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  • Maine Apni Maa Ko Janm Diya Hai -Rashmi Bhardwaj (Paperback)

    Maine Apni Maa Ko Janm Diya Hai – Rashmi Bhardwaj (Paperback)
    मैंने अपनी मां को जन्म दिया है – रश्मि भारद्वाज

    जानी-मानी लेखिका रश्मि भारद्वाज के कविता संग्रह ‘मैंने अपनी मां को जन्म दिया है’ में जीवन के विविध पक्षों की छाप है। उनकी कविताएं दुख, मुक्ति और स्वाभिमान के मुद्दों के अतिरिक्त विस्थापन, पर्यावरण और सहकारिता के वृहत्तर प्रश्नों से भी टकराती हैं।

    111.00130.00
  • Jeevan Ho Tum By Nishant -Paperback

    Jeevan Ho Tum By Nishant – Paperback

    क ऐसे कठिन समय में जब चारों तरफ सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर उथल-पुथल मची हुई हो, जब आम आदमी के हित को बहुत पीछे छोड़ सत्ता और तन्त्र के पक्ष में एक खास तरह की मानसिकता तैयार की जा रही हो, जब आम आदमी की जिंदगी को चन्द अस्मिताओं में सिमटा कर उसे वोट बैंक में तब्दील किया जा रहा हो

    117.00
  • Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap -Paperback

    Lekin Udas Hai Prithvi – Madan Kashyap – Paperback Edition
    लेकिन उदास है पृथ्वी-मदन कश्यप

    यह कविता संग्रह वैशाली की माटी की महक में तो सनी हुई है ही, कवि ने इसे अत्यन्त कलात्मक रूप भी प्रदान किया है। उसकी ‘गनीमत है’—जैसी कविताएँ इसका साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।

    नौवाँ दशक कविता की वापसी का दशक है। ऐसा कहना न केवल इस दृष्टि से सार्थक है कि इसमें कविता फिर साहित्य के केन्द्र में स्थापित हो गयी, बल्कि इस दृष्टि से भी कि इसमें गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता वाली कविता अपने निथरे रूप में सामने आयी और पूरे परिदृश्य पर छा गयी।

    112.00
  • Kavita Bhavita – Gyanendrapati – Paperback

    Kavita Bhavita – Gyanendrapati (Paperback)

    कविता क्या है’ का ठीक-ठीक उत्तर न आलोचकप्रवर रामचंद्र शुक्ल ढूँढ पाये न अन्य विदग्ध जन, कोशिशें तो निरंतर की जाती रहीं-न जाने कब से। सो परिभाषाएँ तो ढेरों गढ़ी गईं, लेकिन वे अधूरी लगती रहीं। पारे को अंगुलियों से उठाना संभव न हो सका।

    190.00
  • Tani Hui Rassi Par by Sanjay Kundan Paperback

    Tani Hui Rassi Par by Sanjay Kundan – Paperback Edition
    तनी हुई रस्सी पर – संजय कुंदन

    संजय कुंदन की कविता वर्तमान में, हमारे चारों तरफ घटित हो रहे विद्रूपों, विपर्ययों और रूपान्तरणों की बाहरी-भीतरी तहों. उनकी छिपी हई परतों में जाती है और एक ऐसा परिदृश्य तामीर करती है जिसमें हम राजनीतिक सत्ता-तन्त्रों, तानाशाह व्यवस्थाओं की क्रूरता, धूर्तता और ज्यादातर मध्यवर्गीय संवेदनहीनताओं को हलचल कर

    117.00
  • Ganga Beeti (Gangu Teli Ki Jabani) By Gyanendrapati PaperBack

    Ganga Beeti (Gangu Teli Ki Jabani) Paperback Edition
    गंगा-बीती (गंगू तेली की ज़बानी)

