JAATON KA RAJNEETIK EVAM SANSKRITIK ITIHAS by Dr. Ajay Agnihotri
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जाटों का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास (गोहद, धौलपुर, भरतपुर) – डॉ. अजय अग्निहोत्री
डॉ. अजय अग्निहोत्री इतिहास के अध्येता और शोधकर्ता हैं जिनकी पहचान भारतीय सामाजिक इतिहास और क्षेत्रीय सत्ता-संरचनाओं के गहन विश्लेषक के रूप में स्थापित है। उन्होंने अपने दीर्घ शोधकाल में ग्वालियर, भरतपुर और धौलपुर की ऐतिहासिक रियासतों पर विस्तृत अध्ययन किया है। उनका लेखन तथ्यों की दृढ़ता, सन्दर्भों की सटीकता और ऐतिहासिक दृष्टि की स्पष्टता के लिए विशेष रूप से सराहा गया है।
यह ग्रन्थ जाट समुदाय के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास की एक गम्भीर, साक्ष्य-आधारित और दीर्घकालीन पड़ताल है- जो 1505 ई. से लेकर 1947 तक के विस्तृत कालखण्ड को समेटे हुए है। डॉ. अजय अग्निहोत्री ने इस अध्ययन में न केवल जाट शासकों और योद्धाओं की गौरवगाथा प्रस्तुत की है, बल्कि उनके समाज, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, लोकरीति, और सत्ता-संरचना के जटिल सम्बन्धों का भी वैज्ञानिक विश्लेषण किया है।
इस पुस्तक में भरतपुर, डीग, गोहद आदि क्षेत्रों की जाट रियासतों के उत्थान, संघर्ष और पतन का क्रमिक ऐतिहासिक विवरण है। साथ ही, यह ग्रन्थ मुगल और अँग्रेज कालीन राजनीति के साथ जाट समाज की भूमिका का तुलनात्मक विवेचन करता है जिससे यह इतिहास केवल ‘वंशावली’ नहीं, बल्कि ‘सामाजिक पुनर्निर्माण’ का दस्तावेज बन जाता है।
यह तीसरा, संशोधित संस्करण अब तक के सभी संस्करणों से अधिक प्रामाणिक और परिष्कृत है- जिसमें नवीन शोध, अभिलेखीय साक्ष्य और पुरातात्त्विक निष्कर्ष सम्मिलित हैं।
यह ग्रन्थ न केवल इतिहासकारों और शोधार्थियों के लिए, बल्कि भारतीय समाज की जड़ों को समझने के इच्छुक हर पाठक के लिए अनिवार्य अध्ययन सामग्री है।
इस ग्रन्थ में प्रस्तुत सामग्री केवल इतिहास की घटनाएँ नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृतियों का पुनर्पाठ है। डॉ. अग्निहोत्री ने यह स्पष्ट किया है कि जाट समुदाय का इतिहास केवल युद्ध और शासन का इतिहास नहीं, बल्कि किसान समाज की चेतना, स्वराज की आकांक्षा और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता की कथा भी है।
प्रत्येक अध्याय में अभिलेखीय साक्ष्य, स्थानीय किंवदन्तियाँ, और समकालीन दस्तावेजों का समावेश इस पुस्तक को एक विशिष्ट शोधग्रन्थ का रूप देता है। भाषा अकादमिक होते हुए भी प्रवाहपूर्ण है, जिससे यह पुस्तक शोधार्थियों के साथ-साथ सामान्य पाठकों के लिए भी सुलभ बन जाती है।
– राजगोपाल सिंह वर्मा
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Description
JAATON KA RAJNEETIK EVAM SANSKRITIK ITIHAS (Gohad, Dholpur, Bharatpur) by Dr. Ajay Agnihotri
About The Author
डॉ. अजय अग्निहोत्री
शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी. (इतिहास) सन् 1983 ई. जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर।
प्रकाशित कृतियाँ
1. गोहद के जाटों का इतिहास (सन् 1986)
2. जाटों का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास: गोहद, धौलपुर, भरतपुर (सन् 2001)
3. हमारा ग्वालियर (सन् 2008)
4. हमारा ग्वालियर का अँग्रेजी में अनूदित संस्करण (Gwalior : Art, History and Culture, 2010)
5. श्रीमंत राजमाता बायजाबाई शिंदे

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