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JARO KA SANGEET : Kedarnath Singh ki Kavita by Dr. Mukteshwar Nath Tiwari

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जड़ों का संगीत केदारनाथ सिंह की कविता – मुक्तेश्वर नाथ तिवारी


केदारनाथ सिंह की कविताएँ विकारग्रस्त समाज की एकलध्रुवीयता और एकवचनवादिता पर प्रहार करने वाली कविताएँ हैं और उससे भी कहीं गहरे हाशियाग्रस्त मानव-समूहों के प्रति गहरी आस्था को प्रतिष्ठापित करने वाली कविताएँ हैं। मुख्यधारा और आंचलिकता के द्विचर से बिल्कुल दूर रहकर उन्होंने कुछ ऐसे व्यक्तिवाचक नाम सिरजित किये जो अब तक साहित्य-बदर रहे हैं। ये कविताएँ उस दुर्योग की ओर भी संकेत करती हैं जिसके तहत ये व्यक्तिवाचक नाम आधुनिकता के आतंक से अपने अस्तित्व की विराटता को खोते जा रहे हैं। उनके यहाँ स्त्री-पात्र और वृद्ध-पात्र बार-बार आते हैं पर उल्लेखनीय यह है कि ये क्रमशः न तो रतिक दृष्टि से निर्मित हैं और न वृद्ध-द्वेष से। कवि केदार की रचनात्मकता को नयी अर्थाभा देने के कई और गुणक हैं। उनकी कविताओं में नरेतर प्रजातियों (घास से लेकर बरगद तक और चींटी से लेकर बाघ तक) की गझिन और केन्द्रीय उपस्थिति हिन्दी कविताओं के एक-आयामी और नरगाथापरक स्वर को भंग करती है। सीकरियों के विरुद्ध बोलने की उनकी राजनीतिक चेतना हिन्दी कविताओं में प्रचलित आक्रोश की किसी परम्परा से न प्रेरित है, न आयातित । कला-तत्त्व और प्रगतिशील संस्कारों के सहमेल से निर्मित कविता अपने युग के मुहावरे को तलाशने का उद्यम करती है।

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Description

JARO KA SANGEET : Kedarnath Singh ki Kavita by Dr. Mukteshwar Nath Tiwari


About The Author

मुक्तेश्वर नाथ तिवारी
भागलपुर में सन् 1964 में जन्म। भागलपुर, घाटशिला और शान्तिनिकेतन में पूरी पढ़ाई। पेशे से अध्यापक । हिन्दी विभाग, दार्जिलिंग गवर्नमेण्ट कॉलेज, दार्जिलिंग (1990-1995), सहायक निदेशक (हिन्दी शिक्षा) शिक्षा निदेशालय, पश्चिम बंगाल सरकार (1995-1996)। सन् 1996 से हिन्दी विभाग, विश्वभारती, शान्तिनिकेतन में अध्यापन। सम्प्रति हिन्दी के प्रोफेसर। समानान्तरता’ (2003), ‘शताब्दी के अन्त में कविता’ (2003), ‘कविता का देशकाल’ (2007), ‘महादेवी के साहित्य का गद्यपर्व’ (2015), ‘साहित्य और जीवन-विवेक’ (2020) । विश्वविद्यालय के रिसर्च जर्नल ‘विश्वभारती पत्रिका’ का सम्पादन।
कृतियाँ : ‘ समकालीन हिन्दी काव्यभाषा और


JARO KA SANGEET by Dr. Mukteshwar Nath Tiwari

Additional information

Author

Dr. Mukteshwar Nath Tiwari

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-653-9

Pages

152

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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