Description
EK BANAILE SAPNE KI ANDHYATRA (Novel) by Nilim Kumar
About The Author
नीलिम कुमार
1961 में जन्मे नीलिम कुमार असमिया भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। उनके 24 कविता संग्रह, तीन उपन्यास और अन्य गद्य-रचनाएँ प्रकाशित हैं। उन्हें सी.के. नारायण रेड्डी राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार (2025), कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार, उदय भारती पुरस्कार, सब्दा पुरस्कार, रज़ा फाउण्डेशन पुरस्कार, रमानाथ भट्टाचार्य फाउण्डेशन पुरस्कार, डिस्टिंग्विश्ड लीडरशिप पुरस्कार, मफिजुद्दीन अहमद हजारिका पुरस्कार, ईगल साहित्य पुरस्कार आदि प्राप्त हुए हैं।
उनकी कविताओं का अनुवाद फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, अँग्रेजी, हिन्दी, नेपाली, मराठी, पंजाबी, बांग्ला, कन्नड़, उर्दू और तमिल सहित अनेक भाषाओं में हुआ है। उनकी कविताओं के तीन अँग्रेजी, तीन हिन्दी, एक पंजाबी और एक बांग्ला में अनूदित संग्रह प्रकाशित हैं। उनकी कविताएँ बेंगलुरु, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, कॉटन, मिजोरम, बोडोलैण्ड, के.के. संदिकै, भट्टदेव, कुमार भास्कर वर्मा और दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।
नीलिम साहित्य अकादेमी के प्रतिनिधि के रूप में बांग्लादेश और भारत-फ्रांस सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत फ्रांस की यात्रा कर चुके हैं। पत्नी और दो पुत्रियों के साथ गुवाहाटी में रहते हैं।
विनोद रिंगानिया
जन्म : 1962, असम के बरपेटा रोड में। कई दशकों तक गुवाहाटी से प्रकाशित कई समाचार पत्रों का सम्पादन तथा स्तम्भ लेखन। यूरोप के अलावा 12 देशों की यात्राओं पर आधारित यात्रा वृत्तान्त ‘ट्रेन टू बांग्लादेश’ प्रकाशित । कथेतर साहित्य में ‘असम कहाँ-कहाँ से गुज़र गया’ का प्रकाशन। साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत कवि हरेकृष्ण डेका, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि नीलमणि फूकन के कविता संग्रहों का हिन्दी अनुवाद तथा साहित्य अकादेमी से प्रकाशन। असमिया कवि अनीसुज्जमाँ के कविता संग्रह ‘हरा चाँद’ का हिन्दी अनुवाद लखनऊ से प्रकाशित । ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के उपन्यास ‘डॉ. वेड की डायरी’ तथा ‘रेत से रेशम तक’ प्रकाशित। हिन्दी बाल कहानियों का असमिया में अनूदित संग्रह साहित्य अकादेमी से प्रकाशित। कहानियाँ विभिन्न पत्रिकाओं में छपती रही हैं।






























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