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SAMVIDHAN KE AADHAR-PURUSH : B.N. RAU by Rajgopal Singh Verma

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संविधान के आधार-पुरुष : बी.एन. राऊ – राजगोपाल सिंह वर्मा

संविधान के उस प्रारूप के रचयिता जिसने लोकतान्त्रिक ढाँचे को दिशा दी


भारतीय संविधान का वह अध्याय, जिसे इतिहास की जटिलता ने विस्मृत कर दिया।
यह पुस्तक उस ‘मौन मनीषी’ की खोज है जिसने भारतीय लोकतन्त्र की बुनियाद में अपनी मेधा का अमृत सींचा था। बेनेगल नरसिंह राऊ – एक ऐसे विधिवेत्ता, चिन्तक और कूटनीतिज्ञ, जिनका नाम भले ही समय की धूल में दब गया हो, पर जिनके विचारों की गूँज आज भी हमारे संविधान के हर अनुच्छेद में सुनाई देती है। उन्होंने वह खाका तैयार किया, जिसने एक नवजात राष्ट्र को उसकी लोकतान्त्रिक दिशा प्रदान की।
लेखक राजगोपाल सिंह वर्मा ने इस पुस्तक में राऊ के जीवन को यानी भारतीय संविधान के अदृश्य शिल्पी के योगदान से सम्बन्धित ऐतिहासिक तथ्यों को नैतिक और दार्शनिक धरातल पर पुनर्परिभाषित किया है। यहाँ डॉ. भीमराव आंबेडकर और बी. एन. राऊ के मध्य होने वाले वैचारिक विमर्श को केन्द्र में रखा गया है। यह वह दुर्लभ संगति है जहाँ एक ने शोषित समाज की ‘पीड़ा’ को आवाज दी, तो दूसरे ने उसे ‘विधिक औचित्य’ प्रदान किया। यही वह संगम है जो भारतीय संविधान का ‘हृदय’ बना।
राऊ का व्यक्तित्व भारत तक सीमित नहीं था। इस पुस्तक के लेखक ने अभिलेखीय साक्ष्यों के माध्यम से उनके अन्तरराष्ट्रीय अवदानों को पहली बार इतने विस्तार से प्रस्तुत किया है।
लेखक राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास, राजनीति और हाशिये के विमर्शों के गहन खोजी हैं। उनके लेखन में शोध की प्रामाणिकता और शिल्प की कोमलता का एक अनूठा सन्तुलन मिलता है। औपनिवेशिक शासन और संविधान निर्माण की पृष्ठभूमि, प्रक्रिया और परिणति पर उनकी गहरी पैठ इस पुस्तक को एक प्रामाणिक दस्तावेज बनाती है।
यह पुस्तक इतिहास बनने की प्रक्रिया का ‘पुनर्पाठ’ और उन अदृश्य मनीषियों को दिया गया एक सम्मान है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर राष्ट्र की नियति लिखी। यह कृति उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो यह समझना चाहते हैं कि भारत का गणराज्य उन मौन तपस्वियों के चिन्तन से भी बना है जिन्होंने सुर्खियों के बजाय सृजन को चुना।


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About The Author

राजगोपाल सिंह वर्मा
इतिहास एवं पत्रकारिता में दखल रखने वाले, राजगोपाल सिंह वर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठित पत्रिका उत्तर प्रदेश के सम्पादक रहे हैं और भारत सरकार के उद्योग व स्वास्थ्य मन्त्रालयों में सम्पादन कार्यों का दीर्घ अनुभव रखते हैं। इतिहास, जनसंघर्ष, महिला नेतृत्व और जीवनी विषयों पर आधारित अब तक उनकी 31 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें बेगम समरू का सच, पहली औरत, 1857 का शंखनाद, किंगमेकर्स, स्वर्णा, सेनापति और लखनऊ जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी कई पुस्तकों का उर्दू, पंजाबी और अँग्रेजी में अनुवाद हुआ है।
उनका कार्य न केवल ऐतिहासिक सन्दर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विमर्श का भी विस्तार है, जिसमें स्वतन्त्रता, समानता और आधुनिक भारत की परिकल्पना स्त्रियों के दृष्टिकोण से केन्द्र में आती है। राजगोपाल सिंह वर्मा को पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान, कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार, प्रेमचन्द सम्मान (2023) और हरिवंश राय ‘बच्चन’ सम्मान (2024) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।


SAMVIDHAN KE AADHAR-PURUSH : B.N. RAU by Rajgopal Singh Verma

Additional information

Author

Rajgopal Singh Verma

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-033-9

Pages

354

Publication date

06-10-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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