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Salibein Mere Dariche Mein By Shakeel Siddiqui

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तुमने अपने घर की तन्हाई का जिक्र किया है। मैं जानता हूँ कि यह तन्हाई कितनी कड़ी और जुदाई के यह लम्हे कितने गरौं हैं। इनको दिल से धोया नहीं जा सकता लेकिन इनका बोझ इस तसव्वुर से कम ज़रूर किया जा सकता है कि बीते हुए दिन कितने अच्छे थे और आने वाले दिन कितने बेहतर होंगे। मैं तो यही करता हूँ, जब से जेलखाने का दरवाजा बन्द हुआ है मैं कभी माज़ी (अतीत) के पैरहन को तार- तार करके उसे मुख्तलिफ़ सूरतों में दुबारा बुनता रहता हूँ। और कभी आने वाले दिनों को दामे तसव्वुर में कैद करके उनसे अपनी मर्जी और पसन्द के मुख्तलिफ़ एलबम तरतीब देता रहता हूँ। जानता हूँ कि यह बेकार सा शगल है इसलिए कि ख़्वाबों को हक़ीक़त की जंजीरों से आज़ाद नहीं किया जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि थोड़ी देर के लिए आदमी तख्य्युल (कल्पना) के बल पर गिर्दो-पेश की दलदल से पाँव छुड़ा सकता है। फ़रारियत (पलायन) बुरी बात है लेकिन जब हाथ-पाँव जकड़े हुए हों तो आज़ादी की वाहिद सूरत यही रह जाती है। इसी नुस्खे के तुफैल मुझे जेल की सलाखें बहुत ही हक़ीर और बेहक़ीक़त दिखाई देने लगी हैं और बेशतर औक़ात उनकी तरफ़ ध्यान ही नहीं जाता।

– इसी पुस्तक से

 

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Description

Salibein Mere Dariche Mein Translated By Shakeel Siddiqui

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (13 फरवरी 1911-20 नवम्बर 1984) उर्दू के महानतम शायरों में शुमार हैं। उनका जीवन काफी उतार-चढ़ाव का रहा। स्यालकोट में जन्मे फ़ैज़ उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद ब्रिटिश इण्डियन आर्मी में भर्ती हो गये थे। विभाजन के बाद अलग देश के रूप में पाकिस्तान के वजूद में आने के बाद उन्होंने अँग्रेजी में ‘पाकिस्तान टाइम्स’ और उर्दू में ‘इमरोज़’ दो अख़बारों का सम्पादन किया। मार्क्सवाद के क़ायल तो थे ही, कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी थे। साहित्यिक हलके में वह प्रगतिशील आन्दोलन से जुड़े और प्रगतिशील लेखक संघ के अगुआ लेखकों में गिने गये। 1951 में फ़ैज़ को जेल जाना पड़ा, इस आरोप में कि वह लियाक़त सरकार को गिराने और उसकी जगह सोवियत समर्थक, वामपन्थी सरकार लाने की साज़िश रच रहे थे। चार साल बाद वह रिहा हो गये, फिर उन्होंने कई साल विदेश में बिताये। बहरहाल, फ़ैज़ के जीवनकाल में ही उनकी पहचान उर्दू के सर्वाधिक प्रसिद्ध रचनाकार के रूप में बन गयी थी ।

Additional information

ISBN

9788119127900

Author

Faiz ahmed Faiz

Binding

Paperback

Pages

328

Publication date

09-10-2023

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Language

Hindi

Translation

Shakeel Siddiqui

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