Description
Renu : Kahani Ka Hiraman By Mrityunjay Pandey (Criticism)
रेणु अपनी कथाओं के माध्यम से एक ऐसे गाँव, ऐसे लोग से परिचय कराते हैं, जिसे हम नहीं जानते। यह आजाद भारत का अलक्षित गाँव है। रेणु ने भारतीय गाँव को उसकी सुन्दरता और कुरूपता के साथ चित्रित किया है। उनके गाँव में ‘फूल भी है, शूल भी, धूल भी है, गुलाब भी, कीचड़ भी, चन्दन भी, सुन्दरता भी है, कुरूपता भी। ‘ रेणु ने किसी को भी छोड़ा नहीं है। वे किसी से बच नहीं पाये हैं। वे गाँव की सारी अच्छाइयों-बुराइयों के साथ ‘साहित्य की दहलीज पर’ उपस्थित होते हैं। यह अच्छाई बुराई उनके पात्रों में भी है। उनके पात्र गाँव के छोटे-छोटे हलवाहे चरवाहे, लोहार गाड़ीवान, कारीगर आदि हैं। ये सभी पात्र सांस्कृतिक धरोहर की तरह हैं। रेणु से पहले प्रेमचन्द के यहाँ कुछ ऐसे साधारण किन्तु विलक्षण पात्र दिखते हैं। इन पात्रों को रेणु की गहरी सहानुभूति प्राप्त है।
– इसी पुस्तक से
About the Author
मृत्युंजय पाण्डेय
जन्म : 20 जुलाई 1982, मूल निवासी : दिघवा दुबौली, गोपालगंज (बिहार)।
शिक्षा : एम.ए., एम.फिल., पी-एच.डी. (कलकत्ता विश्वविद्यालय) ।
प्रकाशित पुस्तकें : साहित्य, समय और
आलोचना, कहानी से संवाद, कहानी का अलक्षित प्रदेश, रेणु का भारत, कविता के सम्मुख, केदारनाथ सिंह का दूसरा घर, कहानी बीच आवाजाही, कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव (आलोचना); नयी सदी: नयी
कहानियाँ (तीन खण्डों में), प्रेमचन्द :
निर्वाचित कहानियाँ, जयशंकर प्रसाद : निर्वाचित कहानियाँ (सम्पादन) ।
सम्मान : देवीशंकर अवस्थी सम्मान
(2018)


















Adrika Sharma –
यह किताब फणीश्वरनाथ रेणु के काव्य का एक महान उपहार है, जिसने हमें अपने शैली, भावनाओं और रचनात्मक गहनाई के माध्यम से महाकाव्य की सच्चाई को समझने का मौका दिया है।