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DASTAN-E-SONIA by Rasheed Kidwai

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दास्तान-ए-सोनिया गांधी – रशीद क़िदवाई

सम्पादक जयजीत अकलेचा


काँग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बारे में ठीक से जानने-समझने के लिए यह जीवनी एक अनिवार्य पुस्तक है। सोनिया गांधी उन शिखर शख्सियतों में शामिल हैं जिन्होंने भारत की राजनीति पर लम्बे समय तक, और गहराई से, असर डाला है। उन्होंने अपने पति, प्रधानमन्त्री रह चुके राजीव गांधी की शहादत देखी। पति की हत्या के बाद उन्होंने न सिर्फ स्वयं को सँभाला, परिवार को भी सम्बल दिया, और जब काँग्रेस टूटती-बिखरती नजर आयी तो उसे भी फिर से खड़ा किया। काँग्रेस के लम्बे इतिहास में वह सबसे ज्यादा समय तक पार्टी अध्यक्ष रहीं। इस दौरान पार्टी ने आशा-निराशा, सफलता-विफलता, दोनों का स्वाद चखा। लेकिन 2004 के चुनावों में जब काँग्रेस के नेतृत्व वाले गठबन्धन यानी यूपीए को अप्रत्याशित सफलता मिली और उसे केन्द्र में सरकार बनाने का मौका मिला, तो सहज ही प्रधानमन्त्री बन सकने की सम्भावना के बावजूद उन्होंने मनमोहन सिंह की ताजपोशी करवायी। यह उनका एक महान् त्याग था जिसके लिए वह हमेशा याद की जाएँगी। 2009 के लोकसभा चुनावों में भी उनकी देखरेख में काँग्रेस व यूपीए ने सफलता पायी और सत्ता में वापसी की। यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) और सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) जैसे लोक-कल्याण तथा लोक-सशक्तीकरण के असाधारण कदम उठाये गये, तो इसके पीछे राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् की पहल थी, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं। यूपीए के दस साल के दौर में ही भारत की अर्थव्यवस्था ने सर्वाधिक वृद्धि दर दर्ज की। पद-लिप्सा के दौर में सोनिया गांधी ने एक बार और त्याग की मिसाल पेश की, जब ‘लाभ का पद’ (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का विवाद उठने पर उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ा। अपने त्याग की बदौलत ही उन्होंने विदेशी मूल के विवाद को निर्मूल किया था; अन्यथा उन्हें जानने वाले जानते हैं कि नेहरू-गांधी परिवार की बहू बनने के बाद वह किस कदर भारत की संस्कृति में रच-पच गयीं। ‘फोर्ब्स’ की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में कई बार स्थान पा चुकीं सोनिया गांधी यों तो सार्वजनिक जीवन में अब भी हैं, पर उम्र और सेहत का खयाल कर, पहले जितनी सक्रिय नहीं हैं। उनकी जगह काँग्रेस का नेतृत्व प्रियंका गांधी और राहुल गांधी कर रहे हैं। लेकिन बड़े मसलों पर देश को अपनी चिन्ता से अवगत कराना और आगाह करना उन्होंने जारी रखा है। निश्चय ही एक ऐसी किताब की जरूरत थी जिससे उनके जीवन, व्यक्तित्व और विचारों के बारे में हम अधिक जान सकें। रशीद क़िदवाई द्वारा लिखी यह जीवनी इसी आवश्यकता की पूर्ति करती है। इसके अलावा, यह पढ़ने में रुचिकर भी है। किदवाई ने सोनिया गांधी को करीब से देखा-जाना है और निजी व सार्वजनिक, ज्ञात-अल्पज्ञात सभी प्रसंगों को समेटते हुए उन्होंने इस जीवनी को रसप्रद ढंग से लिखा है।


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Description

DASTAN-E-SONIA by Rasheed Kidwai


About The Author

रशीद क़िदवाई पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक हैं। वे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन (ओआरएफ) में विजिटिंग फेलो हैं। ‘द टेलीग्राफ़’ के पूर्व एसोसिएट एडिटर क़िदवाई सरकार, राजनीति, सामुदायिक मामलों और हिन्दी सिनेमा पर पैनी नज़र रखते हैं तथा इन विषयों पर किताबें लिख चुके हैं। वे न्यूज़ 18, एबीपी न्यूज़, एनडीटीवी और इण्डिया टुडे टीवी सहित कई मीडिया संस्थानों के लिए राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर भी योगदान देते हैं।


DASTAN-E-SONIA by Rasheed Kidwai


 

Additional information

Author

Rasheed Kidwai

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-657-7

Pages

258

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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