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CHITT MEIN VITT KA VAAS (Essays) by Ravibhushan

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चित्त में वित्त का वास – रविभूषण


रविभूषण हिन्दी के साहित्यिक बौद्धिक स्फीयर में एक ऐसे बुद्धिजीवी हैं जिनकी चिन्ता साहित्य तक सीमित नहीं है। उनकी चिन्ता के दायरे में समाज और उसके लोग भी हैं। यह समाज अधिकांशतः तो भारतीय है, परन्तु उसके सामने भूमण्डलीकृत दुनिया की चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। पुस्तक के विस्तार से जो निष्कर्ष निकलता है वह यह कि लेखक की चिन्ता मानव मात्र की है। मनुष्य के जीवन को प्रभावित करने वाले तमाम विचार, विचारधारा, राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक संगठन उनकी चिन्ता का सबब हैं। इन इकाइयों में भी वे तत्त्व जो मनुष्य की गरिमा को आहत करते हैं, उनकी पैनी नजर से बच नहीं पाते। इस तरह वे जनता के प्रति प्रतिबद्ध बौद्धिक हैं।
प्रतिबद्धता के मायने रविभूषण के साहित्य और पत्रकारिता में एकहरा नहीं है। वह अनेकायामी है। उपर्युक्त सन्दर्भों से इतर प्रतिबद्धता का एक अर्थ राजनीतिक विचारधारात्मक संश्लेष से भी है। इनके यहाँ विचारधारा जीवन की व्यावहारिक जमीन के लिए खाद-पानी का काम करती है। रविभूषण के निबन्धों का यह संग्रह लगभग बीस वर्षों के उनके लेखन का प्रतिनिधित्व करता है। ये निबन्ध ‘सबलोग’ पत्रिका और ‘जन सन्देश टाइम्स’ अखबार में प्रकाशित होते रहे हैं। ये निबन्ध उनके निडर बौद्धिक हस्तक्षेप का साक्ष्य हैं।


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Description

CHITT MEIN VITT KA VAAS (Essays) by Ravibhushan


About the Author

रविभूषण
सम्भवतः 17 दिसम्बर 1946 को बिहार प्रान्त के मुज़फ़्फ़रपुर जिले के गाँव चैनपुर-धरहरवा के एक सामान्य परिवार में जन्मे रविभूषण की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के आसपास हुई। बिहार विश्वविद्यालय के लंगट सिंह कॉलेज से हिन्दी ऑनर्स (1965) और हिन्दी भाषा-साहित्य में एम.ए. (1967-68)1 भागलपुर विश्वविद्यालय से डॉ. बच्चन सिंह के निर्देशन में ‘छायावाद में रंग-तत्त्व’ पर पी-एच.डी. (1985)। नवम्बर 1968 से अध्यापन-कार्य। टी.एन.बी.कॉलेज, भागलपुर में पदस्थापित। भागलपुर विश्वविद्यालय में ही रीडर और प्रोफेसर बने। 1991 में राँची विश्वविद्यालय में स्थानान्तरण। अक्टूबर 2008 में राँची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त । आलोचनात्मक लेखन का आरम्भ 1971-72 से। 1978-79 से सांस्कृतिक मोर्चे पर सर्वाधिक सक्रिय। पहले ‘नव जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा’ और बाद में ‘जन संस्कृति मंच’ से सम्बद्ध। ‘जसम’ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। समय और समाज को केन्द्र में रखकर साहित्य एवं साहित्येतर विषयों पर विपुल लेखन।
प्रकाशित पुस्तकें : ‘वैकल्पिक भारत की तलाश’,
‘कहाँ आ गये हम वोट देते-देते?’, ‘बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी’, ‘फ़ासीवाद की दस्तक’, ‘प्रबुद्ध वर्ग का घातक मौन’ और ‘रामविलास शर्मा का महत्त्व’। कई पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य।


Additional information

Author

Ravibhushan

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-245-6

Pages

310

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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