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  • Tulsidas Ka Swapn Aur Lok By Jyotish Joshi (PB)Tulsidas Ka Swapn Aur Lok By Jyotish Joshi (PB)

    Original price was: ₹425.00.Current price is: ₹361.00.

    Tulsidas Ka Swapn Aur Lok – Jyotish Joshi
    तुलसीदास का स्वप्न और लोक – ज्योतिष जोशी

    हिन्दी के प्रतिष्ठित लेखक, आलोचक, समीक्षक ज्योतिष जोशी की आलोचनात्मक पुस्तक ‘तुलसीदास का स्वप्न और लोक’ शीर्षक से प्रकाशित हुई है. सतही तौर पर लग सकता है कि यह पुस्तक भी अन्य सामान्य आलोचनात्मक पुस्तकों की तरह तुलसीदास को संतशिरोमणि एवं भक्त कवि के रूप में अथवा धार्मिक रूढ़िग्रस्त प्रतिक्रियावादी वर्ण व्यवस्था के घोर समर्थक के रूप में चित्रित करने वाली होगी

  • Hindi Kavita Ke Sarokaar By Devshankar NaveenHindi Kavita Ke Sarokaar By Devshankar Naveen

    Original price was: ₹599.00.Current price is: ₹509.00.

    अपने सामाजिक सरोकार और इतिहास-बोध के सहकार से ही कोई रचनाकार अपनी रचना-दृष्टि निर्धारित करता है। इतिहास-बोध और सामाजिक सरोकार से निरपेक्ष रचनाकारों की रचनाएँ हर हाल में चूका हुआ उद्यम होगा। ऐसी रचनाएँ शाश्वत तो क्या, तात्कालिक भी नहीं बन सकतीं। समकालीन यथार्थ का भाव-बोध वहन किये बिना किसी रचना के शाश्वत होने की कल्पना निरर्थक है।

    ‘हिन्दी कविता के सरोकार’ शीर्षक इस पुस्तक में यह चेष्टा सदैव जागृत रही है कि भावकों को हिन्दी कविता के समुज्ज्वल अतीत में झाँकने की दृष्टि मिले। तथ्यतः बीते इतिहास, बदलते भूगोल, प्रगतिकामी जनचेतना, अप्रत्याशित राजनीतिक वातावरण और लैंगिक संवेदनाओं की विवेकशील दृष्टि अपनाये बिना भारतीय साहित्य को समझना असम्भव है। इसलिए इन सभी बिन्दुओं पर सावधान आलोचना-दृष्टि रखते हुए, इस पुस्तक में कविता के सामाजिक सरोकार पर गम्भीरता से विचार किया गया है।
    – पुरश्चर्या से
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  • Asahmatiyon Ke Vaibhav Ke Kavi Shriprakash ShuklaAsahmatiyon Ke Vaibhav Ke Kavi Shriprakash Shukla

    Original price was: ₹600.00.Current price is: ₹510.00.

    असहमतियों के वैभव के कवी श्रीप्रकाश शुक्ल

    1990 के बाद जिन कवियों ने हिन्दी कविता के आँगन में दस्तक दी, उनमें आज श्रीप्रकाश शुक्ल अग्रगण्य हैं। उनकी लगभग तीस वर्षीय काव्य-यात्रा का मूल्यांकन है यह पुस्तक ।

    श्रीप्रकाश शुक्ल का काव्य-संसार मूलतः उनका आस-पड़ोस है। आस-पड़ोस का अर्थ सहजीवन से है। सहजीवन में प्रकृति और उसके उपदान हैं; सामाजिक हैं, सामाजिक की सामूहिक चेतना है; उत्सव है, ध्वंस है-विसंगतियाँ, अपक्षरण, क्रूरताएँ हैं। ये सब मिलकर जिस काव्यात्मक व्यायोम की रचना करते हैं और उसके लिए काव्य की जिस संवेदनात्मक संरचना का विस्तार करते हैं- उसके लगभग सभी आयामों को इस पुस्तक में दर्ज करने की कोशिश की गयी है। इसमें वरिष्ठ से लेकर नव्यतम पीढ़ी के रचनाकारों ने जो योगदान दिया है, वह सम्पादक द्वय के उद्यम के साथ ही कवि की व्यापक स्वीकृति का परिचायक है।
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  • Renu : Kahani Ka Hiraman By Mrityunjay Pandey

    Original price was: ₹449.00.Current price is: ₹382.00.

