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Auopaniveshik Bharat Ki Jununi Mahilayen By Rajgopal Singh Verma
औपनिवेशिक भारत की जुनूनी महिलाएँ:-
About the Author
राजगोपाल सिंह वर्मा
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में जन्म और प्रारम्भिक शिक्षा। पत्रकारिता तथा इतिहास की पृष्ठभूमि। नयी दिल्ली, लखनऊ और आगरा में केन्द्र और प्रदेश सरकार के विभागों में कार्य निष्पादन का अनुभव।
उपन्यास, जीवनी, कहानी, और ऐतिहासिक विधाओं में लेखन। प्रमुख पुस्तकें बेगम समरू का सच, दुर्गावती गढ़ा की पराक्रमी रानी, जॉर्ज थॉमस : हाँसी का राजा, पहली औरत राना लियाकत बेगम (जीवनी), 1857 का शंखनाद : उत्तर दोआब के लोक का संघर्ष (उपन्यास), चिनहट 1857 संघर्ष की गौरव गाथा (इतिहास), किंगमेकर्स मुगल बादशाहों पर भारी दो सैयद भाइयों की गाथा, अर्थशास्त्र नहीं है प्रेम, तारे में बसी जान (कहानी संग्रह), जाने वो कैसे लोग थे 1857 के क्रान्तिकारी (उत्तर प्रदेश के अल्पचर्चित क्रान्तिवीरों की प्रेरणादायक कहानियाँ) तथा The Lady of Two Nations: Life and Times of Ranna Begum (Biography) 1
‘बेगम समरू का सच’ पर उ.प्र. कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा ‘पं महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान’ और ‘दुर्गावती : गढ़ा की पराक्रमी रानी’ पर उ.प्र. हिन्दी संस्थान का’ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान’। ‘ कथाबिम्ब’ पत्रिका द्वारा’ कमलेश्वर स्मृति कथा सम्मान-2019′ से पुरस्कृत। उ.प्र. सरकार की साहित्यिक पत्रिका’ उत्तर प्रदेश’ का पाँच वर्ष तक सम्पादन। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय और लघु उद्योग मन्त्रालय की पत्रिकाओं के सम्पादकीय दायित्व का भी निर्वहन। शौकिया फोटोग्राफी, ब्लॉगिंग, रेडियो वार्ताओं का भी प्रसारण।
























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