    इक्कीसवीं सदी दहलीज पर थी, जब ज्ञानेन्द्रपति का कविता-संग्रह ‘गंगातट’ शाया हुआ था। तब हिंदी जगत् में उसका व्यापक स्वागत हुआ था और उसे नयी राह खोजने वाली कृति की तरह देखा-पढ़ा गया था। ‘गंगातट’ को किन्हीं ने प्रकृति और सभ्यता के द्वन्द्वस्थल के रूप में चीन्हा था, तो किन्हीं को वहाँ वैश्विक परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों को स्थानिकता की जमीन पर लखने का ईमानदार उद्यम दिखा था जिसमें भूमण्डलीकरण के नाम पर भूमण्डीकरण में जुटे बेलगाम साम्राज्यवादी पूँजीवाद का प्रतिरोध परिलक्षित किया जा सकता था।

    172.00
  • Ujalon Ko Khabar Kar Do – Balli Singh Cheema

    Ujalon Ko Khabar Kar Do – Balli Singh Cheema
    उजालों को ख़बर कर दो’ – बल्ली सिंह चीमा

    उजालों को ख़बर कर दो’ बल्ली सिंह चीमा का पाँचवाँ और नवीनतम संग्रह है। इस नये संग्रह की ग़ज़लें और उसके शेर राजनीतिक समझ और आसपास के वातावरण से उपजे हैं। निश्चित रूप से यह राजनीतिक समझ जन सरोकारों से ओतप्रोत है।

    112.00
  • Neem Roshni Main – Madan Kashyap

    Neem Roshni Main – Madan Kashyap
    नीम रोशनी में- मदन कश्यप

    मदन कश्यप की कविताओं का यह नया संग्रह ‘नीम रोशनी में’ की गयी एक सघन यात्रा की तरह है जो हमारे समाज के इतिहास, यथार्थ और नियति के सवालों से सामना करती चलती है। इस नीम रोशनी में’ हालाँकि सब कुछ दीखता है पर कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं दीखता और इसमें कविता भी नहीं लिखी जा सकती

    130.00
  • Door Tak Chuppi By Madan Kashyap

    Door Tak Chuppi By Madan Kashyap
    दूर तक चुप्पी – मदन कश्यप

    मदन कश्यप के इस नये संग्रह की कविताओं की एक खास बात यह है कि सभी कविताएँ छोटी हैं और विषम पंक्तियों की हैं।

    110.00
  • Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap Paperback

    Pansokha Hai Indradhanush – Madan Kashyap – Paperback Edition
    पनसोखा है इन्द्रधनुष – मदन कश्यप

    सन् 1972-73 के आस-पास से अपनी काव्य-यात्रा शुरू करने वाले कवि मदन कश्यप का छठा संग्रह है-‘पनसोखा है इन्द्रधनुष’। लगभग आधी शताब्दी की यह काव्य-यात्रा कई मायनों में विशिष्ट रही है, चुनौतीपूर्ण भी। मदन कश्यप के काव्य-व्यक्तित्व के वैशिष्ट्य को यह संग्रह कई अर्थों में ज्यादा प्रोद्भासित करता है।

    105.00
  • Ujaas – Jitendra Shrivastav Paperback

    Ujaas – Jitendra Shrivastav – Paperback Edition

    1990 के आसपास जिन कवियों ने लिखना आरंभ किया और साहित्य में अपने लिए एक अलग पहचान बनायी, उनमें जितेन्द्र श्रीवास्तव महत्त्वपूर्ण हैं। प्रस्तुत संग्रह ‘उजास’ उनके तीन पूर्ववर्ती संग्रहों का समुच्चय है। ये संग्रह हैं- ‘अनभै कथा’ (2003), ‘असुंदर सुंदर’ (2008) और ‘इन दिनों हालचाल’ (2000, 2011)।

    255.00300.00
  • Chhaya Ka Samudra By Mahesh Alok PaperBack

    Chhaya Ka Samudra By Mahesh Alok

    नब्बे के बाद जिन काव्य-व्यक्तित्वों का विकास हुआ, उसमें महेश आलोक प्रमुख हैं। यह समय सिर्फ कविता के स्वर बदलने का नहीं है। भारतीय समाज, उसकी राजनीति सब कुछ अनिवार्यतः बदल रही थी। इस बदलाव के कारण कविता की संवेदनात्मक संरचना बदल गयी।

    145.00