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Lekh-Aalekh : premchand aur premchandottar katha sahitya (Part-IV) by Nandkishore Naval

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लेख-आलेख (प्रेमचन्द और प्रेमचन्दोत्तर कथा-साहित्य) – नंदकिशोर नवल

खण्ड-4
सम्पादक : योगेश प्रताप शेखर अपूर्वानंद


प्रेमचन्द हिन्दी कथालोचना के अनिवार्य सन्दर्भ या प्रस्थान बिन्दु हैं। हिन्दी आलोचना में उनके साथ दो तरह का सलूक हुआ। उन्हें भारतीय ग्रामीण यथार्थ का लेखक माना गया। इस पर प्रायः सहमति बन गयी कि वे भारतीय किसान जीवन की त्रासदी के कहानीकार हैं। दूसरी तरफ इसे स्वीकार तो किया गया लेकिन इसी में उनकी न्यूनता भी देखी गयी। समाज का बाहरी नाटक उन्हें इतना खींचता था कि वे भूल गये कि इस नाटक के पात्रों का भीतरी जीवन भी है। आगे चलकर यह भी कहा गया कि ग्रामीण यथार्थ को वे खण्डित रूप में ही देख सके हैं। उसके विषाद-पक्ष पर उनकी निगाहें टिकी रहीं और वे ग्रामीण व्यक्ति के उल्लास को देखने में अक्षम रहे। बीसवीं सदी के अन्त और इक्कीसवीं सदी के आरम्भ आते-आते उनका सबल माना जाने वाला पक्ष, अर्थात् ग्रामीण जीवन का चित्रण इस दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया कि उसमें दलित समुदाय को उच्च जाति की निगाह से ही चित्रित किया गया है।

 – भूमिका से

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Description

lekh-aAlekh : premchand aur premchandottar katha sahitya (Part-IV) by Nandkishore Naval


About The Author

 नंदकिशोर नवल
जन्म : 2 सितम्बर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली, बिहार)।
निधन : 12 मई 2020
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. (निराला का काव्य-विकास) ।
नंदकिशोर नवल
प्रमुख मौलिक कृतियाँ: ‘हिन्दी आलोचना का विकास’, ‘मुक्तिबोध : ज्ञान और संवेदना’, ‘निराला : कृति से साक्षात्कार’, ‘मैथिलीशरण’, ‘तुलसीदास’, ‘सूरदास’, ‘रीतिकाव्य’, ‘दिनकर : अर्धनारीश्वर कवि’, ‘समकालीन काव्य-यात्रा’, ‘मुक्तिबोध की कविताएँ : बिम्ब-प्रतिबिम्ब’, ‘पुनर्मूल्यांकन’, ‘शताब्दी की कविता’, ‘निराला-काव्य की छवियाँ’, ‘कविता के आर-पार’, ‘कविता: पहचान का संकट’, ‘निकष’, ‘रचनालोक’, ‘आधुनिक हिन्दी कविता का इतिहास’, ‘हिन्दी कविता: अभी, बिल्कुल अभी’, ‘लेख आलेख (आलोचना के प्रश्न) खण्ड-1’।
प्रमुख सम्पादित कृतियाँ: ‘निराला रचनावली’ (आठ खण्ड), ‘दिनकर रचनावली’ (आरम्भिक पाँच काव्य-खण्ड), ‘मैथिलीशरण संचयिता’, ‘नामवर संचयिता’, ‘स्वतन्त्रता पुकारती’, ‘मुक्तिबोध कवि-छवि’, ‘निराला : कवि-छवि’, ‘हिन्दी साहित्य-शास्त्र’, ‘छायान्तर’, ‘सन्धि-वेला’, ‘अन्त-अनन्त’, ‘कामायनी परिशीलन’, ‘खुल गया है द्वार एक’, ‘हिन्दी की कालजयी कहानियाँ’, ‘बीसवीं शती: कालजयी साहित्य’, ‘पदचिह्न’।
मुख्य सम्पादित पत्रिकाएँ: ‘ध्वजभंग’, ‘सिर्फ’, ‘धरातल’, ‘उत्तरशती’, ‘कसौटी’, ‘आलोचना’ (सह-सम्पादक के रूप में)।


अपूर्वानंद
आलोचना अपूर्वानंद का व्यसन है। आलोचना अपने व्यापक अर्थ और आशय में। आलोचना का लक्ष्य पूरा मानवीय जीवन है, साहित्य जिसकी एक गतिविधि है। इसलिए शिक्षा, संस्कृति और राजनीति की आलोचना के बिना साहित्य की आलोचना सम्भव नहीं।
हिन्दी-अँग्रेजी की अनेक सम्पादित पुस्तकों के अतिरिक्त ‘सुंदर का स्वप्न’, ‘साहित्य का एकांत’ तथा प्रेमचन्द पर एक किताब ‘यह प्रेमचन्द हैं’ और मुक्तिबोध पर ‘मुक्तिबोध की लालटेन’ प्रकाशित। कुछ समय तक ‘आलोचना’ पत्रिका का सम्पादन। पेशे से अध्यापक हैं। अभी दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से सम्बद्ध हैं।


योगेश प्रताप शेखर
जन्म : 27 जून 1979 ई.
शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. हिन्दी (पटना विश्वविद्यालय)
प्रकाशन : ‘हिन्दी के रचनाकार आलोचक’ किताब प्रकाशित। ‘आलोचना’, ‘तद्भव’, ‘समास’, ‘हंस’, ‘आजकल’, ‘पाखी’, ‘पुस्तक-वार्ता’ आदि पत्रिकाओं में लेख एवं समीक्षाएँ।
‘द वायर’, ‘सत्य हिन्दी’, ‘जानकीपुल’, ‘न्यूजलॉण्ड्री’ आदि ऑनलाइन पोर्टल पर लेख।
सम्प्रति : दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय, गया (बिहार) में सहायक प्राध्यापक ।


Additional information

Author

Nandkishore Naval

Editor

Yogesh Pratap Shekhar & Apoorvanand

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-023-0

Pages

435

Publication date

29-08-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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