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SOMALIYA KA YATNAGHAR (Novel) by Rajendra Chandrakant Rai

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सोमालिया का यातनाघर — राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय


करीब ढाई दशक से हिन्द महासागर और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की घटनाएँ जब-तब समाचारों की सुर्खियाँ बनती रही हैं। लिहाजा ऐसी घटनाओं की बाबत मीडिया रिपोर्टों की कमी नहीं है। लेकिन इन सब में समस्या की तह में जाने के बजाय उसे एकांगी या सतही नजरिये से ही देखा गया है। सुरक्षित नौपरिवहन और सुरक्षित समुद्री व्यापार की चिन्ता, स्वाभाविक ही, सर्वप्रमुख रही है। पर साहित्य खबरों की तह में और घटनाओं के आर-पार जाने का माद्दा रखता है, और राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय का यह उपन्यास इसका एक मजबूत साक्ष्य है। सोमालिया के समुद्री लुटेरों द्वारा बीच समन्दर में इटैलियन कम्पनी के एक मालवाहक जहाज, जिस पर भारतीय क्रू मेम्बर्स हैं, को अगवा करके लाखों डॉलर फिरौती वसूलने की घटना इस उपन्यास के केन्द्र में है। उपन्यास की कथा दो छोर से चलती है। जहाज के अगवा होने की खबर मिलने के बाद जहाज के सेकेण्ड इंजीनियर गौतम के परिवार पर क्या बीतती है इसकी दारुण कथा एक तरफ चलती है तो दूसरी तरफ जहाज पर समुद्री डाकुओं के हमले और कब्जे का सनसनीखेज घटनाक्रम उभरता है। डकैतों का स्पीडबोट से जहाज तक पहुँचना, उसपर हमला करके सभी को बन्धक बना लेना, फिर फिरौती की रकम वसूलने के लिए यातना देना और मार डालने की धमकी तथा कड़ी सौदेबाजी, इस सब का वर्णन इतना जीवन्त है जैसे सब कुछ आँखों के सामने घटित हो रहा हो। लेकिन बस इतना ही होता तो उपन्यास रहस्य-रोमांच की एक कथा भर होकर रह जाता। लेकिन लेखक ने यह दिखाया है कि सोमालिया की कंगाली के पीछे बड़े-बड़े शिकारी जहाजों द्वारा मछली समेत उसके समुद्री संसाधनों को खत्म किया जाना है, और समुद्री डकैती के मूल में भी यही वजह है। इस तरह, एक लूट ने दूसरी लूट को जन्म दिया है। इस उपन्यास से गुजरने के बाद आप पूरे मसले को उसी नजर से नहीं देखते जिस तरह दुनिया भर की सरकारें देखती हैं, बल्कि एक अधिक मानवीय दृष्टिकोण से देखने लगते हैं। एक कृति की इससे अधिक सार्थकता और क्या होगी !’ काल के कपाल पर हस्ताक्षर’ नाम से हरिशंकर परसाई की वृहद् जीवनी लिख चुके राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय ने इस उपन्यास के जरिये एक बार फिर अपनी रचनात्मक सामर्थ्य की छाप छोड़ी है।


 

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Description

SOMALIYA KA YATNAGHAR (Novel) by Rajendra Chandrakant Rai


About The Author

राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय
जन्म : 5 नवम्बर 1953 को जबलपुर में। शिक्षा: एमए (हिन्दी साहित्य), नेट।
कृतियाँ : कामकंदला, फिरंगी ठग, खलपात्र (उपन्यास); बेगम बिन बादशाह, गुलामों का गणतन्त्र, अच्छा तो तुम यहाँ हो (कहानी संग्रह); सहस्त्रबाहु, थैंक्यू स्लीमेन, सलाम हनीफ मियाँ (नाटक)। इसके अलावा बच्चों के लिए कई नुक्कड़ नाटक व गीत।
इतिहास ग्रन्थ : इतिहास के झरोखे से, कल्चुरि राजवंश का इतिहास। ‘ मध्य प्रदेश का न्यायिक इतिहास और न्यायालय’ ग्रन्थ में लेखक के लिखे दो अध्याय शामिल ।
पर्यावरण लेखन : ‘गैरसरकारी संगठन स्थापना, प्रबन्धन और परियोजनाएँ, सामान्य पर्यावरण ज्ञान’ ।
इण्टैक के लिए लेखन : ‘एक गीत की लोकप्रियता के नब्बे साल सुभद्रा कुमारी
चौहान’, ‘एजेन्सी हाउस के 200 साल’;’ 1857 का विप्लव और जबलपुर जिले का योगदान’ का अनुवाद ।
अँग्रेजी से अनुवाद : ‘स्लीमेन के संस्मरण’, ‘स्लीमेन की अवध डायरी’, ‘ठगों की कूटभाषा रामासी’, ‘ठग अमीर अली की दास्तान’।
अन्य : ‘लुटेरे’ धारावाहिक की कहानी, पटकथा तथा जबलपुर के झण्डा सत्याग्रह पर बने वृत्तचित्र का पटकथा लेखन ।


SOMALIYA KA YATNAGHAR (Novel) by Rajendra Chandrakant Rai

Additional information

Author

Rajendra Chandrakant Rai

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-398-9

Pages

184

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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