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Samvidhan, Sangh aur Dr. Ambedkar by Ram Puniyani

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संविधान, संघ और डॉ. अम्बेडकर – राम पुनियानी

सम्पादक रविकान्त


अम्बेडकर को राष्ट्र विरोधी बताने वाले वे लोग हैं जिनके पुरखे आजीवन अँग्रेजों की दलाली करते रहे। अँग्रेजी सत्ता से पेंशन पाते रहे। 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में देश से गद्दारी करते हुए हिन्दुत्ववादियों ने अँग्रेजों का साथ दिया था। इसके बाद उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज के खिलाफ भारतीय नौजवानों को अँग्रेजों की फौज में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया था। आरएसएस और अन्य हिन्दुत्ववादियों के इस चरित्र को आज पूरा देश जान चुका है। राष्ट्रवाद और देशभक्ति की खाल ओढ़े ये भेड़िए असल में दलितों और पिछड़ों के खून के प्यासे हैं। रक्तिपपासु ब्राह्मणवाद हमेशा से जाति भेद और शोषण पर ही जिन्दा रहा है। जातियों का संहार होते ही परजीवी ब्राह्मणवाद खुद अपनी मौत मर जाएगा। इसीलिए पुनः सांस्कृतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए जाति व्यवस्था और मनुस्मृति के आधार पर कर्म बहाल करने की घोषणा की जा रही है। डॉ. अम्बेडकर का संविधान इसमें सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए वे संविधान को ही मिटा देना चाहते हैं।
– भूमिका से


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Description

Samvidhan, Sangh aur Dr. Ambedkar by Ram Puniyani


राम पुनियानी

जन बुद्धिजीवी, लोकप्रिय वक्ता, इतिहास और समकालीन राजनीति के अध्येता, धर्मनिरपेक्षता और समाज अध्ययन केन्द्र के अध्यक्ष, साम्प्रदायिक सद्भावना और राष्ट्रीय एकता के लिए निरन्तर लेखन एवं सक्रियता, अनेक किताबों के लेखक, जैसे- साम्प्रदायिक राजनीति (2002), गांधी की दूसरी बार हत्या (2003), जाति और साम्प्रदायिकता (2015), अंबेडकर और हिन्दुत्व की राजनीति (2016), हिंसा-साम्प्रदायिकता (2021), भारतीय राष्ट्रवाद बनाम हिन्दू राष्ट्रवाद (2021), अंबेडकर, दलित और स्त्री प्रश्न (2023), वैश्विक आतंकवाद और भारत की अस्मिता (2024), आरएसएस और हिन्दुत्व की राजनीति (2024), खतरे में धर्मनिरपेक्षता (2025) Religious Nationalism, Social Perception and Violence (2021)। सम्मान : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय एकता अवार्ड (2006), राष्ट्रीय एकता अवार्ड (2007)

रविकान्त (सम्पादक)

अंबेडकरवादी विचारक, राजनीतिक विश्लेषक, दलित मामलों के विशेष जानकार, साहित्य- समीक्षक, सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए निरन्तर लेखन एवं सक्रियता, कई किताबों के लेखक और सम्पादक, जैसे-आलोचना और समाज (2016), आज के आईने में राष्ट्रवाद (2018), आजादी और राष्ट्रवाद (2018), ‘आधा गाँव’ में मुस्लिम अस्मिता (2019), वैश्वीकरण, हिन्दी साहित्य और आलोचना (2020), इतिहास, धर्म और राजनीति (2020), अंबेडकर, दलित और स्त्री प्रश्न (2023), अद्यतन हिन्दी काव्य (2023), प्रतिनिधि कविताएँ ओमप्रकाश वाल्मीकि (2024), सम्पूर्ण कविताएँ : ओमप्रकाश वाल्मीकि (2024), वैश्विक आतंकवाद और भारत की अस्मिता (2024), आरएसएस और हिन्दुत्व की राजनीति (2024), खतरे में धर्मनिरपेक्षता (2025)। पत्रिका सम्पादन : अदहन सम्प्रति : एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।


Additional information

Author

Ram Puniyani

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-196-1

Pages

190

Publisher

Setu Prakashan Samuh

1 review for Samvidhan, Sangh aur Dr. Ambedkar by Ram Puniyani

  1. Rakesh Kumar

    मौजूदा राजनैतिक स्तिथियों में संविधान से दूर ले जाने की संघ की कोशिश को परत दर परत विस्तार से अंकित किया है, डॉ. अम्बेडकर जी को कोई अच्छे से पढ़ा हुआ और समझने वाला ही ऐसी पुस्तक की रचना कर सकता है, राम पुनियानी जी की इस कृति को सलाम और सम्पादक श्री रविकान्त जी का भी आभार ।

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