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बानो क़ुदसिया और खदीजा मस्तूर के चर्चित उपन्यास
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बानो क़ुदसिया जिन्हें बानो आपा के नाम से भी जाना जाता है, एक पाकिस्तानी उपन्यासकार, नाटककार और अध्यात्मवादी थीं। उन्होंने उर्दू में उपन्यास, नाटक और लघु कथाएँ भी लिखीं। पाकिस्तानी सरकार द्वारा बानो क़ुदसिया को प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान सितार-ए-इम्तियाज़ और हिलाल-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया। इन्हें कमाल-ए-फ़न सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
ख़दीजा मस्तूर 11 दिसम्बर 1927 को उत्तर प्रदेश के जिला बरेली में पैदा हुई। घर का माहौल अदबी था। माँ की देखा-देखी ख़दीजा मस्तूर और उनकी छोटी बहन हाजिरा मसरूर को भी कम उम्र से ही कहानियाँ लिखने का शौक़ पैदा हुआ। उनकी कहानियाँ उस वक़्त की बच्चों की पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं जिससे उनकी हौसला अफजाई हुई। फिर जब वह बड़ी हुई और उनकी कहानियाँ प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं ‘साक्री’, ‘अदबी दुनिया’ और ‘आलमगीर’ में प्रकाशित हुईं तो अदब में उनकी पहचान बन गयी। ख़दीजा मस्तूर के पिता का देहान्त उसी वक़्त हो गया था जब दोनों बहनें कमसिन थीं, इसलिए घर में आर्थिक तंगी थी। वह कुछ समय के लिए बम्बई में रहीं फिर जब पाकिस्तान बना तो वह अत्यधिक अव्यवस्था की स्थिति में पाकिस्तान चली गयीं, जहाँ मशहूर अदीब व शायर अहमद नदीम क्रासमी ने उनकी मदद की। सन् 1950 में उन्होंने क़ासमी के भांजे, पेशे से पत्रकार जहीर बाबर ऐवान से शादी कर ली। खदीजा सारी उम्र साहित्य सेवा करती रहीं। 26 जुलाई 1982 को लन्दन में दिल का दौरा पड़ने से उनका इन्तिकाल हो गया और वह लाहौर में दफ़न की गयीं।












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