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Renu : Kahani Ka Hiraman By Mrityunjay Pandey

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फणीश्वरनाथ रेणु पर बहुत कुछ लिखा गया है लेकिन मृत्युंजय पाण्डेय की यह किताब रेणु :

कहानी का हिरामन रेणु सम्बन्धी ढेर सारी आलोचनात्मक सामग्री के बरअक्स कई मायनों में विशिष्ट है। अलबत्ता जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस समीक्षात्मक कृति को लेखक ने रेणु की कहानियों तक सीमित रखा है। पर इससे लाभ यह हुआ कि कहानीकार रेणु के अनूठेपन, उनकी कहानी यात्रा के विभिन्न पड़ावों, उनकी कहानियों की रचना प्रक्रिया और पृष्ठभूमि, उनके शिल्प और कथ्य आदि की विस्तार से चर्चा हो सकी है, और यह विद्यार्थियों व शोधकर्ताओं से लेकर रेणु साहित्य के रसिकों, सभी के लिए कहीं अधिक मूल्यवान साबित होगी। यह इसलिए भी जरूरी था क्योंकि रेणु सम्बन्धी समालोचना प्रायः ‘मैला आँचल’ पर सिमट जाती रही है। प्रस्तुत पुस्तक में जहाँ रेणु की कहानियों की पृष्ठभूमि तलाशते हुए उनके रचे जाने की प्रक्रिया की पड़ताल की गयी है, वहीं उनकी कहानियों की भाषा शिल्प शैली आति हरेक पक्ष
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Description

Renu : Kahani Ka Hiraman By Mrityunjay Pandey (Criticism)


रेणु अपनी कथाओं के माध्यम से एक ऐसे गाँव, ऐसे लोग से परिचय कराते हैं, जिसे हम नहीं जानते। यह आजाद भारत का अलक्षित गाँव है। रेणु ने भारतीय गाँव को उसकी सुन्दरता और कुरूपता के साथ चित्रित किया है। उनके गाँव में ‘फूल भी है, शूल भी, धूल भी है, गुलाब भी, कीचड़ भी, चन्दन भी, सुन्दरता भी है, कुरूपता भी। ‘ रेणु ने किसी को भी छोड़ा नहीं है। वे किसी से बच नहीं पाये हैं। वे गाँव की सारी अच्छाइयों-बुराइयों के साथ ‘साहित्य की दहलीज पर’ उपस्थित होते हैं। यह अच्छाई बुराई उनके पात्रों में भी है। उनके पात्र गाँव के छोटे-छोटे हलवाहे चरवाहे, लोहार गाड़ीवान, कारीगर आदि हैं। ये सभी पात्र सांस्कृतिक धरोहर की तरह हैं। रेणु से पहले प्रेमचन्द के यहाँ कुछ ऐसे साधारण किन्तु विलक्षण पात्र दिखते हैं। इन पात्रों को रेणु की गहरी सहानुभूति प्राप्त है।
– इसी पुस्तक से


About the Author

मृत्युंजय पाण्डेय
जन्म : 20 जुलाई 1982, मूल निवासी : दिघवा दुबौली, गोपालगंज (बिहार)।
शिक्षा : एम.ए., एम.फिल., पी-एच.डी. (कलकत्ता विश्वविद्यालय) ।
प्रकाशित पुस्तकें : साहित्य, समय और
आलोचना, कहानी से संवाद, कहानी का अलक्षित प्रदेश, रेणु का भारत, कविता के सम्मुख, केदारनाथ सिंह का दूसरा घर, कहानी बीच आवाजाही, कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव (आलोचना); नयी सदी: नयी
कहानियाँ (तीन खण्डों में), प्रेमचन्द :
निर्वाचित कहानियाँ, जयशंकर प्रसाद : निर्वाचित कहानियाँ (सम्पादन) ।
सम्मान : देवीशंकर अवस्थी सम्मान
(2018)

Additional information

Author

Mrityunjay Pandey

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

9788119899418

Pages

344

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Publication date

10-02-2024

1 review for Renu : Kahani Ka Hiraman By Mrityunjay Pandey

  1. Adrika Sharma

    यह किताब फणीश्वरनाथ रेणु के काव्य का एक महान उपहार है, जिसने हमें अपने शैली, भावनाओं और रचनात्मक गहनाई के माध्यम से महाकाव्य की सच्चाई को समझने का मौका दिया है।

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