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  • Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap -Paperback

    Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap – Paperback Edition
    लेकिन उदास है पृथ्वी-मदन कश्यप

    यह कविता संग्रह वैशाली की माटी की महक में तो सनी हुई है ही, कवि ने इसे अत्यन्त कलात्मक रूप भी प्रदान किया है। उसकी ‘गनीमत है’—जैसी कविताएँ इसका साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।

    नौवाँ दशक कविता की वापसी का दशक है। ऐसा कहना न केवल इस दृष्टि से सार्थक है कि इसमें कविता फिर साहित्य के केन्द्र में स्थापित हो गयी, बल्कि इस दृष्टि से भी कि इसमें गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता वाली कविता अपने निथरे रूप में सामने आयी और पूरे परिदृश्य पर छा गयी।

    112.00
  • Neem Roshni Main – Madan Kashyap

    Neem Roshni Main – Madan Kashyap
    नीम रोशनी में- मदन कश्यप

    मदन कश्यप की कविताओं का यह नया संग्रह ‘नीम रोशनी में’ की गयी एक सघन यात्रा की तरह है जो हमारे समाज के इतिहास, यथार्थ और नियति के सवालों से सामना करती चलती है। इस नीम रोशनी में’ हालाँकि सब कुछ दीखता है पर कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं दीखता और इसमें कविता भी नहीं लिखी जा सकती

    130.00
  • Door Tak Chuppi By Madan Kashyap

    Door Tak Chuppi By Madan Kashyap
    दूर तक चुप्पी – मदन कश्यप

    मदन कश्यप के इस नये संग्रह की कविताओं की एक खास बात यह है कि सभी कविताएँ छोटी हैं और विषम पंक्तियों की हैं।

    110.00
  • Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap Paperback

    Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap – Paperback Edition
    पनसोखा है इन्द्रधनुष – मदन कश्यप

    सन् 1972-73 के आस-पास से अपनी काव्य-यात्रा शुरू करने वाले कवि मदन कश्यप का छठा संग्रह है-‘पनसोखा है इन्द्रधनुष’। लगभग आधी शताब्दी की यह काव्य-यात्रा कई मायनों में विशिष्ट रही है, चुनौतीपूर्ण भी। मदन कश्यप के काव्य-व्यक्तित्व के वैशिष्ट्य को यह संग्रह कई अर्थों में ज्यादा प्रोद्भासित करता है।

    105.00
  • Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap

    Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap
    पनसोखा है इन्द्रधनुष – मदन कश्यप

    205.00
  • Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap

    Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap

    नौवाँ दशक कविता की वापसी का दशक है। ऐसा कहना न केवल इस दृष्टि से सार्थक है कि इसमें कविता फिर साहित्य के केन्द्र में स्थापित हो गयी, बल्कि इस दृष्टि से भी कि इसमें गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता वाली कविता अपने निथरे रूप में सामने आयी और पूरे परिदृश्य पर छा गयी।

    230.00