Description
1842 : Bundelkhand Ki Asmita Ka Sangharsh by Rajgopal Singh Verma
About The Author
राजगोपाल सिंह वर्मा
इतिहास एवं पत्रकारिता में शिक्षित लेखक उ.प्र. सरकार की पत्रिका ‘उत्तर प्रदेश’ के सम्पादक रहे हैं और भारत सरकार के उद्योग व स्वास्थ्य मन्त्रालयों में सम्पादन कार्यों का दीर्घ अनुभव रखते हैं। इतिहास, जनसंघर्ष, महिला नेतृत्व और जीवनी विषयों पर आधारित अब तक उनकी 36 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें बेगम समरू का सच, पहली औरत, 1857 का शंखनाद, किंगमेकर्स, स्वर्णा, सेनापति और लखनऊ: 1857 की गाथा, सुभाष एमिली अधूरे प्रेम की पूरी कहानी, मणिबेन पटेल और मृदुला साराभाई जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी कई पुस्तकों का उर्दू, पंजाबी और अँग्रेजी में अनुवाद हुआ है।
इतिहास की अन्तर्ध्वनियों को समकालीन चेतना से जोड़ते उनके लेखन की विशेषता है कि वह दस्तावेजी गहराई, शैलीगत सन्तुलन और भावनात्मक संयम को एकसाथ बिना किसी विशिष्ट दृष्टि, और निष्पक्षता से साधते हैं। उनका कार्य न केवल ऐतिहासिक सन्दर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि उस सांस्कृतिक विमर्श का भी विस्तार है, जिसमें स्वतन्त्रता, समानता और आधुनिक भारत की परिकल्पना स्त्रियों के दृष्टिकोण से केन्द्र में आती है। उन्हें कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार (2018), पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान (2021), बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान (2023), प्रेमचन्द सम्मान (2024), हरिवंश राय ‘बच्चन’ सम्मान (2024), महादेवी वर्मा सम्मान (2026), और लीलाधर शर्मा ‘ पर्वतीय’ सम्मान (2026) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।

























Reviews
There are no reviews yet.