Description
Swami Sahjanand Saraswati by Awadhesh Pradhan
स्वामी सहजानन्द सरस्वती
जन्म महाशिवरात्रि, 1889, निधन 26 जून 1950. स्वामी सहजानन्द सरस्वती बीसवीं सदी के एक ऐसे क्रान्तिकारी राजनेता थे, जिन्हें नियति ने संन्यास की ओर अग्रसर कर स्वामी सहजानन्द सरस्वती बनाया। लेकिन संन्यास ग्रहण करने के बावजूद वे विदेशी शासकों के विरोध में खड़े होने के साथ-साथ छोटे किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों के हितों के लिए जीवन भर संघर्षरत रहे। उन्होंने किसानों के संघर्ष को भारत के मुक्ति संघर्ष से जोड़ने का काम किया था। ओजस्वी एवं वीतरागी स्वामी सहजानन्द सरस्वती जीवन भर अपने सिद्धान्तों पर अडिग रहे। उन्होंने अपने सिद्धान्तों की कीमत पर कभी समझौता नहीं किया। वे एक सन्त और भारतीय समाज, संस्कृति और परम्परा के गहरे अध्येता थे। स्वामी सहजानन्द सरस्वती जैसे इतिहास निर्माता के बारे में, जिन्होंने न केवल कर्म किया है बल्कि समानान्तर चिन्तन भी प्रस्तुत किया है, भिन्न-भिन्न दिशाओं से विचार करना चाहिए क्योंकि ऐसे वैचारिक मन्थन ही उत्तरकालीन पीढ़ी के लिए उपयोगी हो सकते हैं। उनकी बातों का सम्प्रदायवादी या हलवादी अर्थ भविष्य के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं सिद्ध होगा।
अवधेश प्रधान : 10 नवम्बर 1952 को गाजीपुर (उ.प्र.) के सुल्तानपुर गाँव में जन्म। लगभग 40 वर्षों तक अध्यापन। बीएचयू के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर पद से जून 2020 में सेवानिवृत्त । कृतियाँ : हिन्दी साहित्य के इतिहास की समस्याएँ, साहित्य और समय, कीर्तिलता और विद्यापति का युग, परम्परा की पहचान, सुदामा पाण्डेय धूमिल, सीता की खोज। सम्पादन : काव्य और अर्थबोध, त्रिलोचन की डायरी, कविता का शुक्लपक्ष, नजरुल की हिन्दी कविताएँ, स्वामी विवेकानन्द संचयन, स्वामी सहजानन्द और किसान आन्दोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि, स्वामी सहजानन्द की आत्मकथा मेरा जीवन संघर्ष, हिन्दी साहित्य ज्ञानकोश (सात खण्ड) अनुवाद : मेघदूत के गीत, मेरे गुरु स्वामी विवेकानन्द – जैसा उन्हें देखा (भगिनी निवेदिता) । सम्मान : भगवतशरण उपाध्याय सम्मान (2009), सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान (2013), कबीर विवेक सम्मान (2014), कल्याण मल लोढ़ा शिक्षा सम्मान (2022), नामवर सिंह सम्मान (2023), रामविलास शर्मा सम्मान (2025) ।





















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