हुए देख रहे हैं और कविता पूछती है- ‘किस ओर हो तुम ?’ राज का राज़ खोलती हुई कविता हमारा आह्वान करती है- ‘इस निजाम से लड़ना आसान नहीं/ पर इससे जरूरी कोई काम नहीं।’ निराशा के इस दौर में शब्द किसान के साथ खड़ा हमें आश्वस्त करता है- ‘अन्न की तरह पकेगी सद्बुद्धि।’
    – योगेन्द्र यादव
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  • Baraf Mahal Translated by Neelakshi Singh – hardcoverBaraf Mahal Translated by Neelakshi Singh – hardcover

    Original price was: ₹625.00.Current price is: ₹438.00.

    वह एक सम्मोहक महल था। उसमें प्रवेश करने का रास्ता जल्द खोज लेना था। वह भूलभुलैया, उत्कण्ठा जगाने वाले रास्तों और विशाल दरवाजों से भरा होने वाला था और उसे उसमें दाखिले का रास्ता खोजकर ही दम लेना था। यह कितनी अजीब बात थी कि उसके सामने आते ही उन्न बाकी का सबकुछ बिल्कुल ही बिसरा चुकी थी। उस महल के भीतर समा जाने की इच्छा के सिवा हर दूसरी चीज का अस्तित्व उसके लिए समाप्त हो चुका था। आह। पर क्या वह सब इतना आसान था ! कितनी तो जगहें थीं, जो दूर से अब खुलीं कि तब खुलीं दिखती थीं, पर जैसे ही उन्न वहाँ पहुँचती, वे धोखा देने पर उतर आतीं। पर वह भी कहाँ हार मानने वाली थी !

  • Atma Namaste : Uniting With The Deeper Self by Anwar HaidaryAtma Namaste : Uniting With The Deeper Self by Anwar Haidary

    Original price was: ₹400.00.Current price is: ₹340.00.

    Life can often be challenging, and at
    times, it can feel like we’re stuck in a
    never-ending cycle of struggle and pain.
    But there is hope. In this powerful book,
    you will discover the ancient wisdom of
    the Law of Karma and how it is applied
    to your life to bring peace and positivity.
    When I saw the title, “Atma Namaste,” I
    wondered what kind of information
    would be in this book. Usually, you think
    “Atma” is spirit, and I thought, “Is this
    book going to describe spirits and how
    to connect with them?” And lo and
    behold! I realized that the book speaks
    about me. The author has given me a
    different perspective about myself! I
    was impressed.
    Anwar has clarified and elaborated on
    our understanding of Karma. He has
    beautifully explained the concept of
    Karma and given the reader the
    direction in which one can put their
    efforts to improve their life’s conditions.
    The usual tendency is to shy away from
    spiritual talks assuming that it is not
    relevant to our life as we live it. But wait!
    First, read the book to its very end, and
    you will realize how easy it is to apply
    spiritual principles to our daily lives.

    Buy This Book with 1 Click Via RazorPay (15% + 5% discount Included)

  • Jinna : Unki Safaltayein, Vifaltayein Aur Itihas Me Unki Bhoomika – Ishtiaq Ahmed- HardcoverJinna : Unki Safaltayein, Vifaltayein Aur Itihas Me Unki Bhoomika – Ishtiaq Ahmed- Hardcover

    Original price was: ₹1,999.00.Current price is: ₹1,299.00.

    (20%+5% की विशेष छूट )
    अपनी प्रति सुरक्षित करते समय कूपन कोड ‘JINNA’ इस्तेमाल करें और 5% की अतिरिक्त छूट का लाभ उठायें |

    मुहम्मद अली जिन्ना भारत विभाजन के सन्दर्भ में अपनी भूमिका के लिए निन्दित और प्रशंसित दोनों हैं। साथ ही उनकी मृत्यु के उपरान्त उनके इर्द- गिर्द विभाजन से जुड़ी अफवाहें खूब फैलीं।

