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BANJAR (Novel) by Ravindra Shobhne

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बंजर – रवीन्द्र शोभणे

अनुवादक: संध्या पेडणेकर


‘बंजर’ नामक इस उपन्यास के केन्द्र में है अकाल। अच्छा-खासा गाँव इक्कीसवीं सदी में निर्धन होते-होते आखिरी साँस लेते हुए दिखाई देता है, इसी वास्तविकता का चित्रण रवीन्द्र शोभणे इस उपन्यास में करते हैं। गाँव-कस्बा इस कहानी का केन्द्र है। गाँव-कस्बे से ही मृत्यु और जीवन के बीच खड़ी इंसानियत का विराट दर्शन होता है यही सत्य ‘बंजर’ का प्राण है। इक्कीसवीं सदी के शुरू में ही वैश्वीकरण, मुक्त अर्थव्यवस्था का दशावतारी अनुभव कृषि व्यवस्था को होने लगता है। परिणामस्वरूप ग्लोबलाइजेशन के कारण गाँव-कस्बे का जन-जीवन विनाश की ओर झुकने लगता है। कृषि व्यवस्था का खून चूसने वाला, उसे निष्प्रभ करने वाला वास्तव चारों ओर दिखाई देता है। उपजाऊ जमीन की सर्जनशीलता का अन्त होने लगता है। प्राकृतिक मुसीबतों की कतार निर्दयी बनकर कृषिजनों के जीवन को तितर-बितर कर देती है।
पाठकों को इस उपन्यास के माध्यम से गहरा जीवनानुभव लेखक देते हैं।
इक्कीसवीं सदी के शुरू में ही कृषि व्यवस्था का यह जानलेवा अनुभव, निःशब्द कर देने वाला वर्णन मराठी उपन्यासों में पहली बार होता है, यह इस उपन्यास की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
रवीन्द्र शोभणे जैसे सशक्त उपन्यासकार इन अनुभवों का चित्रण करते हुए गाँव-कस्बे को जीवन्त रूप देते हैं। और यह रूप देते हुए वह अपनी भूमि का हिस्सा बनकर प्रस्तुत उपन्यास को उजागर करते हैं। और यही इस उपन्यास की सबसे बड़ी खूबी है।


 

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Description

BANJAR (Novel) by Ravindra Shobhne, Translated by Sandhya Pednekar


About The Author
रवीन्द्र शोभणे
जन्म : 15 मई 1959. कहानी, उपन्यास, आलोचना, ललित लेखन, सम्पादन, व्यक्तित्व-चित्रण आदि विभिन्न विधाओं में सहजता से अपने लेखन के जरिये अपनी मुहर लगाने वाला मराठी साहित्य की दुनिया का एक महत्त्वपूर्ण नाम। खरसोली (ता. नरखेड, जिला नागपुर) में बिल्कुल साधारण परिवार में जन्म। विद्यार्थी समय से ही लेखन की शुरुआत। 1983 में ‘ प्रवाह’ नाम से पहला उपन्यास प्रकाशित। अब तक ग्यारह उपन्यास, आठ कहानी संकलन, छह आलोचनात्मक किताबों के साथ मराठी साहित्य में बेहतरीन योगदान। अपने लेखन के जरिये मानवी रिश्तों की जटिलता, इंसानी रिश्तों में उभरने वाले परिवर्तनों की खोज, बाहरी वास्तविकता के आक्रमण से मानवी भावविश्व में होने वाली मूल्यों और आदर्शों की गिरावट आदि बातें उनके लेखन की विशेषताएँ हैं। जीवन की वास्तविकता को गहरे और चिन्तनशील स्तर पर निरन्तर खोजना यह रवीन्द्र शोभणे जी के लेखन का मूलधर्म है। मराठी साहित्य में श्रेष्ठ रचनाकारों को दिये जाने वाले महाराष्ट्र शासन के सर्वोच्च पुरस्कार विंदा करंदीकर जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित। कहानी, उपन्यास और आलोचना, इन विधाओं में महत्त्वपूर्ण लेखन के लिए अन्य कई महत्त्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित। सन् 2024 में अमलनेर (जि. जळगांव) में संपन्न हुए 97वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता से गौरवान्वित ।


संध्या पेडणेकर
कॅरियर की शुरुआत विभिन्न महाविद्यालयों में अध्यापन से। कुछ समय सरकारी कार्यालयों में अहिन्दी भाषी कर्मचारियों को हिन्दी पढ़ाया। कॅरियर का अन्तिम पड़ाव राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एंव प्रशिक्षण परिषद में वरिष्ठ सलाहकार। पत्रकारिता, स्तम्भलेखन, रेडियो तथा दूरदर्शन आदि माध्यमों के लिए उद्घोषिका, पटकथा लेखन, साहित्य लेखन और अनुवाद का काम किया। मराठी के लोकसत्ता, सांज लोकसत्ता, दै. लोकमत, सकाळ, नवाकाळ आदि और हिन्दी के जनसत्ता, संझा जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, राजस्थान पत्रिका, लोकमत समाचार, नई दुनिया, दोपहर का सामना आदि समाचार पत्रों में तथा कुछ अन्य पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेखनकार्य किया।
हिन्दी और मराठी में अनेक पुस्तकों का अनुवाद किया।
अन्य : डिग्री कॉलेजों में हिन्दी भाषा का अध्यापन। केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण संस्थान, मुम्बई में व्यावहारिक हिन्दी भाषा का अध्यापन। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, दिल्ली में वरिष्ठ परामर्शदात्री।


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Additional information

Author

Ravindra Shobhne

Translator

Sandhya Pednekar

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-854-0

Pages

431

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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