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MARXWAD : Mera Sangharsh Path by Ganesh Shankar Vidyarthi

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मार्क्सवाद : मेरा संघर्ष पथ – गणेश शंकर विद्यार्थी

सम्पादक:मृणालिनी


1948 में बिहार में हुई काँग्रेस में विश्वनाथ माथुर और बीटीआर ने मेरे बारे में कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जमींदार का बेटा है।
उसे स्टेट कमेटी में रखने पर अवाम पर खराब असर पड़ेगा। इसलिए उसे स्टेट कमेटी में नहीं रखा जाएगा।
यह कोई पहली घटना नहीं थी। जब किसी पद पर चुनाव की बात आती तो यह यक्ष प्रश्न उठता। सुनकर तकलीफ तो होती थी, लेकिन मैं चुपचाप बर्दाश्त करता था। कम्युनिस्ट पार्टी में आते समय किसी पद के लिए शपथ नहीं लिया था। पद तो पार्टी तय करती है। पार्टी ने किसी पद के योग्य नहीं समझा, इसलिए पद नहीं दिया। लेकिन मैं ईमानदारी से काम करता रहा।
मैं द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का अध्ययन कर चुका था। सारे कॉमरेड्स जिस समाज से आए थे, उस समाज की कुरीतियाँ भी लेकर आए होंगे। इस बात को मैं समझता था। इसलिए मुझे उन व्यक्तियों पर गुस्सा नहीं आता था। उनकी कमियों को समझकर मैं चुप रहता था।
– इसी पुस्तक से

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Description

MARXWAD : Mera Sangharsh Path by Ganesh Shankar Vidyarthi


आत्मकथाएं लिखी जाती हैं। उन कथाओं को पढ़कर या आचरण करके कोई व्यक्ति महान नहीं बना है। हर युग पुरुष अपना रास्ता स्वयं बनाता है। परिस्थितियां और हालात उसे रास्ता बनाने में मदद करते हैं।
आत्मकथा है क्या ? इतिहास ही न ! अंतर सिर्फ इतना है कि इतिहास में सार्वजनिकता में व्यक्ति का मूल्यांकन होता है। आत्मकथा में व्यक्ति के बहाने इतिहास का मूल्यांकन किया जाता है।
भारत में इतिहास लिखने की परम्परा थी ही नहीं। रचनाकार आत्मकथा लिखने से बचते थे। इसलिए भारत के बड़े-बड़े रचनाकारों के सम्बन्ध में पता ही नहीं चलता है कि उनका आत्म परिचय या पारिवारिक परिचय क्या था। ये रचनाकारों की अपनी रचना के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा थी।
– लेखक –


कॉमरेड गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 1 सितम्बर 1924 को बिहार के नवादा जिला स्थित रजौली में हुआ था। वे स्कूल जीवन से ही स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल हो गये थे। नवादा के गांधी स्कूल में तिरंगा फहराने पर स्कूल से निष्कासित हुए। इसके बाद पटना के राममोहन राय सेमिनरी उच्च विद्यालय में दाखिला लिया, पर स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने के कारण वहाँ भी निलम्बन का सामना करना पड़ा।
पटना विश्वविद्यालय से स्नातक और लॉ की पढ़ाई के दौरान कद्दावर छात्र नेता के रूप में पहचान बनी। 1942 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उसी वर्ष भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान पहली बार बन्दी बनाये गये। आजादी के बाद भी विभिन्न जनआन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण कई बार जेल गये।
1964 में कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के संस्थापक सदस्य रहे। बाद में पार्टी के बिहार राज्य सचिव एवं सेंट्रल कमेटी के सदस्य के रूप में लम्बे समय तक कार्यरत रहे।
चुनाव मैदान में भी उतरे मगर 1952 से ही चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। हार का सिलसिला 1977 में जाकर टूटा। कालान्तर में विधान परिषद के भी सदस्य रहे।
11 जनवरी 2021 को 97 वर्ष की आयु में कोरोना महामारी से मृत्यु हो गयी।


मार्क्सवाद : मेरा संघर्ष पथ - गणेश शंकर विद्यार्थी

Additional information

Author

Ganesh Shankar Vidyarthi

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-022-3

Publication date

29-08-2026

Pages

338

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