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Jeevan Gatha : Maharaja Surajmal by Rajgopal Singh Verma
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राजगोपाल सिंह वर्मा
इतिहास एवं पत्रकारिता में दखल रखने वाले, राजगोपाल सिंह वर्मा, उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठित पत्रिका उत्तर प्रदेश के सम्पादक रहे हैं और भारत सरकार के उद्योग व स्वास्थ्य मन्त्रालयों में सम्पादन कार्यों का दीर्घ अनुभव रखते हैं। इतिहास, जनसंघर्ष, महिला नेतृत्व और जीवनी विषयों पर आधारित अब तक उनकी 31 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें बेगम समरू का सच, पहली औरत, 1857 का शंखनाद, किंगमेकर्स, स्वर्णा, सेनापति और लखनऊ जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं। उनकी कई पुस्तकों का अनुवाद उर्दू, पंजाबी और अँग्रेजी में हुआ है।
उनका कार्य न केवल ऐतिहासिक सन्दर्भों का पुनर्पाठ है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विमर्श का भी विस्तार है, जिसमें स्वतन्त्रता, समानता और आधुनिक भारत की परिकल्पना स्त्रियों के दृष्टिकोण से केन्द्र में आती है।
राजगोपाल सिंह वर्मा को पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान, कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार, प्रेमचन्द सम्मान (2023) और हरिवंश राय ‘बच्चन’ सम्मान (2024) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।






























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