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TARA (Novel) by Sanjeev Buxy

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तारा (उपन्यास) – संजीव बख्शी


‘तारा’ विधागत ढर्रे से काफी अलग ढंग का उपन्यास है। इसका यह अलगपन कथा की बनावट और बुनावट में ही नहीं, आस्वाद में भी महसूस किया जा सकता है। कथाभूमि बस्तर की है, पर यह उपन्यास न तो प्रस्तुत क्षेत्र के आदिवासी जन-जीवन का कोई विस्तृत वर्णन-वितान खड़ा करता है न आदिवासी समुदाय के शोषण और दमन तथा किसी तरह की हिंसा-प्रतिहिंसा का सिलसिला पेश करता है। इस तरह के ढेर सारे ब्योरों और प्रसंगों को गूँथकर यथार्थ का एक बृहत् खाका पेश करने के बजाय ‘तारा’ के लेखक संजीव बख्शी का ध्यान एक सन्देश को सम्प्रेषित करने पर केन्द्रित रहा है और इस प्रयोजन की खातिर उन्होंने एक ऐसी कथा-रचना की है जिसे उपन्यास भी कह सकते हैं और गल्प भी। कथा का केन्द्रीय पात्र मिठाई नामक एक आदिवासी किशोर है जिसे यह अनूठी अनुभूति होती है कि जंगल में जाकर, अकेले में पुकारने पर, तारा जमीन पर आ जाता है और उसके प्रकाश से वह आप्लावित हो उठता है। इस अनुभूति को वह पेण्टिंग्स में उतारता है और इस तरह बनायी हुई उसकी पेण्टिंग्स, जो भी देखता है, अभिभूत हो उठता है। दरअसल तारे का जमीन पर उतरना एक प्रतीक है जिसके जरिये लेखक ने यह कहना चाहा है कि सरलता और निश्छलता ही चेतना की उच्चतर अवस्था है ऐसी अवस्था में ही ब्रह्माण्ड से संवाद सम्भव है। गाँव में अपनी लोकप्रियता की बदौलत मिठाई सरकार की तरफ से मिलने वाले मुफ्त राशन का बहिष्कार करा देता है, इस तर्क पर कि हमें मुफ्त की नहीं, मेहनत की रोटी खानी चाहिए। वह जंगल में डबरे बनाता है और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करता है ताकि वर्षाजल का संरक्षण किया जा सके। चित्त की सरलता और निर्मलता, शरीर श्रम तथा पर्यावरण सुधार के संदेश को वहन करती यह कथा अपने कथ्य में जितनी प्रासंगिक है, पढ़ने में उतनी ही रुचिकर भी।


 

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Description

TARA (Hindi Novel) by Sanjeev Buxy


संजीव बख्शी
जन्म : 25 दिसम्बर 1952, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़)।
शिक्षा: एम.एस.सी. गणित।
छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त सचिव पद से सेवानिवृत्त। कृतियाँ: तार को आ गई हल्की सी हँसी, भित्ति पर बैठे लोग, जो तितलियों के पास है, सफेद से कुछ ही दूरी पर पीला रहता था, चुनी हुई कविताएँ, मौहा झाड़ को लाईफ ट्री कहते हैं जयदेव बघेल और उनके अंधकार में उजास है (सभी कविता संग्रह); भूलन कांदा, खैरागढ़ नांदगांव, ढाल चंद हाजिर हो, गाँव खेड़ा मौहाभाठा (सभी उपन्यास) भूलन कांदा उपन्यास का अँग्रेजी, पंजाबी, कन्नड़, मराठी, ओड़िया, छत्तीसगढ़ी में अनुवाद। खसरा नंबर चौरासी बटा एक रकबा पांच डिसमिल (कहानी संग्रह) खैरागढ़; खैरागढ़ में कट चाय और डबल पान; केशव कहि ज जाइ का कहिये (संस्मरण)। सम्मान: सूत्र सम्मान के अलावा ‘सफेद से कुछ ही दूरी पर पीला रहता था’ कविता संग्रह के लिए हेमचंद्राचार्य अलंकरण, ‘भूलन कांदा’ उपन्यास के लिए प्रेमचंद सम्मान। इसी उपन्यास पर एक फीचर फिल्म का निर्माण, भूलन द मेज, जिसे वर्ष 2019 का नेशनल एवार्ड बेस्ट फिल्म आंचलिक केटेगरी में दिया गया।


Tara-Novel

Additional information

Author

Sanjeev Buxy

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-442-9

Pages

110

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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