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Rajneeti Mein Fansi Stri Alochana By Dr. Sunita

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राजनीति में फँसी स्त्री आलोचना – डॉ. सुनीता


‘राजनीति में फँसी स्त्री आलोचना’ हिन्दी में अपने ढंग की शायद पहली पुस्तक है जो स्त्री आलोचना की प्रकृति, सम्भावनाओं और मानदण्डों पर विचार करती है। साहित्य की विभिन्न विधाओं में कुछ बरसों से महिला रचनाकारों की संख्या और सक्रियता बढ़ी है, उनके लेखन की पहचान और उपलब्धियाँ भी रेखांकित की जाती रही हैं। अलबत्ता तुलनात्मक रूप से आलोचना में उनकी उपस्थिति और गहमागहमी कम दर्ज हुई है। लेकिन यह किताब स्त्री आलोचना का निरा ब्योरा पेश नहीं करती, न इस शिकायत के अन्दाज में लिखी गयी है कि आलोचना के क्षेत्र में स्त्रियों की भूमिका को कम करके आँका गया है। इसके बजाय डॉ. सुनीता कुछ बुनियादी सवाल उठाती हैं। मसलन, स्त्री आलोचना के मानदण्ड क्या होने चाहिए ? वह कहती हैं : “देश-काल, परिवेश, प्रान्त, सम्प्रदाय, धर्म, विचार, राजनीति और संस्कृतिवाद के आधार पर साहित्येतिहास की लम्बी साहित्यिक परम्पराएँ रही हैं, हाँ! महिला लेखन के आधार पर इतिहास का काल, कार्य विभाजन नदारद है।” जाहिर है, स्त्री आलोचना से उनका आशय सिर्फ आलोचना के क्षेत्र में स्त्री बौद्धिकता की उपस्थिति से नहीं है, न ही इसका अर्थ केवल स्त्री रचनाकारों का स्त्री आलोचकों द्वारा किये जाने वाले मूल्यांकन से है; बल्कि वह समूचे साहित्य को स्त्री दृष्टिकोण से देखने-परखने का प्रश्न है और इसमें अब तक के बहुत सारे मूल्यांकनों, समीक्षाओं, धारणाओं, अवधारणाओं, कसौटियों, प्रतिमानों को उलट-पुलट
देने की सम्भावना निहित है। इस किताब की लेखक यह मानकर चलती हैं कि स्त्री आलोचना का कार्यभार बहुत बड़ा है, जिसमें एक विशेष दायित्व नयी मूल्य-मीमांसा का है। और इस सिलसिले में लेखक कहती हैं कि स्त्री
आलोचना का ताल्लुक जहाँ समाज, इतिहास, संस्कृति आदि से है वहीं ‘भाषा के पारम्परिक पितृसत्तात्मक मानदण्ड त्याग’ से भी है। वह यह भी कहती हैं कि स्त्री आलोचना मनोवैज्ञानिक रचना-दृष्टि को पुष्ट करेगी। लेकिन सारे कार्यभार और सारी सम्भावनाओं के बरअक्स फिलहाल स्थिति यह है कि ‘स्त्री आलोचना राजनीति में फँसी है’। इसलिए यह किताब जहाँ साहित्य में स्त्री बौद्धिकता के नये आयाम के संकेत देती है, वहीं आत्म-निरीक्षण के लिए प्रेरित करने और आगाह करने में भी संकोच नहीं करती।


 

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Description

Rajneeti Mein Fansi Stri Alochana (Criticism) By Dr. Sunita


About The Author

डॉ. सुनीता
कला, साहित्य, आलोचना एवं सोलो वुमन ट्रैवलिंग में सतत सक्रिय डॉ. सुनीता मूलतः उत्तर प्रदेश की हैं। शिक्षा: एम.ए., नेट, पीएच. डी., बी.एड., बीटीसी, पूर्वांचल व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी। हिन्दी, भोजपुरी, अँग्रेजी, कोरियन तथा अन्य भाषा-साहित्य में दक्ष व सक्रिय। राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय मंचों से विविध विषयों पर व्याख्यान। साहित्य की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में बहुविध विधा लेखन, अनूदित व प्रकाशित। कृतियाँ: ‘शोषण में हिस्सेदारी’ (सामाजिक विश्लेषण, 2017), ‘सियोल से सरयू’ (कहानी संग्रह, 2022), ‘शंख पर असंख्य क्रंदन’ (कविता संग्रह, 2023)। ‘सियोल से सरयू’ हेतु ‘सूरज प्रकाश मारवाह साहित्य रत्न पुरस्कार (2022), सावित्री बाई फुले यायावरी राष्ट्रीय सम्मान (2022, पुणे), आलोचना हेतु राहुल सांकृत्यायन सम्मान (2023, सिलीगुड़ी), थाई-भारत गौरव सम्मान (2023, बैंकाक), काका साहेब कालेलकर राष्ट्रीय सम्मान (2024, नयी दिल्ली), भारत-मारिशस साहित्य सम्मान (2024, मारिशस), राष्ट्रीय बाल हितैषी सम्मान (2024, राँची), कहानी संग्रह ‘सियोल से सरयू’ को गोविन्द चौपाल कथा पुरस्कार (2024-2025, बीकानेर) ।


Additional information

Author

Dr. Sunita

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-449-8

Pages

270

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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