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YEH KAUN SI JAGAH HAI (Poetry) by Rajendra Rajan

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यह कौन सी जगह है – राजेन्द्र राजन


यह ऐसा समय है जब खुद अपनी आँख से देखते हुए भी, इने-गिने रचनाकार ही यह बात याद कर पाते हैं कि “बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे / बोल ज़बाँ अब तक तेरी है।” राजेन्द्र राजन अपने समय की घोषित और अघोषित, प्रकट और नामालूम सी विकटताओं, विभीषिकाओं, आशंकाओं और षड्यन्त्रों को उजागर करने का साहस दिखाते हैं, यह अपने आप में उल्लेखनीय है। उल्लेखनीय है उनका स्वर भी, जो सहज सरल सुबोध है लेकिन गहरी मार करता है। सन्तुलित आरोह-अवरोह, सुस्पष्ट शब्दावली, सम्प्रेष्य मन्तव्य। निहायत परिचित मुहावरों, रूपकों, पात्रों के सहारे यह कवि हमारे जाने-पहचाने दृश्यों, घटनाओं और स्थितियों की प्रतीति और भी गहरी कर देता है। गुस्से की बहुतायत लेकिन सही क़िस्म के गुस्से का अभाव हमें बार-बार अपनी ही अन्तरात्मा की पड़ताल करने की चुनौती देता है। व्यंग्य की धार भी विद्रूपताओं पर प्रहार करते सहसा मूकदर्शक पाठक, नागरिक की हमारी अपनी भूमिका को खटखटा जाती है।
यहाँ छोटी-बड़ी कविताओं में कुछेक हैं जो अनेक खण्डों में श्रृंखला की तरह हैं, ‘फन्ने ख़ाँ’- सिर्फ़ फन्ने ख़ाँ सोचता था/ बाक़ी सब सिर हिलाते थे… यह ऐसा ‘नायक’ है जिसके माध्यम से हम अपने देश-परिवेश और जन-मानस की हज़ारों हरकतें प्रत्यक्ष देख सकते हैं। मसलन “अपने ड्राइंग रूम में उसने / एक सन्त की तस्वीर लगा रखी थी और अपने बेडरूम में/ उसी सन्त के हत्यारे की तस्वीर।” यह भी रेखांकित करने योग्य है कि राजेन्द्र राजन अपनी कविता में “लोगों” को यानी “दूसरों” को नहीं, खुद को ही कसौटी पर, कठघरे में, या मोर्चे पर रखकर दिखाते हैं कि यह जगह क्या से क्या हो गयी है, यह समय कैसा समय है।
– गिरधर राठी


 

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Description

YEH KAUN SI JAGAH HAI (Poetry) by Rajendra Rajan

About the Author

राजेन्द्र राजन
जन्म : 20 जुलाई 1960 को वाराणसी में। शिक्षा-दीक्षा भी वाराणसी में। इसके बाद एक लम्बा समय पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में बीता और इस दौरान अधिकांश समय समाजवादी विचार-पत्रिका ‘सामयिक वार्ता’ के सम्पादन कार्य से जुड़े रहे। 1998 में ‘वार्ता’ के साथ वाराणसी से दिल्ली आ गये। 2003 से पन्द्रह बरस हिन्दी दैनिक ‘जनसत्ता’ के सम्पादकीय पेज का जिम्मा सँभाला। जुलाई 2018 में जनसत्ता के वरिष्ठ सम्पादक के पद से सेवानिवृत्त। कविताएँ और कुछ लेख, समीक्षाएँ पत्र-पत्रिकाओं में तथा पहला कविता संग्रह ‘बामियान में बुद्ध’ और नारायण देसाई की पुस्तक ‘माइ गांधी’ का ‘मेरे गांधी’ नाम से अनुवाद प्रकाशित। किसान आन्दोलन केन्द्रित कविता संकलन ‘सड़क पर मोर्चा’ के सह-सम्पादक। वेब पोर्टल ‘समता मार्ग’ के सह-संस्थापक और करीब ढाई साल उसके माडरेटर रहे। सेतु प्रकाशन की ज्ञान श्रृंखला के तहत आचार्य नरेन्द्रदेव संचयन का सम्पादन।

YEH KAUN SI JAGAH HAI (Poetry) by Rajendra Rajan
YEH KAUN SI JAGAH HAI (Hindi Poetry) by Rajendra Rajan

Additional information

Author

Rajendra Rajan

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-830-4

Pages

168

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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