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Madhu Limaye : Pratirodh ka Paricham (Biography) by Rajgopal Singh Verma

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मधु लिमये

प्रतिरोध का परचम – राजगोपाल सिंह वर्मा


भारतीय राजनीति में ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने सत्ता की दहलीज पर पहुँचकर भी विचारधारा का झण्डा गिरने नहीं दिया ? जिन्होंने अपने सिद्धान्तों के लिए दलों को, संसद को, यहाँ तक कि सहयोगियों को भी चुनौती दी ? जिनकी असहमति, केवल राजनीतिक विरोध नहीं थी-बल्कि लोकतन्त्र की आत्मा को जगाने वाला नैतिक आह्वान थी ?
मधु लिमये ऐसे ही दुर्लभ राजनीतिज्ञों में से एक थे। समाजवादी आन्दोलन के तेजस्वी प्रतिनिधि, लोहिया के अनन्य शिष्य, और संविधान की आत्मा के सजग प्रहरी। यह पुस्तक उनके विचारों, संघर्षों, असहमतियों और राजनीतिक प्रयोगों की एक समर्पित यात्रा है; वह यात्रा जो कभी संसद से शुरू होकर जेल तक पहुँची, और कभी लेखनी से निकलकर सत्ताधारी दलों की नीतियों को चुनौती देती रही।
यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि एक वैचारिक दस्तावेज है जहाँ संघवाद, नागरिक स्वतन्त्रता, विचारधारा की प्रामाणिकता और विपक्ष की भूमिका जैसे प्रश्न फिर से उठते हैं। लेखक ने न केवल हमारे मानस में लिमये की स्मृति को ताजा किया है, बल्कि उन प्रश्नों की ओर भी हमारा ध्यान खींचा है जो आज के लोकतान्त्रिक विमर्श से गायब होते जा रहे हैं।
जब राजनीति छवियों और गठबन्धनों में सीमित हो रही है, यह किताब हमें याद दिलाती है कि राजनीति विचार का धर्म है, और असहमति उसकी पूजा। मधु लिमये की स्मृति, उनकी असहमति और उनके आत्मालोचन आदि सभी इस पुस्तक में ज्यों के त्यों उपस्थित हैं, प्रश्न पूछते हुए, चुनौती देते हुए। एक ऐसी विरासत जो अब भी बोलती है; बस, हम सुनना चाहें।

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Description

Madhu Limaye : Pratirodh ka Paricham (Biography) by Rajgopal Singh Verma


About The Author

राजगोपाल सिंह वर्मा
इतिहास एवं पत्रकारिता में दखल रखने वाले, राजगोपाल सिंह वर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठित पत्रिका उत्तर प्रदेश के सम्पादक रहे हैं और भारत सरकार के उद्योग व स्वास्थ्य मन्त्रालयों में सम्पादन कार्यों का दीर्घ अनुभव रखते हैं। इतिहास, जनसंघर्ष, महिला नेतृत्व और जीवनी विषयों पर आधारित अब तक उनकी 31 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें बेगम समरू का सच, पहली औरत, 1857 का शंखनाद, किंगमेकर्स, स्वर्णा, सेनापति और लखनऊ जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी कई पुस्तकों का अनुवाद उर्दू, पंजाबी और अँग्रेजी में हुआ है। उनका कार्य न केवल ऐतिहासिक सन्दर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विमर्श का भी विस्तार है, जिसमें स्वतन्त्रता, समानता और आधुनिक भारत की परिकल्पना स्त्रियों के दृष्टिकोण से केन्द्र में आती है।
राजगोपाल सिंह वर्मा को पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, बेचन शर्मा ‘ उग्र’ सम्मान, कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार, प्रेमचन्द सम्मान (2023) और हरिवंश राय ‘बच्चन’ सम्मान (2024) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।


Madhu Limaye : Pratirodh ka Paricham by Rajgopal Singh Verma

Additional information

Author

Rajgopal Singh Verma

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-436-8

Pages

280

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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