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Jeevan Gatha : Maharaja Surajmal by Rajgopal Singh Verma

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जीवन गाथा महाराजा सूरजमल – राजगोपाल सिंह वर्मा


जिस नायक ने अठारहवीं शताब्दी में उत्तर भारत के राजनीतिक और सामाजिक क्षितिज पर एक नयी शक्ति-सम्भावना को स्वर दिया, जो उस समय की साम्प्रदायिक उथल-पुथल में समरसता, शासन की अराजकता में न्याय और राजनीतिक अस्थिरता में नीति का पक्षधर था, उसे इतिहास की मुख्यधारा में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसका वह हकदार था।
यह केवल व्यक्तिगत उपेक्षा नहीं थी; यह एक पूरे सामाजिक विमर्श की उपेक्षा थी, ब्रज के उस अंचल की, जिसकी मिट्टी में संघर्ष की सौंध है; उन जाट परम्पराओं की, जो खेतों से किले तक और ग्राम पंचायत से कूटनीतिक दरबार तक फैली हुई थीं। क्या इतिहास केवल वही है जो मुगल दरबारों में दर्ज हुआ या वह भी है जो थून की मिट्टी में गड़ा रहा ?
यह पुस्तक उस प्रश्न का उत्तर खोजने की एक ईमानदार कोशिश है। यह प्रयास कोई अकादमिक शोध-ग्रन्थ मात्र नहीं है, न ही यह जीवनी मात्र है। यह एक ऐसे नायक की पुनरावृत्ति है, जो एक राज्य का निर्माता था और एक विचारधारा का वाहक भी था।
– प्रस्तावना से


 

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Description

Jeevan Gatha : Maharaja Surajmal by Rajgopal Singh Verma


About The Author

राजगोपाल सिंह वर्मा
इतिहास एवं पत्रकारिता में दखल रखने वाले, राजगोपाल सिंह वर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठित पत्रिका उत्तर प्रदेश के सम्पादक रहे हैं और भारत सरकार के उद्योग व स्वास्थ्य मन्त्रालयों में सम्पादन कार्यों का दीर्घ अनुभव रखते हैं। इतिहास, जनसंघर्ष, महिला नेतृत्व और जीवनी विषयों पर आधारित अब तक उनकी 31 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें बेगम समरू का सच, पहली औरत, 1857 का शंखनाद, किंगमेकर्स, स्वर्णा, सेनापति और लखनऊ जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी कई पुस्तकों का अनुवाद उर्दू, पंजाबी और अँग्रेजी में हुआ है।
उनका कार्य न केवल ऐतिहासिक सन्दर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विमर्श का भी विस्तार है, जिसमें स्वतन्त्रता, समानता और आधुनिक भारत की परिकल्पना स्त्रियों के दृष्टिकोण से केन्द्र में आती है।
राजगोपाल सिंह वर्मा को पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान, कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार, प्रेमचन्द सम्मान (2023) और हरिवंश राय ‘बच्चन’ सम्मान (2024) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।


maharaja surajmal

Additional information

Author

Rajgopal Singh Verma

Binding

Paperback

ISBN

978-93-6201-485-6

Language

Hindi

Pages

252

Publication date

10-01-2026

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