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BABA SAHEB Dr. AMBEDKAR : JEEVAN AUR VICHAR by Ashok Gopal

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बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जीवन और विचार – अशोक गोपाल

अनुवादक :अनिल माहेश्वरी

(A Part Apart का हिन्दी अनुवाद)


बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर (1891-1956) शायद भारत की सबसे ज्यादा पूजी जाने वाली ऐतिहासिक हस्ती हैं। एक ऐसी जाति में जन्म लेने के बावजूद, जिसे इंसानी मेल-जोल के लायक नहीं माना जाता था, उन्होंने यह साबित किया कि इंसान होने का असली मतलब क्या है। आंबेडकर, जो 1930 के दशक तक गीता का आदर और जिक्र करते थे, आखिर कैसे और क्यों हिन्दू धर्म के खिलाफ हो गए? गांधी और सावरकर के साथ उनके क्या मतभेद थे ? उन्होंने खुद को मूसा जैसा क्यों समझना शुरू कर दिया ? कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में सीखी गयी बातों का 1927 में महाड में पानी के लिए हुए संघर्ष और 1950 में भारत का संविधान बनाने पर क्या असर पड़ा ? 1935 में यह एलान करने के बाद कि वह एक हिन्दू के तौर पर नहीं मरेंगे, आंबेडकर ने ‘हिन्दू कोड बिल’ पर इतनी मेहनत क्यों की? किस बात ने उन्हें पश्चिम के व्यक्ति-स्वातंत्र्य का समर्थक बनाया, और फिर भी उन्होंने बौद्ध धर्म द्वारा सुझायी गयी सामूहिक नैतिक जीवन शैली में विश्वास रखा ? आंबेडकर को उपनिवेशवाद का बचाव करने वाला मानना गलत क्यों है ? आंबेडकर ने अपने विचारों को किन-किन विचारधाराओं से गढ़ा ? पचास हजार किताबों से भरी अपनी लाइब्रेरी में उन्होंने किन-किन विचारकों का सहारा लिया ? बौद्धिक जीवन जीने की उन्हें और उनके करीबियों को क्या कीमत चुकानी पड़ी ? जब वह आन्दोलन में व्यस्त थे, तब उनकी पहली पत्नी, रमाबाई का क्या हाल था ? यह किताब बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में सवाल पूछने और जितने हो सकें उतने सवालों के जवाब देने की एक जबरदस्त कोशिश है। अशोक गोपाल ने एक बेमिसाल काम अपने हाथ में लिया : आंबेडकर की ज्यादातर लिखी हुई चीजों, भाषणों और चिट्ठियों को मराठी और अँग्रेजी में पढ़ना, और उन चीजों को भी पढ़ना जो आंबेडकर ने खुद पढ़ी होंगी। यह लगातार की गयी उस मेहनत और संघर्ष की कहानी है, जिससे आंबेडकर की महान् हस्ती का निर्माण हुआ।


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Description

BABA SAHEB Dr. AMBEDKAR : JEEVAN AUR VICHAR by Ashok Gopal


अशोक गोपाल

पेशे से पत्रकार रहे अशोक गोपाल एक गम्भीर शोधकर्ता और जन-बुद्धिजीवी के तौर पर भी जाने जाते हैं। लगभग डेढ़ दशक पत्रकारिता में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर, संवैधानिक मूल्यों के संवर्द्धन के लिए, करीब दस साल, स्कूल-आधारित कार्यक्रम तैयार करने में लगाये। उनके लेखन में भारत में जातिप्रथा, सामाजिक विषमता और लोकतान्त्रिक संस्थाओं का विकास जैसे विषय केन्द्र में रहे हैं। उनकी दृष्टि में अकादमिक अनुशासन व गहराई, तथ्यपरक विश्लेषण तथा पत्रकारीय स्पष्टता का सुन्दर सहमेल है। अशोक गोपाल को विशेष पहचान उनकी चर्चित पुस्तक अ पार्ट अपार्ट: द लाइफ एण्ड थॉट्स ऑफ बी. आर. आंबेडकर से मिली। प्रस्तुत पुस्तक इसी का हिन्दी अनुवाद है। इस पुस्तक में अशोक गोपाल ने आंबेडकर के जीवन, उनके विचारों और तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक सन्दर्भों को विस्तार से दर्ज किया है। इस कृति के लिए वह कमलादेवी चट्टोपाध्याय एन.आई.एफ. बुक प्राइज (2024) तथा कारवान बुक अवार्ड से सम्मानित किये गये हैं।


अनिल माहेश्वरी
जन्म : मेरठ; पचास वर्ष का पत्रकारिता का अनुभव; ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से विशेष संवाददाता के पद से सेवानिवृत्त ।
अँग्रेजी में ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी : इंस्टीट्यूशन ऑफ लर्निंग ऑर आइडेण्टिटी’, ‘पोलराइज्ड टाइम्स : लिविंग इन इण्डिया टुडे’, ‘कम्पल्सिव नोज पिकिंग एण्ड अदर टू टेल्स’, ‘मून स्टिल शाइंस : एन एनवायर्नमेण्टल इशू’, ‘राइट टु इनफॉर्मेशन : ए नो-विन सिचुएशन’ सहित सामयिक विषयों पर एक दर्जन से अधिक किताबों का प्रकाशन। हिन्दी में ‘मस्लक-ए-आला हज़रत बरेलवी’, ‘… हाजिर हों : आधुनिक न्यायिक दायरे में रामायण की पुनर्यात्रा’; हिन्दी में अनुवाद कार्य- ‘सभ्यता के कोने’ (वेरियर एल्विन और भारतीय आदिवासी समाज), ‘दी रिपब्लिक’ (प्लेटो कृत)।
सम्प्रति : नोएडा में निवास एवं स्वतन्त्र लेखन ।
अतिथि प्रोफेसर : चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना।


Additional information

Author

Ashok Gopal

Hindi Translation

Anil Maheshwari

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-793-2

Pages

822

Publication date

06-06-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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