    फणीश्वरनाथ रेणु पर बहुत कुछ लिखा गया है लेकिन मृत्युंजय पाण्डेय की यह किताब रेणु :

    कहानी का हिरामन रेणु सम्बन्धी ढेर सारी आलोचनात्मक सामग्री के बरअक्स कई मायनों में विशिष्ट है। अलबत्ता जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस समीक्षात्मक कृति को लेखक ने रेणु की कहानियों तक सीमित रखा है। पर इससे लाभ यह हुआ कि कहानीकार रेणु के अनूठेपन, उनकी कहानी यात्रा के विभिन्न पड़ावों, उनकी कहानियों की रचना प्रक्रिया और पृष्ठभूमि, उनके शिल्प और कथ्य आदि की विस्तार से चर्चा हो सकी है, और यह विद्यार्थियों व शोधकर्ताओं से लेकर रेणु साहित्य के रसिकों, सभी के लिए कहीं अधिक मूल्यवान साबित होगी। यह इसलिए भी जरूरी था क्योंकि रेणु सम्बन्धी समालोचना प्रायः ‘मैला आँचल’ पर सिमट जाती रही है। प्रस्तुत पुस्तक में जहाँ रेणु की कहानियों की पृष्ठभूमि तलाशते हुए उनके रचे जाने की प्रक्रिया की पड़ताल की गयी है, वहीं उनकी कहानियों की भाषा शिल्प शैली आति हरेक पक्ष
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  • Hindi Kahani : Parampara Aur Samkal By Ajay VermaHindi Kahani : Parampara Aur Samkal By Ajay Verma

    Original price was: ₹275.00.Current price is: ₹234.00.

    आज के दौर का यथार्थ जटिल और बहुरंगी है। जीवन के परिप्रेक्ष्य बहुत व्यापक हो गये हैं और उसी हिसाब से इस दौर में सक्रिय लेखकों की जीवनदृष्टि, रचना की थीम, अनुभव और संवेदना की दिशाओं, शिल्प, भाषा सब में पर्याप्त भिन्नता है। ठोस यथार्थ दीखने में आभासी मालूम पड़ता है और इसके प्रति लेखकों के दृष्टिकोण भी अलग-अलग हैं। वर्तमान समय समाज, संस्कृति, राजनीति और मानवीय सम्बन्ध-चेतना सबकी संरचना को विखण्डित कर रहा है। जाहिर है कि ऐसे समय में कोई ऐसी धारणा जिस पर आम राय बनायी जा सके, सम्भव नहीं मालूम पड़ती। इसीलिए इस काल की कहानियों के मिजाज और रूप-रंग को किसी एक संज्ञा में समेट पाना मुश्किल है क्योंकि नाम प्रस्तुत करने के लिए पहले एक ठोस अवधारणा बनाने की जरूरत पड़ती है और यह समय अवधारणा को ही संकटग्रस्त बनाता है।

    – भूमिका से
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  • Raag Darbari Edited By Vinod TiwariRaag Darbari Edited By Vinod Tiwari

    Original price was: ₹280.00.Current price is: ₹238.00.

    ‘राग दरबारी’ हिन्दी के कालजयी उपन्यासों में शुमार है। इसके बहुतेरे संस्करण निकल चुके हैं; जहाँ बहुत सारी भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है वहीं इसे नाट्य मंचन और टीवी धारावाहिक जैसे अन्य माध्यमों में भी प्रस्तुत किया गया है। यह सब इसकी बेमिसाल लोकप्रियता का ही प्रमाण है। लेकिन 1968 में जब इसका पहला संस्करण निकला था तब हिन्दी के अनेक दिग्गजों की प्रतिक्रिया क़तई प्रशंसात्मक नहीं थी। बाद में भी उपन्यास में वर्णित यथार्थ की प्रामाणिकता और अन्तर्वस्तु से लेखक के ट्रीटमेंट आदि को लेकर सवाल उठते रहे। लेकिन आज़ादी के कुछ बरसों बाद राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, न्याय व्यवस्था यानी हर क्षेत्र में पसर रहे पाखण्ड और पतन के व्यंग्यात्मक चित्रण से भरपूर ‘राग दरबारी’ की लोकप्रियता बढ़ती गयी। यही नहीं, इसने एक तरह से लेखक की अन्य रचनाओं को ढक सा लिया। श्रीलाल शुक्ल की पहचान मुख्य रूप से ‘राग दरबारी’ के लेखक की बन गयी। इस कृति ने जहाँ उन्हें हिन्दी के चोटी के उपन्यासकारों की पाँत में ला बिठाया, वहीं इसने उन्हें व्यंग्यकार के रूप में भी स्थापित किया। दरअसल, यह हिन्दी में अपने ढंग की एक अपूर्व कृति थी जो विधागत ढर्रे से काफी अलग दीख रही थी, और शायद यही वजह रही होगी कि इसने अपनी बाबत हिन्दी समालोचना को असहज कर दिया; यह भी कह सकते हैं कि उसके सामने पुनर्पाठ और पुनर्विचार की चुनौती पेश की। प्रस्तुत पुस्तक ‘राग दरबारी: मीनार और मेयार’ ऐसी ही सामग्री का संकलन है जिसमें ‘राग दरबारी’ पर शुरुआती टिप्पणियों से लेकर बाद में, अलग-अलग दौर में, महत्त्वपूर्ण आलोचकों-लेखकों द्वारा लिखे गये आलेख शामिल हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि भिन्न-भिन्न नज़र से एक अनन्य कृति के पाठ पुनर्पाठ, पड़ताल और परख, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन को एकत्र प्रस्तुत करने की पहल का स्वागत होगा।

    इस पुस्तक को आप १ क्लिक ऑर्डर बटन से भी ख़रीद सकते हैं

  • Digambar Vidrohini Akk Mahadevi By Subhash RaiDigambar Vidrohini Akk Mahadevi By Subhash Rai

    Original price was: ₹449.00.Current price is: ₹382.00.

