Matibhram By Raju Sharma

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“‘मतिभ्रम’ एक ऐसा उपन्यास है, जिसे राजू शर्मा ने अपने रचनात्मक धीरज से सम्भव बनाया है। यह रचनात्मक धीरज भी इकहरा नहीं है, इसकी बहुस्तरीयता का आधार जीवन से गहरी आसक्ति और गम्भीर राजनीतिक समझ है। जीवन से आसक्ति और गहरी राजनीतिक समझ से निर्मित संवेदनात्मक संरचनाएँ घटनाओं को उन क्षितिजों तक पहुँचाती हैं, जहाँ तक अमूमन कथा विन्यास में उनका विन्यस्त हो पाना दुरूह होता है…”

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Matibhram By Raju Sharma

About the Author:

राजू शर्मा:- जन्म : 1959। शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर। लोक प्रशासन में पी-एच.डी.। 1982 से 2010 तक आईएएस सेवा में रहे। उसके बाद से स्वतंत्र लेखन, मुसाफ़रत और यदा-कदा की सलाहनवीसी। लेखन के अलावा रंगकर्म, फ़िल्म व फ़िल्म स्क्रिप्ट लेखन में विशेष रुचि। प्रकाशन : हलफनामे, विसर्जन, पीर नवाज़, क़त्ल गैर इरादतन (उपन्यास); व्यभिचारी, नोटिस २ (उपन्यासिका); शब्दों का खाकरोब, समय के शरणार्थी, नहर में बहती लाशें (कहानी-संग्रह); भुवनपति, मध्यमवर्ग का आत्मनिवेदन या गुब्बारों की रूहानी उड़ान, जंगलवश (नाटक)। कायान्तरण (अनूदित उपन्यास) । अनेक नाटकों का अनुवाद व रूपांतरण – पिता (ऑगस्त स्ट्रिनबर्ग)।

SKU: matibhram-paperback
Category:
Tags:, , , ,
ISBN

9788119899470

Author

Raju Sharma

Binding

Paperback

Pages

456

Language

Hindi

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Publication date

01-01-2024

Customer Reviews

1-5 of 2 reviews

  • Leena kumari

    एकदम से अलग सोच और कथा को बहुत ही सूंदर उपन्यास का रूप दिया है
    मतिभ्रम शब्द ही बेजोड़ फिट हुआ इसमें .

    January 30, 2024
  • Ashish Bhutani

    इस पुस्तक में सौंदर्य और गहराई है।

    February 8, 2024

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