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Auopaniveshik Bharat Ki Jununi Mahilayen By Rajgopal Singh Verma

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औपनिवेशिक भारत की जुनूनी महिलाएँ:-

देश के हज़ारों वर्षों के गौरवशाली इतिहास के बाद भी यदि स्त्रियों के लिए तमाम क्षेत्रों में दख़ल, योगदान या रुचि लेना निषिद्ध, वर्जित और प्रतिबन्धित है, तो यह पीढ़ी दर पीढ़ी और वंशानुगत चलते षड्यन्त्रकारी पूर्वाग्रहों के अलावा और क्या है ? अपवादस्वरूप जो स्त्रियाँ पुरुषों के साथ खड़ी दिखाई देती हैं, वे इस परम्परा का इतना सूक्ष्म अंश हैं कि हम उन्हें नगण्य कह सकते हैं। यद्यपि स्त्री-पुरुष दोनों ही सृष्टि के महत्त्वपूर्ण घटक हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं, तथापि स्त्रियों को हमेशा निचले पायदान पर रखा गया। स्त्री मानव की कोमलतम भावनाओं की संरक्षक और संवर्धक है। स्त्रियों के बिना घरों का संचालन भी दूभर हो जाएगा। स्त्री के बिना इस सम्पूर्ण ग्रह पर रहने और बेहतर जीवन बिताने की कल्पना भी नहीं की जा सकती । दुखद यह भी था कि विदेशी शासकों के काल में भी भारतीय उच्चवर्ग यह समझने को तैयार नहीं था कि इस कठिन दौर में महिलाओं को साथ लेकर चलना, उन्हें राष्ट्रप्रेम और जीवन की मुख्यधारा में सम्मिलित करना समय की माँग थी। सदियों पुराने, दकियानूसी, अतार्किक परम्पराओं, टोटकों और सड़ी-गली मान्यताओं को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक कर एक नवसमाज की संरचना का समय था वह । लेकिन भारतीय समाज इसके लिए तत्पर न था।


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Description

Auopaniveshik Bharat Ki Jununi Mahilayen By Rajgopal Singh Verma

औपनिवेशिक भारत की जुनूनी महिलाएँ:-


About the Author


राजगोपाल सिंह वर्मा

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में जन्म और प्रारम्भिक शिक्षा। पत्रकारिता तथा इतिहास की पृष्ठभूमि। नयी दिल्ली, लखनऊ और आगरा में केन्द्र और प्रदेश सरकार के विभागों में कार्य निष्पादन का अनुभव।
उपन्यास, जीवनी, कहानी, और ऐतिहासिक विधाओं में लेखन। प्रमुख पुस्तकें बेगम समरू का सच, दुर्गावती गढ़ा की पराक्रमी रानी, जॉर्ज थॉमस : हाँसी का राजा, पहली औरत राना लियाकत बेगम (जीवनी), 1857 का शंखनाद : उत्तर दोआब के लोक का संघर्ष (उपन्यास), चिनहट 1857 संघर्ष की गौरव गाथा (इतिहास), किंगमेकर्स मुगल बादशाहों पर भारी दो सैयद भाइयों की गाथा, अर्थशास्त्र नहीं है प्रेम, तारे में बसी जान (कहानी संग्रह), जाने वो कैसे लोग थे 1857 के क्रान्तिकारी (उत्तर प्रदेश के अल्पचर्चित क्रान्तिवीरों की प्रेरणादायक कहानियाँ) तथा The Lady of Two Nations: Life and Times of Ranna Begum (Biography) 1
‘बेगम समरू का सच’ पर उ.प्र. कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा ‘पं महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान’ और ‘दुर्गावती : गढ़ा की पराक्रमी रानी’ पर उ.प्र. हिन्दी संस्थान का’ पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान’। ‘ कथाबिम्ब’ पत्रिका द्वारा’ कमलेश्वर स्मृति कथा सम्मान-2019′ से पुरस्कृत। उ.प्र. सरकार की साहित्यिक पत्रिका’ उत्तर प्रदेश’ का पाँच वर्ष तक सम्पादन। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय और लघु उद्योग मन्त्रालय की पत्रिकाओं के सम्पादकीय दायित्व का भी निर्वहन। शौकिया फोटोग्राफी, ब्लॉगिंग, रेडियो वार्ताओं का भी प्रसारण।

Additional information

ISBN

9788119127290

Author

Rajgopal Singh Verma

Binding

Paperback

Pages

280

Publication date

27 September 2023

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Language

Hindi

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