Description
SARO-SAMAN by Akhtarul Iman
अख्तरुल ईमान
जन्म : 12 नवम्बर 1915, बिजनौर के एक गाँव में-मृत्यु 9 मार्च 1996, मुम्बई (तब बम्बई) । विभिन्न स्थानों पर आरम्भिक शिक्षा पूरी करने की कोशिश की जो सम्भव नहीं हो सकी। 15 वर्ष की आयु में फ़तहपुरी स्कूल दिल्ली-6 में दाखिला लिया। बाद में दिल्ली कॉलेज (आज का जाक्रिर हुसैन देहली कॉलेज) से बी.ए. करके अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय चले गये, मगर एम.ए. पूरा करते-करते इंस्टीट्यूशनल शिक्षा से ही उखड़ गये और 1945 में फ़िल्मों में संवाद और पटकथा लिखने पुणे चले गये।
अख्तरुल ईमान को नयी उर्दू शायरी (जदीद नहीं) के तीन संस्थापकों नून मीम राशिद और मीराजी की तिकड़ी का महत्त्वपूर्ण सदस्य माना जाता है।
उनकी कविता में दार्शनिक गहराई, मानवतावाद और यथार्थवाद का अनूठा मिश्रण है। उनकी प्रारम्भिक साहित्यिक कृतियाँ गिर्दाब (1943), आबजू (1944) और तारीख सय्यारा (1946) के रूप में प्रकाशित हुईं। उनकी कुछ अन्य पुस्तकों में बिंत-ए-लम्हात (1969), नया आहंग (1977), सरो-सामाँ (1982) और जमीन जमीन (1983) शामिल हैं। उनका सम्पूर्ण काव्य कुल्लियात-ए-अख्तर-उल-ईमान नाम से 2000 में प्रकाशित हुआ था। अब (2025) इसका संशोधित एवं नागरी परिवर्धित संस्करण सेतु प्रकाशन से प्रकाशित । उनकी किताब यादें के लिए उन्हें 1962 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
फ़िल्मिस्तान स्टूडियो में एक संवाद लेखक के रूप में ईमान की पहली फ़िल्म नजम नक़वी की ‘पराई आग’ (1948) थी, जिसके बाद ‘बिखरे मोती’ (1951), ‘रंगीली’ (1952), ‘कश्ती’ (1954), ‘रफ़्तार’ (1955), ‘मुजरिम’ (1958), ‘क़ैदी नम्बर 911’ (1958), ‘बारूद’ (1960), ‘कल्पना’ (1960) आयी।
अख़्तरुल ईमान ने ‘क़ानून’ (1961) से ‘जमीर’ (1974) तक 13 साल बी. आर. चोपड़ा की 9 फ़िल्मों और यश चोपड़ा की 3 फ़िल्मों के लिए डायलॉग और स्क्रीनप्ले लिखे। इसके अलावा भी बहुत सी फ़िल्में लिखीं। वह अपने जमाने के सबसे महँगे लिखने वाले थे और एक फ़िल्म के लिए उस समय पचास हजार रुपये लेते थे जबकि उस समय बांद्रा के इलाके में सबसे महँगा फ्लैट तीस से चालीस हजार में आ जाता था। इसके अलावा कुछ फ़िल्मों के लिए गीत भी दिये। उन्हें सर्वोत्तम संवाद लेखक का फ़िल्मफेयर अवार्ड ‘वक्त’ एवं ‘धर्मपुत्र’ के लिए दो बार प्रदान किया गया।
अतहर फ़ारूक़ी
जन्म : 18 जनवरी 1964, सिकन्दराबाद, जिला बुलन्दशहर (पश्चिमी उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : पी-एच.डी. (जेएनयू)।
सम्प्रति : उर्दू की प्रतिष्ठित संस्था, अंजुमन तरक्की उर्दू, हिन्द, (स्थापित 1882) के जनरल सेक्रेटरी। उर्दू, हिन्दी और अँग्रेजी में लेखन; लगभग एक दर्जन पुस्तकें और असंख्य लेख।




























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