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UPNIVESH : SANSKRITIK ANYAYA KO KAISE SAMJHEN by Rajeev Bhargva

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उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें – राजीव भार्गव

अनुवाद नरेश गोस्वामी


राजीव भार्गव का वृहत् निबन्ध ‘उपनिवेश सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें’ सेतु विचार अन्तर्गत जिज्ञासा श्रृंखला की पहली पुस्तक है। इस श्रृंख्ला के अन्तरर्गत वैसे बृहत् निबन्धों के प्रकाशन की योजना है जिन्होंने समाज के किसी प्रसंग को व्यापक रूप से प्रश्नांकित किया है और उसके समाधान की कोशिश की है इस में एक ही वृहत् निबन्ध प्रकाशित होगा। आशा है इस पुस्तक और इस श्रृंखला का हिन्दी में स्वागत होगा।


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Description

UPNIVESH : SANSKRITIK ANYAYA KO KAISE SAMJHEN by Rajeev Bhargva


About The Author

राजीव भार्गव
राजीव भार्गव का जन्म 1954 में हुआ। शिक्षा दिल्ली और ऑक्सफ़ोर्ड से प्राप्त की। दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज, दिल्ली में अनेक वर्षों तक सीनियर फ़ेलो एवं निदेशक रहे। प्रसिद्ध राजनीतिक सिद्धान्तकार एवं धर्मनिरपेक्ष सिद्धान्तों के अनुपम व्याख्याकार।
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नरेश गोस्वामी
नरेश गोस्वामी ने धर्म और अनौपचारिक राजनीति के अन्तर्सम्बन्धों पर दिल्ली विश्वविद्यालय से शोध किया है। वे विकासशील. समाज अध्ययन पीड़ (सीएसडीएस) द्वारा प्रकाशित समाज विज्ञानों की पत्रिका प्रतिमान समय समाज संस्कृति में आठ वर्षों तक सहायक सम्पादक रहे हैं। उन्होंने कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का अनुवाद भी किया है।


उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें – राजीव भार्गव

Additional information

Author

Rajeev Bhargva

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-796-3

Pages

83

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

2 reviews for UPNIVESH : SANSKRITIK ANYAYA KO KAISE SAMJHEN by Rajeev Bhargva

  1. madan kumar

    राजीव भार्गव ने सांस्कृतिक अन्याय की जटिल अवधारणाओं को स्पष्ट और तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया है। गंभीर पाठकों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति।

  2. Nisha Diwan

    संस्कृति, न्याय और उपनिवेशवाद के संबंधों पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करने वाली यह पुस्तक जिज्ञासु पाठकों और विद्यार्थियों के लिए समान रूप से उपयोगी है।

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