    यह एक अनूठी पुस्तक है : इसमें गम्भीर तथ्यपरक तर्कसम्मत शोध और आलोचना, सर्जनात्मक कल्पनाशीलता से किये गये सौ अनुवाद और कुछ छाया-कविताएँ एकत्र हैं। इस सबको विन्यस्त करने में सुभाष राय ने परिश्रम और अध्यवसाय, जतन और समझ, संवेदना और सम्भावना से एक महान् कवि को हिन्दी में अवतरित किया है। वह ज्योतिवसना थी, इसीलिए उसे ‘दिगम्बर’ होने का अधिकार था : अपने तेजस्वी वैभव के साथ ऐसी अक्क महादेवी का हिन्दी में हम इस पुस्तक के माध्यम से ऊर्जस्वित अवतरण का स्वागत करते हैं। रजा पुस्तक माला इस पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्न है।

    -अशोक वाजपेयी
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  • Bachpan Aur Baalsahitya Ke Sarokar By Omprakash KashyapBachpan Aur Baalsahitya Ke Sarokar By Omprakash Kashyap

    Original price was: ₹525.00.Current price is: ₹446.00.

    बालक और उसके माता-पिता एक ही परिवेश में साथ-साथ रहते हैं। लेकिन परिवेश को देखने की दोनों की दृष्टि अलग-अलग होती है। बालक के लिए उसकी जिज्ञासा और कौतूहल महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसलिए वह परिवेश के प्रति बोधात्मक दृष्टि रखता है। सामने आयी हर चीज को कुरेद-कुरेदकर परखना चाहता है। उसकी उत्सुकता एक विद्यार्थी की उत्सुकता होती है। माता-पिता सहित परिवार के अन्य सदस्यों की दृष्टि बाह्य जगत् को उपयोगितावादी नजरिये से देखती है। वे वस्तुओं को जानने से ज्यादा उन्हें उपयोग के लिए अपने साथ रखते हैं। आसान शब्दों में कहें तो वस्तु जगत् के प्रति बालक और बड़ों की दृष्टि में दार्शनिक और व्यापारी जैसा अन्तर होता है। लोकप्रिय संस्कृति में दार्शनिक घाटे में रहता है। बाजी प्रायः व्यापारी के हाथ रहती है। उसका नुकसान ज्ञानार्जन के क्षेत्र में मौलिकता के अभाव के रूप में सामने आता है। धीरे-धीरे बालक माता-पिता के रंग में रंगने लगता है। इसे हम बालक का समझदार होना मान लेते हैं। दुनियादार होना ही उनकी दृष्टि में समझदार होना है।

    – इसी पुस्तक से

     

    Kindle E-Book Also Available
    Available on Amazon Kindle

  • Kavita Ka Vyom Aur Vyom Ki Kavita By Madan Soni

    Original price was: ₹775.00.Current price is: ₹620.00.

    Kavita Ka Vyom Aur Vyom Ki Kavita

    ‘कविता का व्योम और व्योम की कविता’ पुस्तक मदन सोनी द्वारा लिखित। पुस्तक में शामिल अनेक कवियों की परवर्ती कविता के हाथों भी और बाद के वर्षों में आए नये कवियों के हाथों भी। स्वयं इस समय अनेक अद्वितीय कवि ऐसे हैं जिनकी कविता उस समझ के दायरे से बाहर है जिस समझ के साथ यह पुस्तक लिखी गयी है।.

  • Antrang Alok – Tapas Sen – PaperBack

    Original price was: ₹425.00.Current price is: ₹361.00.

    Antrang Alok – Tapas Sen
    अन्तरंग आलोक – तापस सेन

    तापस सेन की पहचान एक नेपथ्य शिल्पी के तौर पर रही है। वे मंच से बाहर, दर्शकों की नज़र की ओट में ही रहते थे। पादप्रदीप की रोशनी की दरकार नहीं थी वहाँ। हालाँकि केवल पादप्रदीप नहीं, पूरे प्रेक्षागृह की रोशनी को नियन्त्रित करने की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर होती थी।

  • Swayam Prakash By Renu Vyas – Paperback

    Original price was: ₹259.00.Current price is: ₹233.00.

    स्वयं प्रकाश के लेखन के पीछे यही प्रेरणा रही है-जो है, उससे बेहतर चाहिए – इंसान, समाज, देश, दुनिया। एक साक्षात्कार में वे कहते हैं-हम एक अधिक सुन्दर, कम क्रूर, अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समतापूर्ण समाज बनाने का सपना देखते हैं!

  • Mahajagran Ka Shlaka Purush By Kubernath Ray (Hardcover)

    Original price was: ₹700.00.Current price is: ₹525.00.

    Mahajagran Ka Shlaka Purush By Kubernath Ray

    महाजागरण का शलाका-कुबेरनाथ राय