-20.08%

Do Gaz Ki Duri By Mamta Kalia-Paperback

(1 customer review)

Original price was: ₹249.00.Current price is: ₹199.00.

दो गज़ की दूरी’ – ममता कालिया


वरिष्ठ कहानीकार ममता कालिया का नवीन कहानी-संग्रह है- ‘दो गज की दूरी’। कथाकार के रूप में ममता कालिया ने लम्बी यात्रा पूरी की है। यह संग्रह उनकी असमाप्त कथा-यात्रा का प्रमाण है। असमाप्त सिर्फ इस अर्थ में नहीं कि वे अभी कहानियाँ लिख रही हैं। कहानी लिखते चले जाना महत्त्वपूर्ण नहीं। इस संग्रह के सन्दर्भ में महत्त्वपूर्ण है रचनाकार-कलाकार के रूप में ममता जी की बौद्धिक सजगता और वर्तमान के साथ खुद को जोड़ पाने की उनकी दक्षता। दो गज की दूरी इन दो वर्षों का मुहावरा है और हकीकत भी। पर इसे रोग की तरह नहीं, ममता जी एक मनोभाव की तरह मानवीय सम्बन्धों के व्याकरण में पसार देती हैं। सम्बन्धों के दरमियान आए दो गज इंसानों के बीच न खत्म होने वाला फासला निर्मित करते हैं, तो मीलों का सफर सामाजिक संचार के पंख पर सवार होकर दो गज़ में पूरी कर लेता है।
इन कहानियों की विशेषता इनकी सहजता और सरलता है। ये अपनी संवेदनात्मक संरचना में से होते-होते दृश्यों, कथनों, अतिपरिचित मनोभावों के सहारे आगे बढ़ती हैं। ये कहानियाँ बड़ी दार्शनिकता को प्रस्तावित करने के स्थान पर व्यावहारिक दार्शनिकताओं से काम चलाती हैं। स्त्री मनोविज्ञान के व्यावहारिक पक्ष की गहरी समझ के कारण ममता कालिया ऐसा कर पाती हैं।
कहानी के रूप में ममता कालिया दृश्यों, कथनों, मनोभावों, दार्शनिकताओं के सहारे जो यात्रा रचती हैं, उसमें वे तलाशती मनुष्य को ही हैं। जीवन की दुर्व्याख्येय स्थितियों में फँसे पात्रों को सही या गलत, सच्चा या झूठा साबित करने की कोशिश नहीं की गयी है। नयी सहस्त्राब्दी का समय हो या सन् 50 का, 60 के बाद का साहचर्य हो या यौवन के पहले दौंगरे का प्रेम-मनुष्यता के जिस रचनात्मक अन्तः सूत्र में सब विन्यस्त होते हैं- उसी की तलाश कहानीकार का सम्भवतः प्राथमिक उद्देश्य है। इस तलाश का ही परिणाम है कि नयी स्थितियों में मोबाइल की भौतिकता से परे ममता जी उसकी अनिवार्यता देखती हैं। गोया इस उग्र पूँजीवादी, उत्तर आधुनिक और चरम भौतिक युग में मोबाइल खुद ही एक चरित्र हो गया है।
ममता कालिया व्यंग्य नहीं, विडम्बना के सहारे आज के जीवन की अर्थहीनता को तलाशती हैं। वह विडम्बनात्मक ही सही, पर नयी जीवन स्थितियों में नयी अर्थवत्ता भी प्रस्तुत करती हैं। मानो नयी स्थितियों में- रचनाकार ने- अर्थहीनता और अर्थवत्ता को सिक्के के दो पहलू की तरह रखा है।
कहानी-कला की संश्लिष्ट संरचना का निर्माण ममता जी इन कहानियों में करती हैं।
आशा है नयी जीवन स्थितियों, संश्लिष्ट संरचना और सहज भाषा के समन्वयन से निर्मित इन कहानियों का पाठक स्वागत करेंगे।
– अमिताभ राय

Kindle E-Book Also Available
Available on Amazon Kindle

In stock

Description

दो गज़ की दूरी’ वरिष्ठ कहानीकार ममता कालिया का नवीन कहानी-संग्रह है।इन कहानियों की विशेषता इनकी सहजता और सरलता है।


About Author

ममता कालिया

ममता कालिया एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता और पत्रकारिता अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में हस्तक्षेप रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200 से अधिक कहानियों की रचना की है। वर्तमान में वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका “हिन्दी” की संपादिका हैं। ममता कालिया का जन्म 02 नवम्बर 1940 को वृन्दावन में हुआ। उनकी शिक्षा दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर और इन्दौर शहरों में हुई। उनके पिता स्व विद्याभूषण अग्रवाल पहले अध्यापन में और बाद में आकाशवाणी में कार्यरत रहे। वे हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के विद्वान थे। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं : ‘बेघर’, ‘नरक-दर-नरक’, ‘दौड़’, ‘दुक्खम सुक्खम’, ‘सपनों की होम डिलिवरी’, ‘कल्‍चर-वल्चर’ (उपन्यास); ‘छुटकारा’, ‘उसका यौवन’, ‘मुखौटा’, ‘जाँच अभी जारी है’, ‘सीट नम्बर छह’, ‘निर्मोही’, ‘प्रतिदिन’, ‘थोड़ा-सा प्रगतिशील’, ‘एक अदद औरत’, ‘बोलनेवाली औरत’, ‘पच्‍चीस साल की लड़की’, ‘ख़ुशक़िस्‍मत’, दो खंडों में अब तक की सम्पूर्ण कहानियाँ ‘ममता कालिया की कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘A Tribute to Papa and other Poems’, ‘Poems ’78’, ‘खाँटी घरेलू औरत’, ‘कितने प्रश्न करूँ’, ‘पचास कविताएँ’ (कविता-संग्रह); ‘आप न बदलेंगे’ (एकांकी-संग्रह); ‘कल परसों के बरसों’, ‘सफ़र में हमसफ़र’, ‘कितने शहरों में कितनी बार’, ‘अन्‍दाज़-ए-बयाँ उर्फ़ रवि कथा’ (संस्‍मरण); ‘भविष्‍य का स्‍त्री-विमर्श’, ‘स्‍त्री-विमर्श का यथार्थ’, ‘स्‍त्री-विमर्श के तेवर’ (स्त्री-विमर्श); ‘महिला लेखन के सौ वर्ष’ (सम्‍पादन)। आप ‘व्यास सम्मान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘यशपाल स्मृति सम्मान’, ‘महादेवी स्मृति पुरस्कार’, ‘राममनोहर लोहिया सम्मान’, ‘कमलेश्वर स्मृति सम्मान’, ‘सावित्री बाई फुले स्मृति सम्मान’, ‘अमृत सम्मान’, ‘लमही सम्मान’, ‘सीता पुरस्कार’ ढींगरा फैमिली फ़ाउंडेशन, अमेरिका का ‘लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’, ‘ओ.पी. मालवीय स्मृति सम्मान’ से सम्मानित की जा चुकी हैं।

Additional information

ISBN

9789392228667

Author

Mamta Kalia

Binding

Paperback

Pages

168

Publication date

15-02-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

1 review for Do Gaz Ki Duri By Mamta Kalia-Paperback

  1. Ashish Bhutani

    कहानी ने उस मुश्किल समय का बहुत सूंदर चित्रण आँखों के आगे ला कर खड़ा कर दिया

Add a review

You may also like…

0
YOUR CART
  • No products in the cart.