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TARANGO KA TAIRAK AUR TEEN TILANGE (Novel) by Surya Nath Singh

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तरंगों का तैराक और तीन तिलंगे (उपन्यास) – सूर्यनाथ सिंह


पिछले कुछ वर्षों में मनुष्य विरोधी गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। नैतिक मूल्यों का ह्रास इस कदर हुआ है कि हर तरह की आपराधिक वृत्तियाँ सहज स्वीकार का स्तर छूने को हैं। राजनीतिक व्यवस्थाएँ आम जन की चिन्ता लगभग भुला चुकी हैं। पूँजीवाद ने एक नयी शक्ल अख्तियार कर शोषण के नये औजार विकसित कर लिये हैं। सत्ता और पूँजी का गठजोड़ अभेद्य हो चुका है। सत्ता के लिए सारे संवैधानिक संकल्प और मूल्य दरकिनार किये जा रहे हैं। ऐसे में मनुष्यता के पक्षधर, संवेदनशील लोग इस वातावरण को ठीक करने के उपायों पर अपने अपने ढंग से विचार और पहल करते रहते हैं। सूर्यनाथ सिंह का यह उपन्यास भी इसी तरह की पहलकदमियों में से एक है। ‘तरंगों का तैराक’ उपन्यास का नायक बबुआजी उर्फ अनन्त अधिकारी उर्फ अनन्त प्रभु अपने समय की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, हर तरह की विसंगति से लड़ने, उसे दूर करने का प्रयास करता है। इसके लिए वह विज्ञान और अध्यात्म के सूत्रों-सिद्धान्तों का सहारा लेता है। उसका मानना है कि सारी दुनिया तरंगों का खेल है। उसे विश्वास है कि अगर आदमी के भीतर की तरंगों को ठीक कर दिया जाए तो दुनिया के तमाम युद्ध, झगड़े, वैमनस्य, अनैतिक गतिविधियाँ, वृत्तियाँ समाप्त हो सकती हैं। वह इसी दिशा में काम करता है। मगर उसकी मुलाकात तीन तिलंगों यानी प्रशांत, बल्लू और अभ्युदय से होती है और उसकी दिशा बदल जाती है। उसके जीवन में एक अजीब द्वन्द्व शुरू हो जाता है। तीन तिलंगे अनन्त अधिकारी की आध्यात्मिक चेतना को धार्मिक उद्यम में बदलने का उपक्रम करते हैं। वे उसे अनन्त प्रभु बना और समझा-बुझा कर एक आश्रम की स्थापना करते हैं। उस आश्रम को वे कॉरपोरेट के ढंग से चलाने का प्रयास करते हैं। अनन्त अधिकारी इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर पाता, पर लोक-मन से जुड़ने और उसकी उलझी तरंगों को सुलझाने के लोभ में वह उसका विरोध भी नहीं कर पाता। इस उपन्यास में बहुत सारी घटनाएँ, बहुत सारी युक्तियाँ संकेतकों के रूप में उपस्थित होती हैं। अपने समकाल को उकेरने के लिए कई नयी तजवीजें की गयी हैं। मसलन, इसमें मस्कवा मंकी एक युक्ति के रूप में आता है, जो दुनिया भर में घट रही घटनाओं और साजिशों को तरंगों के रूप में पकड़ता है। वह एलन मस्क के प्रयोगशाला पार्क से भागा हुआ मस्तिष्क में चिप-लगा बन्दर है। उसके जरिये अनन्त प्रभु दुनिया की हलचलों को देखते, समझते हैं। इसी तरह बहुत सारी घटनाएँ – जैसे कि धर्म के नाम पर चलने वाला गोरखधन्धा, लोकतन्त्र की हत्या – प्रतीकों के सहारे और नाटकीय रूप में घटती हैं। यह उपन्यास हमारे समय का एक आईना है, जिसमें राजनीतिक और पूँजीवादी गठजोड़ से उत्पन्न मानव-विरोधी, असामाजिक स्थितियों के अक्स दीखते हैं। यह उपन्यास हमारे समय में अभिव्यक्त के पुराने पड़ गये औजारों को छोड़कर कुछ नयी युक्तियाँ रचता है।


 

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Description

TARANGO KA TAIRAK AUR TEEN TILANGE (Novel) by Surya Nath Singh


About The Author

सूर्यनाथ सिंह
जन्म : 14 जुलाई 1966 को गाजीपुर (उ. प्र.) के सवना गाँव में। शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी की।
कृतियाँ : कुछ रंग बेनूर, धधक धुआँ धुआँ, कोई बात नहीं (सभी कहानी संग्रह), चलती चाकी, नींद क्यों रात भर नहीं आती, तरंगों का तैराक और तीन तिलंगे, आधी रात डुगडुगी (सभी उपन्यास)। बांग्ला से हिन्दी में अनूदित पुस्तकें हैं-‘ आशापूर्णा देवी की श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘गाथा मफस्सिल’ : देवेश राय, ‘खोये का गुड्डा’ अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, ‘राजा राममोहन राय’: विजित कुमार दत्त, ‘अंतरंग आलोक’: तापस सेन। सम्मान कहानी संग्रह ‘धधक धुआँ धुआँ’ के लिए उ. प्र. हिन्दी संस्थान का यशपाल पुरस्कार, उपन्यास ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ के लिए प्रेमचन्द पुरस्कार और स्पन्दन पुरस्कार। इसके अलावा सूचना प्रसारण विभाग का भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार और हिन्दी अकादमी दिल्ली के बाल एवं किशोर पुरस्कार। बाल उपन्यास ‘कौतुक ऐप’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार।
सूर्यनाथ सिंह पेशे से पत्रकार रहे हैं। बाईस साल दैनिक ‘जनसत्ता’ में कार्यरत रहने के बाद जून 2025 में एसोसिएट एडिटर के पद से सेवानिवृत्त। सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन ।


Additional information

Author

Surya Nath Singh

ISBN

978-93-6201-361-3

Binding

Paperback

Language

Hindi

Pages

360

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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