Description
Buddhacharita Aur Mahakavi Ashwaghosh By Chandrabhushan
महाकवि अश्वघोष विरचित बुद्धचरित संस्कृत का एक बहुत पुराना काव्य-ग्रन्थ है। कितना पुराना, इसका अन्दाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि चीनी भाषा में इसका अनुवाद अब से 1600 साल पहले, सन् 421 ई. में हो चुका था। रचना को पल भर के लिए एक तरफ रखकर रचयिता पर आएँ तो चीनी भाषा में अश्वघोष की जीवनी भी इसी समय आ गयी थी। सौ साल बाद, छठी सदी ईसवी के प्रारम्भ में भिक्षु-आचार्य हुई च्याओ ने महाग्रन्थ काओसेंग इवान (महान् भिक्षुओं का जीवन) में इसे संकलित किया था। यह ग्रन्थ आज भी सुरक्षित है और दुनिया भर में पढ़ा जाता है।
बुद्धचरित के चीनी अनुवाद का समय वही था जब भारत में गुप्त साम्राज्य अपने शीर्ष पर था। पुराने बौद्ध विद्या संस्थान नालन्दा महाविहार को उसके द्वारा विश्वविद्यालय का रूप दिया जा रहा था और उसकी राज्यभाषा संस्कृत के काव्यसंसार में कवि-कुलगुरु कालिदास की तूती बोल रही थी। अश्वघोष भी शत-प्रतिशत संस्कृत भाषा के ही कवि हैं और उनका समय कुषाणवंशी शासक कनिष्क से जोड़कर कालिदास से ढाई-तीन सौ साल पहले का आँका गया है।
— भूमिका से


























Aarti Kumari –
चंद्रभूषण की किताब ‘बुद्धचरितम्’ का रोचक, गहन और विद्वतापूर्ण पुनर्पाठ है, जो जीवनकथा और सृजनात्मक विवेचना दोनों प्रस्तुत करती है।
Vivek Singh –
यह पुस्तक बौद्ध धर्म के बारे में अद्भुत जानकारियों से भरी है.
dharmendra tripathi –
चंद्रभूषण जी ने फिर एक सार्थक पुस्तक को हम सबको को पढ़ने का अवसर दिया है, बहुत अच्छी पुस्तक लगी।