    इश्तियाक अहमद ने कायद-ए-आजम की सफलता और विफलता की गहरी अन्तर्दृष्टि से पड़ताल की है। इस पुस्तक में उन्होंने जिन्ना की विरासत के अर्थ और महत्त्व को भी समझने की कोशिश की है। भारतीय राष्ट्रवादी से एक मुस्लिम विचारों के हिमायती बनने तथा मुस्लिम राष्ट्रवादी से अन्ततः राष्ट्राध्यक्ष बनने की जिन्ना की पूरी यात्रा को उन्होंने तत्कालीन साक्ष्यों और आर्काइवल सामग्री के आलोक में परखा है। कैसे हिन्दू मुस्लिम एकता का हिमायती दो-राष्ट्र की अवधारणा का नेता बना; क्या जिन्ना ने पाकिस्तान को मजहबी मुल्क बनाने की कल्पना की थी-इन सब प्रश्नों को यह पुस्तक गहराई से जाँचती है। आशा है इस पुस्तक का हिन्दी पाठक स्वागत करेंगे।
    JINNAH: His Successes, Failures and Role in History का हिन्दी अनुवाद
  • Strigatha By Prem Ranjan AnimeshStrigatha By Prem Ranjan Animesh

    Original price was: ₹399.00.Current price is: ₹339.00.

    नींद में हैरान-परेशान करने वाले अजीबोगरीब सपने आए। उसने देखा कि वह एक ऊँची इमारत के ऊपर खड़ा है। नीचे सड़क पर भीड़ इकट्ठी है जिसमें लोग हाथ उठा-उठाकर उससे कुछ याचना कर रहे हैं। ऊपर से एक रस्सी की सीढ़ी झूल रही है जो आकाश में खिली एक पतंग से जुड़ी है। वह नीचे झाँकता है। उसे ऊँचाई से डर लग रहा है। ऊँचाई से डर जो दरअसल नीचे गिरने का डर है। किसी तरह छत की मुँडेर पकड़कर वह फिर नीचे देखता है और भीड़ में खड़े लोगों को पहचानने की कोशिश करता है। उसमें सारे चर्चित विख्यात नये-पुराने फिल्मकार खड़े हैं जो हाथ उठाकर और हाँक लगाकर उससे कोई आग्रह कर रहे हैं। वह ठीक से सुन नहीं पा रहा। पर उससे वे लोग क्या माँग सकते हैं ?

    – इसी पुस्तक से
    इस पुस्तक को आप १ क्लिक ऑर्डर बटन से भी ख़रीद सकते हैं
  • Hindi Kavita Ke Sarokaar By Devshankar NaveenHindi Kavita Ke Sarokaar By Devshankar Naveen

    Original price was: ₹599.00.Current price is: ₹509.00.

    अपने सामाजिक सरोकार और इतिहास-बोध के सहकार से ही कोई रचनाकार अपनी रचना-दृष्टि निर्धारित करता है। इतिहास-बोध और सामाजिक सरोकार से निरपेक्ष रचनाकारों की रचनाएँ हर हाल में चूका हुआ उद्यम होगा। ऐसी रचनाएँ शाश्वत तो क्या, तात्कालिक भी नहीं बन सकतीं। समकालीन यथार्थ का भाव-बोध वहन किये बिना किसी रचना के शाश्वत होने की कल्पना निरर्थक है।

    ‘हिन्दी कविता के सरोकार’ शीर्षक इस पुस्तक में यह चेष्टा सदैव जागृत रही है कि भावकों को हिन्दी कविता के समुज्ज्वल अतीत में झाँकने की दृष्टि मिले। तथ्यतः बीते इतिहास, बदलते भूगोल, प्रगतिकामी जनचेतना, अप्रत्याशित राजनीतिक वातावरण और लैंगिक संवेदनाओं की विवेकशील दृष्टि अपनाये बिना भारतीय साहित्य को समझना असम्भव है। इसलिए इन सभी बिन्दुओं पर सावधान आलोचना-दृष्टि रखते हुए, इस पुस्तक में कविता के सामाजिक सरोकार पर गम्भीरता से विचार किया गया है।
    – पुरश्चर्या से
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