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TAM KE VIRUDDHA by Rajendra Verma

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तम के विरुद्ध – राजेन्द्र वर्मा

(जनवादी ग़ज़लें)


समकालीन हिन्दी कविता में आज हिन्दी ग़ज़ल की बड़ी धूम है। पत्रिकाओं, पुस्तकों, सोशल मीडिया और सभा-गोष्ठियों की चर्चाओं में ग़ज़ल के लोकप्रिय शेर छाये हुए हैं। हिन्दी ग़ज़ल के इस बहुआयामी प्रवाह की आज तीन धाराएँ स्पष्ट रूप से नज़र आ रही हैं- पहली धारा में शायर परम्परागत उर्दू की रूमानी/रूहानी ग़ज़ल देखा-देखी वही कलाबाज़ियाँ दिखाने में मस्त हैं, जिन्होंने आमजनमानस के जीवन के दुख-दर्द को अपनी ग़ज़लों से पूर्णतः बहिष्कृत कर प्रेम, रोमांस और आध्यात्मिक रूमान जैसे अमूर्त विषयों की रिझाऊ शायरी में खुद को डुबा रखा है। दूसरी धारा के ग़जलकार सामान्य जन के प्रति सहानुभूति तो रखते हैं, पर अपने को सुरक्षित रखकर सत्ता और जनता के बीच लोकप्रिय बने रहकर मात्र इनाम-इकराम की चिन्ता में ही व्यस्त नज़र आते हैं।

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Description

राजेन्द्र वर्मा की ग़ज़लों की भावभूमि परम्परागत ग़ज़लों से नितान्त भिन्न है। इन ग़ज़लों से उन्होंने सत्ता के विद्रूप, अमानवीयता और क्रूरता के मुखौटे को पूरी निर्भीकता के साथ उघाड़ दिया है। इन ग़ज़लों में सियासत के छल-छद्म, दाँव-पेच तथा उसके जनविरोधी चरित्र पर बार-बार चोट की गयी है। ये ग़ज़लें व्यवस्था की विसंगतियों के प्रति अपने आक्रोश और आक्रामकता को जनता के गुस्से और आक्रोश से जोड़कर एक नया तेवर प्रस्तुत करती हैं। राजेन्द्र वर्मा लगातार जनता के दुखों को अपनी ग़ज़लों के मुख्य सरोकार बनाते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इन दुखों के कारणों की तलाश करते हैं। इससे उनका ग़ज़ल लेखन सार्थक और सोद्देश्य लेखन बन जाता है।

About The Author

राजेन्द्र वर्मा
प्रकाशन : आठ ग़ज़ल-संग्रह सहित विभिन्न विधाओं में 40 पुस्तकें प्रकाशित। महत्त्वपूर्ण संकलनों में रचनाएँ सम्मिलित। सम्पादन: हिन्दी ग़ज़ल के हजार शेर, गीत-शती, गीत-गुंजन। साहित्यिक पत्रिका अविरल मंथन (1996-2003)। पुरस्कार-सम्मान आदि : उ.प्र. हिन्दी संस्थान के श्रीनारायण चतुर्वेदी और महावीरप्रसाद द्विवेदी नामित पुरस्कारों सहित देश की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा रचनाकार पर एम.फिल. । अनेक शोधग्रन्थों में सन्दर्भित। चुनी हुई कविताओं का अँग्रेज़ी में अनुवाद। एक निबन्ध स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में सम्मिलित ।


तम के विरुद्ध - राजेन्द्र वर्मा (जनवादी ग़ज़लें)

Additional information

Author

Rajendra Verma

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-80441-78-8

Pages

150

Publication date

03-10-2026

Publisher

Vagdevi Prakashan

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