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Nepathya Ka Rangmanch Edited by Mahesh Anand, Devendra Raj Ankur

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नेपथ्य का रंगमंच

सम्पादन : महेश आनन्द , देवेन्द्र राज अंकुर


चूँकि दर्शकों को नाटक की विषयवस्तु के समय तक ले जाने में पार्श्वकर्म कई रूपों में उपस्थित होता है। इसलिए वह आलेख की मूल रेखाओं को छेड़े बिना कभी स्थापित परम्पराओं का पालन करता है और कभी इन सीमाओं को तोड़ते हुए नयी तकनीक अपनाता है। इसी प्रक्रिया में प्रदर्शन का नया कलारूप उभरता है। यही पार्श्वकर्म की बुनियादी भूमिका है और इन्हीं अर्थों में वह प्रदर्शन का अभिन्न अंग बनता है।
शौकिया रंगमंच व्यावसायिक थिएटर या फ़िल्म के दमदार तमाशे का मुकाबला नहीं कर सकता। इसके लिए रंगमंच के बीज रूप अभिनेता के शरीर और उसकी मानसिक क्षमता को विकसित करना होगा जिससे आलेख का सह-निर्माण हो सके। यह कार्य दर्शकों के साथ मुठभेड़ करते हुए सीधे मैराथन में पूरा होता है।
इस पुस्तक में नेपथ्य का रंगमंच यानी पार्श्वकर्म के सैद्धान्तिक विवेचन के साथ उसके देखे-अनदेखे व्यावहारिक पक्षों का परिचय मिलेगा। इसके लिए पहले से प्रकाशित कुछ महत्त्वपूर्ण लेखों का चयन किया गया है और कुछेक युवा रंगकर्मियों से लिखवाये गये हैं। रंगकर्मी पाठक उनके उत्साह भरे प्रयोगों की ध्वनियाँ सुन सकते हैं।
– भूमिका से


क्या इसे एक रंगमंचीय विडम्बना नहीं कहा जाएगा कि जो नेपथ्य अभिनेता को सामने लाने में इतनी बड़ी भूमिका निभाता है उसी के विभिन्न पक्षों पर सबसे कम चर्चा की गयी है। यदि हम अपने यहाँ भरत के नाट्यशास्त्र से भी उदाहरण देना चाहें तो हमें यह जानकर आश्चर्य होगा कि वहाँ पर भी कुल जमा 36 अध्यायों में से लगभग 20 अध्याय मात्र अभिनय पर केन्द्रित किये गये हैं। जहाँ तक रंगमंच के नेपथ्य का प्रश्न है, भरत ने आहार्य अभिनय शीर्षक वाले अध्याय में मात्र एक अध्याय में ही मंच उपकरण, रूपसज्जा, वस्त्रसज्जा और दूसरे तत्त्वों की चर्चा करके इतिश्री कर दी है। पाश्चात्य रंगमंच में भी स्थिति इससे भिन्न नहीं है। पिछले 700-800 वर्षों के रंगमंचीय इतिहास को यदि छोड़ दिया जाए, जब वहाँ सेबस्तिआनो सेरलिओ और बाद में एडोल्फ आपिया, गार्डन क्रेग जैसे अभिकल्पकों ने स्वतन्त्र रूप से अपनी पहचान स्थापित की। नहीं तो इससे पूर्व वहाँ पर भी हम थेस्पिस से आरम्भ करके मात्र अभिनेता या नाटककार के बारे में ही ज़्यादा जानते हैं।
नेपथ्य का रंगमंच संकलन के माध्यम से हमलोगों ने
कोशिश की है कि उन सभी तकनीकी पक्षों के विषय में विस्तारपूर्वक एकसाथ चर्चा की जाए-मात्र सैद्धान्तिक पक्ष ही नहीं वरन् उनका व्यावहारिक पक्ष भी उतना ही रेखांकित किया जाए। इसके साथ-साथ इनका सौन्दर्यात्मक पक्ष भी उभरकर सामने आ सके।
– भूमिका से


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Description

Nepathya Ka Rangmanch – Edited by Mahesh Anand, Devendra Raj Ankur


About the Author

महेश आनन्द
जन्म 5 फ़रवरी 1946 को। उच्च शिक्षा दिल्ली वि.वि. से। दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एण्ड कॉमर्स, दिल्ली वि.वि. में 40 वर्ष तक अध्यापन। ‘नटरंग’ में 24 वर्षों तक सम्पादन सहयोग। सचिव, एण्टन चेखव ड्रामा स्टूडियो (1986-88) सोवियत कल्चरल सेण्टर, दिल्ली। कृतियाँ: कहानी का रंगमंच (1997), जयशंकर प्रसाद : रंगदृष्टि (1998), जयशंकर प्रसाद : रंगसृष्टि (1998), रंग दस्तावेज : सौ साल (दो खण्ड, 2007), रंगमंच के सिद्धान्त (देवेन्द्र राज अंकुर के साथ सम्पादन, 2008), रेखा जैन (मोनोग्राफ 2010), हिन्दी रंगमंच एक दृश्य यात्रा (2019), दृश्य के साथ-साथ (2021), रंगसंवाद (2021)। पुरस्कार : विशिष्ट कृति सम्मान, हिन्दी अकादमी, दिल्ली (1988-89); सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान, राँची (2010); सीनियर फेलोशिप, संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार (2011-12); विशिष्ट समीक्षक सम्मान, नट सम्राट, दिल्ली (2017); नेपथ्य रंगसम्मान, 2022 (रंगमंच के दस्तावेजीकरण के लिए)।


देवेन्द्र राज अंकुर
भारतीय रंगमंच, विशेषतः हिन्दी रंगमंच के सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक। रंग निर्देशन के साथ-साथ प्राध्यापन में भी अपनी एक अलग पहचान। देश के सभी नाट्य कला संस्थानों, विश्वविद्यालयों और दूसरी व्यावसायिक, अव्यावसायिक रंगमण्डलियों के साथ भारतीय रंगमंच के इतिहास, सिद्धान्त और परम्परा, विशेष रूप से भरतमुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ का प्राध्यापन और प्रशिक्षण। रंगमंच के क्षेत्र में ‘कहानी का रंगमंच’ जैसी विधा को जन्म दिया, साथ ही ‘नाट्यशास्त्र’ के प्रशिक्षण की भी एक नयी पद्धति खोजने का श्रेय उन्हें दिया जाता है अर्थात् ‘नाट्यशास्त्र’ को केवल सैद्धान्तिक स्तर पर ही नहीं वरन् उसके प्रायोगिक पक्ष पर भी छात्रों के साथ व्यावहारिक परीक्षण किया जाना चाहिए।


नेपथ्य का रंगमंच सम्पादन : महेश आनन्द , देवेन्द्र राज अंकुर

Additional information

Editor

Mahesh Anand, Devendra Raj Ankur

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-818-2

Pages

284

Publication date

02-06-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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