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  • Jinda Hai To Sadakon Pe Aa By Balli Singh Cheema (Paperback)Jinda Hai To Sadakon Pe Aa By Balli Singh Cheema (Paperback)

    Original price was: ₹175.00.Current price is: ₹158.00.

    बल्ली चीमा जी एक ऐसे जनकवि हैं जिन्होंने अपने शब्दों से चिंगारियाँ उछालकर मशालें जलायी हैं। ले मशालें चल पड़े हैं- जनगीत सभी आन्दोलनकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर रहा है। चीमा जी ने एक वर्ष तक किसान आन्दोलन में सक्रिय रहकर दो भूमिकाएँ एकसाथ निभायी हैं

  • GEELI MITTI PAR PANJON KE NISHAN By Farid KhanGEELI MITTI PAR PANJON KE NISHAN By Farid Khan

    Original price was: ₹260.00.Current price is: ₹221.00.

    यह एक चकित करने वाला तथ्य है कि हिन्दी कविता में प्रस्थान बिन्दु या पैराडाइम शिफ्ट हमेशा हाशिये में प्रकट होने वाली आकस्मिक कविताओं के द्वारा हुआ है। चाहे मुक्तिबोध की कविता अँधेरे में, राजकमल चौधरी की कविता मुक्ति प्रसंग, धूमिल की पटकथा, सौमित्र मोहन की लुकमान अली, आलोकधन्वा की गोली दागो पोस्टर आदि

  • NAQSHANAMA By Sarfaraz AlamNAQSHANAMA By Sarfaraz Alam

    Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹255.00.

    नक़्शानामा ख्यातिलब्ध भूगोलवेत्ता सरफ़राज़ आलम का पहला कविता संग्रह है जो नक़्शे जैसे एक जरूरी किन्तु भूगोल की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण विषय पर लिखा गया है। एक विषय पर लिखना वस्तु की दृष्टि से कठिन तो होता ही है, शिल्प की दृष्टि से खतरनाक भी होता है क्योंकि इसमें आवृत्ति दोष का खतरा बना रहता है

  • VAH ACCHI JAGAH KAHAN HAI By Subodh Sarkar Trans. By Jaishree PurvarVAH ACCHI JAGAH KAHAN HAI By Subodh Sarkar Trans. By Jaishree Purvar

    Original price was: ₹275.00.Current price is: ₹234.00.

    बोध सरकार 28 अक्टूबर 1958 को कृष्ण नगर (कोलकाता) में जन्मे सुबोध सरकार के अब तक लगभग 35 संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। 2000 में बांग्ला अकादमी पुरस्कार एवं 2013 में द्वैपायन हृदेर धारे के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त किया।

  • KISSAGO RO RAHA HAI By Manoj Kumar JhaKISSAGO RO RAHA HAI By Manoj Kumar Jha

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹213.00.

    किस्सागो रो रहा है संग्रह की कविताओं में जिन्दगी के छोटे-छोटे दुख हैं, छोटे-छोटे स्वप्न भी। कोई शहीदाना अन्दाज नहीं, कोई दावे नहीं। किसी तरह का कोई बड़बोलापन नहीं। पर इसका यह अर्थ नहीं कि कवि को जगत्- दुख नहीं व्यापता इस संग्रह की कविताओं में जहाँ जीवन के तमाम अभाव झाँकते नजर आएँगे

  • SANLAP By Aniruddh Umat

    Original price was: ₹275.00.Current price is: ₹233.00.

    अनिरुद्ध उमट की कविताएँ पढ़ते हुए मीर तक़ी मीर की इन पंक्तियों का स्मरण हो आता है-ले साँस भी आहिस्ता कि नाजुक है बहुत काम/आफ़ाक़ की इस कारगह-ए-शीशागरी का। सचमुच इस पत्थर की तरह अपारदर्शी, संवेदनहीन संसार में इतनी नजाकत भरी कविताएँ लिखना, खाण्डे की धार पर चलने जैसा ही है। कवि ने जिस कला पर चलने का नेम लिया है